वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव: भारत और चीन बने दुनिया के 'ग्रोथ इंजन', IMF की रिपोर्ट देख एलन मस्क बोले- 'पावर बैलेंस शिफ्ट हो रहा है'
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली | वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) के मोर्चे पर एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। पश्चिमी देशों का दबदबा अब कम हो रहा है और एशिया, विशेषकर भारत और चीन, अब दुनिया की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख इंजन (Growth Engines) बनकर उभरे हैं।
इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (IMF) द्वारा जारी की गई 'जनवरी 2026 की ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट' के आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि दुनिया का आर्थिक गुरुत्वाकर्षण अब तेजी से ग्लोबल साउथ की ओर खिसक रहा है।
चीन और भारत का दबदबा: 43.6% हिस्सेदारी
IMF की इस ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में वैश्विक जीडीपी (GDP) वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान एशियाई दिग्गजों का है:
- चीन (China): वैश्विक वृद्धि में सबसे बड़ा 26.6% का योगदान देकर चीन पहले स्थान पर है।
- भारत (India): 17% की विशाल हिस्सेदारी के साथ भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर मजबूती से खड़ा है।
- इन दोनों देशों को मिला दिया जाए, तो ये अकेले वैश्विक आर्थिक वृद्धि का 43.6% हिस्सा चला रहे हैं, जो अभूतपूर्व है।
अमेरिका और अन्य देशों का हाल
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद अमेरिका (USA) वैश्विक वृद्धि में 9.9% के योगदान के साथ तीसरे स्थान पर है।
- अन्य प्रमुख देश: इंडोनेशिया (3.8%), तुर्की (2.2%), सऊदी अरब (1.7%), वियतनाम (1.6%), नाइजीरिया (1.5%) और ब्राजील (1.5%) जैसे देश भी अहम योगदान दे रहे हैं।
- जर्मनी: यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी का योगदान सबसे कम, मात्र 0.9% रहा है, जो यूरोपीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान सुस्ती को दर्शाता है।
वैश्विक वृद्धि और महंगाई पर क्या है अनुमान?
IMF ने अपनी रिपोर्ट में वैश्विक आर्थिक वृद्धि के लिए सकारात्मक अनुमान जताया है:
- ग्रोथ रेट: 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर 3.3% और 2027 में 3.2% रहने की उम्मीद है, जो पिछले आकलनों से बेहतर है। यह वृद्धि तकनीकी निवेश, वित्तीय समर्थन और अनुकूल मौद्रिक नीतियों (Monetary policies) पर निर्भर करेगी।
- महंगाई (Inflation): वैश्विक स्तर पर महंगाई में नरमी की संभावना जताई गई है। अमेरिका में भी मुद्रास्फीति धीरे-धीरे अपने लक्ष्य स्तर की ओर लौट रही है।
- खतरे की घंटी: हालांकि, IMF ने चेतावनी दी है कि भू-राजनीतिक तनाव (Political tension), व्यापारिक विवाद, तकनीकी बदलाव, बढ़ता कर्ज और राजकोषीय घाटा भविष्य की वृद्धि पर भारी दबाव डाल सकते हैं।
एलन मस्क का रिएक्शन: "पावर बैलेंस शिफ्ट हो रहा है"
इस रिपोर्ट ने दुनिया भर के उद्योगपतियों और विचारकों का ध्यान खींचा है। टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क (Elon Musk) ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस रिपोर्ट की शीर्ष 10 देशों की सूची साझा की।
उन्होंने चीन और भारत को अग्रणी देखकर स्पष्ट रूप से लिखा, "पावर बैलेंस शिफ्ट हो रहा है (Power balance is shifting)।" गौरतलब है कि मस्क ने हाल ही के महीनों में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से मुलाकात की थी, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और विदेशी निवेश के आकर्षण को रेखांकित करता है।
संपादकीय विश्लेषण
IMF की यह रिपोर्ट इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि वैश्विक आर्थिक शक्ति का केंद्र अब पश्चिमी देशों से हटकर एशिया और 'ग्लोबल साउथ' (Global South) की ओर बढ़ चुका है। चीन अपनी विशाल अर्थव्यवस्था और विनिर्माण के दम पर आगे है, जबकि भारत अपनी तेज विकास दर, बड़ी युवा आबादी और बढ़ते निवेश (FDI) के आधार पर एक मजबूत स्तंभ बन गया है। एलन मस्क जैसी हस्तियों का भारत की ओर रुझान इस बात का संकेत है कि आने वाला दशक एशिया-पैसिफिक और विशेष रूप से भारत का होने वाला है।