संसद विवाद: राहुल गांधी का दावा, ‘सच्चाई से बच रहे हैं पीएम मोदी’
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने सोमवार को संसद परिसर में बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi सदन में आने से इसलिए बच रहे हैं क्योंकि वह उस सच्चाई का सामना नहीं कर सकते, जिसे वह पूर्व सेना प्रमुख M. M. Naravane की पुस्तक के एक अंश के जरिए उठाना चाहते थे। राहुल गांधी ने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पर किसी तरह के हमले का सवाल ही नहीं उठता और यदि कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की जानी चाहिए।
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने बीते सप्ताह कहा था कि कांग्रेस के कुछ सांसद सदन के नेता की सीट के पास पहुंच गए थे, जिससे किसी अप्रत्याशित घटना की आशंका बनी और इसी कारण प्रधानमंत्री उनके अनुरोध पर सदन में नहीं आए। विपक्ष इस दावे को खारिज करते हुए इसे बहस से बचने का बहाना बता रहा है।
राजनीतिक और कानूनी पृष्ठभूमि
राहुल गांधी के अनुसार विवाद की जड़ पूर्व सेना प्रमुख एम. एम. नरवणे की पुस्तक से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती थी कि इस पुस्तक के संदर्भ में कोई चर्चा हो। उनका आरोप है कि इसी वजह से सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित की गई और उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि पहले उन्हें किताब का हवाला देने से रोका गया, फिर पत्रिका का संदर्भ देने पर भी आपत्ति जताई गई और अंततः विषय पर बोलने से ही मना कर दिया गया। इस बीच रक्षा मंत्री की ओर से यह कहा गया कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है, जिसे राहुल गांधी ने तथ्यात्मक रूप से गलत बताया।
प्रमुख बयान
राहुल गांधी ने कहा कि यह भी बड़ा सवाल है कि सत्ता पक्ष के एक सांसद निशिकांत दुबे ने कई पुस्तकों का हवाला देते हुए आपत्तिजनक बातें कहीं, लेकिन उन पर कोई आपत्ति नहीं की गई, जबकि विपक्ष को बोलने तक नहीं दिया गया। उन्होंने विपक्ष के आठ सांसदों के निलंबन को भी असहमति दबाने का प्रयास बताया।
प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर लगाए गए आरोपों पर राहुल गांधी ने दो टूक कहा कि विपक्ष का कोई भी सदस्य प्रधानमंत्री को धमकाने की सोच भी नहीं सकता। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास ऐसा कोई ठोस आधार है तो तुरंत एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए। उनका सवाल था कि अगर आरोप इतने गंभीर हैं, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
इस विवाद ने संसद के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते अविश्वास को और गहरा कर दिया है। जहां विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के रूप में देख रहा है, वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि सदन की गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा न सिर्फ संसद बल्कि राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बना रह सकता है।
Our Final Thoughts
संसद किसी भी लोकतंत्र का सबसे अहम मंच होती है, जहां सत्ता और विपक्ष के बीच विचारों का टकराव नीतियों को बेहतर बनाता है। राहुल गांधी द्वारा उठाया गया यह मुद्दा केवल एक किताब या एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक सवाल की ओर इशारा करता है कि क्या विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिल रहा है या नहीं। वहीं, सत्ता पक्ष के लिए भी यह जरूरी है कि वह सुरक्षा और संसदीय मर्यादा के नाम पर उठाए गए कदमों को पारदर्शी तरीके से स्पष्ट करे, ताकि अविश्वास की गुंजाइश न रहे। लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन संवाद का बंद होना किसी भी पक्ष के लिए हितकारी नहीं होता। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि संसद के भीतर संवाद और विश्वास बहाली की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख बनी रहे और जनता के सवालों का उत्तर खुलकर दिया जा सके।
