Trump–Petro Rift Softens: लगातार हमलों के बाद ट्रंप ने कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो को व्हाइट हाउस बुलाया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो के बीच लंबे समय से चल रहा राजनीतिक और वैचारिक टकराव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। महीनों तक सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर हमले करने और तीखी बयानबाज़ी के बाद अब ट्रंप ने पेट्रो को बातचीत के लिए व्हाइट हाउस आने का न्योता दिया है। खुद ट्रंप ने इसकी पुष्टि की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में इसे एक अहम संकेत माना जा रहा है।
कोलंबिया वही देश है, जिस पर हाल के महीनों में ट्रंप लगातार हमलावर रहे हैं। उन्होंने कोलंबिया पर वेनेजुएला की तरह नशीली दवाओं की तस्करी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। वहीं, वामपंथी विचारधारा के नेता गुस्तावो पेट्रो को ट्रंप अपने सबसे बड़े वैचारिक विरोधियों में गिनते रहे हैं। कुछ ही दिन पहले ट्रंप ने पेट्रो को सार्वजनिक रूप से मानसिक रूप से ‘बीमार’ तक कह दिया था, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में और तल्खी आ गई थी।
ट्रंप ने खुद दी न्योते की जानकारी
बुधवार को ट्रंप ने बताया कि उनकी और पेट्रो की फोन पर बातचीत हुई है, जिसमें ड्रग्स के खिलाफ नीति और दोनों देशों के बीच मौजूद मतभेदों पर चर्चा की गई। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा,
“कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो से बात करने का अवसर मिला। उन्होंने ड्रग्स की स्थिति और हमारे बीच हुए अन्य मतभेदों को समझाने के लिए फोन किया था। मैंने उनके फोन और लहजे की सराहना की और जल्द ही उनसे मिलने की उम्मीद करता हूं।”
ट्रंप के इस बयान को दोनों देशों के रिश्तों में नरमी की दिशा में पहला बड़ा संकेत माना जा रहा है, खासकर तब जब हाल के महीनों में रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे।
पेट्रो ने भी बातचीत की पुष्टि की
उधर, कोलंबिया की राजधानी बोगोटा में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने भी इस फोन कॉल की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि बातचीत में केवल ड्रग्स का मुद्दा ही नहीं, बल्कि वेनेजुएला की स्थिति पर भी चर्चा हुई है।
पेट्रो लंबे समय से वेनेजुएला के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख रखने के लिए जाने जाते हैं, जबकि ट्रंप वेनेजुएला सरकार और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के सबसे बड़े आलोचकों में रहे हैं। ऐसे में यह बातचीत दोनों नेताओं के बीच वैचारिक मतभेदों के बावजूद संवाद की संभावना को दिखाती है।
45 मिनट की कॉल, राजदूत की अहम भूमिका
इस फोन कॉल से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, यह बातचीत कोलंबिया के अमेरिका में राजदूत डैनियल गार्सिया पेना की पहल पर संभव हो पाई। पेना के वॉशिंगटन में अच्छे राजनीतिक और कूटनीतिक संपर्क माने जाते हैं।
कोलंबिया के रेडियो नेटवर्क ब्लू रेडियो की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कॉल लगभग 45 मिनट तक चली, जिसमें दोनों पक्षों ने खुलकर अपने-अपने दृष्टिकोण रखे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉल केवल औपचारिक शिष्टाचार नहीं थी, बल्कि रिश्तों को पटरी पर लाने की एक गंभीर कोशिश थी।
एक साल में कैसे बिगड़े रिश्ते
पिछले एक साल में ट्रंप और पेट्रो के रिश्ते लगातार बिगड़ते चले गए। सितंबर में तनाव तब चरम पर पहुंच गया, जब पेट्रो ने अपने देश के सैनिकों से कथित तौर पर कहा था कि वे ट्रंप के आदेशों का पालन न करें।
इसके बाद अमेरिका ने गुस्तावो पेट्रो का वीजा रद्द कर दिया। इतना ही नहीं, वाशिंगटन ने कथित तौर पर ड्रग तस्करी को बढ़ावा देने के आरोप में पेट्रो और उनके करीबी सहयोगियों पर व्यक्तिगत प्रतिबंध भी लगाए।
इन कदमों को कोलंबिया ने अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के रूप में देखा, जबकि ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए जरूरी हैं।
ड्रग्स का मुद्दा सबसे बड़ा विवाद
अमेरिका और कोलंबिया के रिश्तों में नशीली दवाओं की तस्करी लंबे समय से सबसे बड़ा विवादास्पद मुद्दा रहा है। ट्रंप का आरोप रहा है कि कोलंबिया सरकार इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रही, जबकि पेट्रो का कहना है कि ड्रग्स की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक ढांचे से जुड़ा सवाल है।
पेट्रो ड्रग्स के खिलाफ युद्ध के पारंपरिक अमेरिकी मॉडल के आलोचक रहे हैं और उन्होंने वैकल्पिक नीतियों की वकालत की है। यही कारण है कि दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर टकराव और गहरा होता चला गया।
क्या बदलेगी अमेरिका–कोलंबिया की दिशा?
अब व्हाइट हाउस के न्योते के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों में वास्तविक बदलाव ला पाएगी या यह सिर्फ एक कूटनीतिक औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के लिए लैटिन अमेरिका में कोलंबिया एक रणनीतिक साझेदार है, खासकर ड्रग्स, अवैध प्रवासन और वेनेजुएला जैसे मुद्दों पर। वहीं पेट्रो भी अमेरिका के साथ पूरी तरह टकराव की स्थिति में नहीं जाना चाहते।
Our Thoughts
ट्रंप और पेट्रो के बीच संभावित व्हाइट हाउस बैठक यह दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बयानबाज़ी और वास्तविक कूटनीति अक्सर अलग रास्ते अपनाती हैं। सार्वजनिक मंचों पर तीखे हमलों के बावजूद, बंद दरवाज़ों के पीछे संवाद की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है।
अगर यह मुलाकात होती है, तो यह ड्रग तस्करी और वेनेजुएला जैसे जटिल मुद्दों पर नए समाधान की दिशा में एक कदम हो सकती है। हालांकि, दोनों नेताओं की वैचारिक दूरी इतनी गहरी है कि किसी बड़े समझौते की उम्मीद फिलहाल सीमित ही दिखती है।
