भारत के खिलाफ नहीं खेलेंगे मैच, बांग्लादेश के समर्थन में बॉयकॉट का ऐलान, राशिद लतीफ बोले
नई दिल्ली/इस्लामाबाद, दिनांक: 4 फरवरी 2026 — क्रिकेट की दुनिया का सबसे बड़ा महाकुंभ यानी आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 (ICC T20 World Cup 2026) शुरू होने की दहलीज पर है, लेकिन टूर्नामेंट के आगाज से ठीक पहले पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने खेल जगत में भूचाल ला दिया है। 7 फरवरी से शुरू होने वाले इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान ने 15 फरवरी को कोलंबो में होने वाले भारत के खिलाफ अपने हाई-वोल्टेज ग्रुप मैच का बहिष्कार (Boycott) करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। पाकिस्तान सरकार और क्रिकेट बोर्ड (PCB) का यह निर्णय केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक बड़े राजनीतिक विरोध के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कदम बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर किए जाने (या विवाद) के विरोध में उठाया गया है।
इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) को एक धर्मसंकट में डाल दिया है। भारत और पाकिस्तान को ग्रुप-ए में रखा गया है, जिसमें उनके अलावा नामीबिया, नीदरलैंड और अमेरिका जैसी टीमें शामिल हैं। क्रिकेट फैंस जिस 'महामुकाबले' का सालों से इंतजार करते हैं, उस पर अब राजनीति का ग्रहण लग चुका है। पाकिस्तान के इस कदम से न केवल ब्रॉडकास्टर्स को अरबों का नुकसान होगा, बल्कि टूर्नामेंट का रोमांच भी फीका पड़ सकता है।
पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज विकेटकीपर और कप्तान राशिद लतीफ (Rashid Latif) ने इस स्थिति का बेहद सटीक और रणनीतिक विश्लेषण किया है। न्यूज18 से बातचीत के दौरान लतीफ ने अपनी आशंकाएं जाहिर कीं। उनसे पूछा गया था कि अगर पाकिस्तान भारत के खिलाफ मैच छोड़ देता है (जिसका मतलब अंक गंवाना है), तो क्या टीम सुपर-8 या अगले दौर के लिए आसानी से क्वालीफाई कर पाएगी? इस पर पूर्व कप्तान ने बेबाकी से जवाब दिया कि उन्हें इस पर शक है। उन्होंने याद दिलाया कि जब उनकी टीम वेस्टइंडीज में खेली थी, तब भी वे अगले राउंड के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाए थे। यह एक गंभीर मुद्दा है।
लतीफ ने एक बहुत ही पेचीदा सवाल खड़ा किया है, जिसे उन्होंने 'शह और मात' (Checkmate) की स्थिति बताया। उनका तर्क है कि पाकिस्तान शायद यह नहीं सोच रहा कि वह क्वालीफाई करेगा या नहीं, बल्कि यह आईसीसी के लिए सिरदर्द है। मान लीजिए पाकिस्तान अपने बाकी मैच जीतकर अगले राउंड में पहुंच जाता है और वहां फिर से उसका सामना भारत से होता है, तो तब पीसीबी क्या करेगा? क्या वे नॉकआउट मैच का भी बहिष्कार करेंगे? लतीफ का मानना है कि पाकिस्तान स्पिन ट्रैक पर नामीबिया, यूएसए और नीदरलैंड्स को हराने की क्षमता रखता है, इसलिए उनके क्वालीफाई करने के चांस हैं। लेकिन बारिश जैसे फैक्टर खेल बिगाड़ सकते हैं। कुल मिलाकर, यह आईसीसी और पीसीबी के बीच एक रणनीतिक शतरंज का खेल बन गया है।
दूसरी ओर, पाकिस्तान टी20 टीम के कप्तान सलमान अली (Salman Ali) ने इस विवाद पर एक सधी हुई और अनुशासित प्रतिक्रिया दी है। श्रीलंका रवाना होने से पहले मीडिया से बात करते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि खिलाड़ी सरकार और बोर्ड के मुलाजिम हैं। उन्होंने कहा कि हम बोर्ड के साथ अनुबंधित (Contracted) खिलाड़ी हैं और सरकार तथा बोर्ड ने जो भी फैसला लिया है, सभी खिलाड़ी उसके साथ पूरी तरह खड़े हैं। कप्तान ने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि टी20 वर्ल्ड कप सिर्फ भारत के खिलाफ एक मैच खेलने तक सीमित नहीं है। उनकी टीम श्रीलंका में हर मैच में अच्छा प्रदर्शन करने और टूर्नामेंट जीतने के इरादे से जा रही है। सलमान अली ने कहा कि हमारे पास ग्रुप में तीन अन्य मैच हैं और हम उन सभी को जीतकर अगले दौर के लिए क्वालीफाई करने की कोशिश करेंगे। पाकिस्तान अपने अभियान की शुरुआत 7 फरवरी को नीदरलैंड के विरुद्ध करेगा, इसके बाद 10 फरवरी को अमेरिका और 18 फरवरी को नामीबिया से भिड़ंत होगी।
हमारी राय
खेल और राजनीति का यह मिश्रण क्रिकेट के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। पाकिस्तान का यह फैसला बांग्लादेश के समर्थन में हो सकता है, लेकिन इसका सबसे बड़ा नुकसान खुद पाकिस्तान क्रिकेट और वहां के फैंस को होगा। भारत के खिलाफ मैच न खेलना मतलब महत्वपूर्ण अंक गंवाना और नेट रन रेट पर दबाव बढ़ाना है।
The Trending People का विश्लेषण है कि आईसीसी को अब सख्त फैसले लेने होंगे। अगर टीमें अपनी राजनीतिक पसंद-नापसंद के हिसाब से मैच चुनेंगी, तो वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट का औचित्य ही खत्म हो जाएगा। राशिद लतीफ का सवाल वाजिब है—अगर यह बहिष्कार फाइनल तक जारी रहा, तो क्या आईसीसी ट्रॉफी प्लेट में सजाकर दूसरी टीम को दे देगा? यह 'बॉयकॉट' पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर अलग-थलग कर सकता है। क्रिकेट को कूटनीति का हथियार बनाना एक आत्मघाती कदम है।
