Breaking News: भारत में 1 लाख महिलाएं बना रहीं Apple iPhone, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नारी शक्ति का दबदबा
नेशनल डेस्क (The Trending People): भारत की मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में इस वक्त एक खामोश लेकिन बेहद ताकतवर क्रांति चल रही है। देश की फैक्ट्रियों में अब युवा महिलाएं तकनीकी उत्पादन की नई कहानी लिख रही हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में इस समय लगभग 1 लाख महिलाएं वैश्विक बाजार के लिए 'Apple iPhone' असेंबल कर रही हैं। यह देश के निजी क्षेत्र में महिलाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के सबसे बड़े और सफल अभियानों में से एक बन गया है।
फैक्ट्रियों में 70% महिला कर्मचारियों का कब्जा (सटीक विवरण)
Apple के प्रमुख कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स, Foxconn और Tata Electronics के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत में चल रही पांच आईफोन फैक्ट्रियों में उत्पादन के पीक सीजन के दौरान करीब 1,40,000 कर्मचारी काम करते हैं। इनमें से लगभग 70 प्रतिशत, यानी करीब 1 लाख कर्मचारी सिर्फ महिलाएं हैं। सबसे खास बात यह है कि इनमें से ज्यादातर महिलाओं की उम्र 19 से 24 साल के बीच है, और बहुतायत के लिए यह उनके जीवन की पहली औद्योगिक नौकरी (Industrial Job) है।
स्थानीय कर्मचारियों और सूत्रों का बयान
फैक्ट्री फ्लोर पर काम करने वाली कई युवा महिलाओं और स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इस रोजगार ने उनकी जिंदगी बदल दी है। तमिलनाडु और कर्नाटक के प्लांट के आस-पास के स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, "इन फैक्ट्रियों ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की लड़कियों को आर्थिक आजादी दी है। कई लड़कियां पहली बार अपने घर से बाहर निकलकर किसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी का हिस्सा बनी हैं, जिससे उनके परिवारों का जीवन स्तर सुधरा है।"
पृष्ठभूमि: 2020 की PLI स्कीम ने कैसे बदली तस्वीर?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह तेज बदलाव पिछले पांच सालों की देन है। भारत सरकार ने साल 2020 में 'स्मार्टफोन प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI)' स्कीम शुरू की थी। इससे पहले भारत में इतने बड़े पैमाने पर महिलाओं की तकनीकी मैन्युफैक्चरिंग में भागीदारी न के बराबर थी। पीएलआई स्कीम के लागू होने के बाद Apple ने भारत में बड़े पैमाने पर आईफोन का उत्पादन शुरू किया, जिससे सीधे तौर पर महिलाओं की बंपर भर्ती में वृद्धि देखी गई।
प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और भविष्य की योजना
स्मार्टफोन PLI स्कीम का उद्देश्य भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को बढ़ावा देना और स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करना है। इस स्कीम का पहला चरण 31 मार्च 2026 को समाप्त होने जा रहा है। सरकारी अधिकारियों और संबंधित मंत्रालयों ने स्पष्ट किया है कि इसके दूसरे संस्करण (PLI 2.0) पर तेजी से काम चल रहा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात में महिलाओं की इस बढ़ती हिस्सेदारी को न सिर्फ बरकरार रखा जाए, बल्कि इसे और गति दी जाए।
स्थानीय व राष्ट्रीय स्तर पर गहरा प्रभाव
आईफोन उत्पादन में महिलाओं की यह भारी हिस्सेदारी दोहरे स्तर पर प्रभाव डाल रही है। स्थानीय स्तर पर, यह युवा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है और उन्हें हाई-टेक औद्योगिक कौशल (Industrial Skills) सीखने का मौका दे रही है। राष्ट्रीय स्तर पर, यह भारत को चीन के विकल्प के रूप में एक मजबूत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बना रहा है, जहां 'नारी शक्ति' देश के निर्यात ग्राफ को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है।
हमारी राय: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, जिसे कभी सिर्फ पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था, आज वहां भारत की बेटियां आईफोन जैसे विश्वस्तरीय उत्पाद बना रही हैं। यह सिर्फ एक रोजगार का आंकड़ा नहीं है, बल्कि नए और आत्मनिर्भर भारत की सच्ची तस्वीर है। सरकार को PLI के अगले चरण में महिला कर्मचारियों के लिए आवास, सुरक्षा और परिवहन जैसी सुविधाओं पर और अधिक ध्यान देना चाहिए, ताकि यह गति कभी धीमी न पड़े।
