इजरायल ने भारत को दिया 'आयरन डोम' तकनीक का बड़ा ऑफर: पीएम मोदी के दौरे से पहले अरबों डॉलर की डिफेंस डील की सुगबुगाहट
इंटरनेशनल डेस्क, नई दिल्ली | रक्षा और कूटनीति के मोर्चे पर भारत और इजरायल के बीच एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठने जा रहा है। इजरायल ने अपने विश्व प्रसिद्ध और अचूक एयर डिफेंस सिस्टम 'आयरन डोम' (Iron Dome) की तकनीक भारत को देने का एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे की तैयारियां चल रही हैं। इस दौरे से पहले मिले इन संकेतों से स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर की एक नई रक्षा डील पर बातचीत तेज हो सकती है।
यह वही आयरन डोम सिस्टम है जिसने हाल ही में इजरायल को हमास (Hamas), हिजबुल्लाह (Hezbollah), हूतियों और ईरान समर्थित अन्य संगठनों के रॉकेट व मिसाइल हमलों से एक अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान किया है।
रक्षा सहयोग और 'मेक इन इंडिया' की संभावना
भारत में इजरायल के महावाणिज्यदूत यानिव रेवाच ने स्पष्ट संकेत दिया है कि दोनों देश अपने रक्षा सहयोग को एक नई ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं।
- तकनीक ट्रांसफर: उन्होंने बताया कि आयरन डोम सहित अन्य उन्नत रक्षा तकनीकों का हस्तांतरण (Technology Transfer) पूरी तरह संभव है।
- मैन्युफैक्चरिंग: इसके जरिए भारत में ही इन हथियारों की 'मैन्युफैक्चरिंग' (निर्माण) बढ़ाई जा सकती है, जो भारत के 'मेक इन इंडिया' विजन के बिल्कुल अनुकूल है। उन्होंने जोर दिया कि रक्षा के साथ-साथ आर्थिक और राजनीतिक सहयोग भी तेजी से बढ़ेगा।
भारत एक 'ग्लोबल सुपरपावर' और नया रणनीतिक 'एक्सिस'
इजरायली महावाणिज्यदूत ने एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि इजरायल अब भारत को एक उभरती हुई “ग्लोबल सुपरपावर” के रूप में देखता है। वर्तमान में इजरायल कट्टरपंथी ताकतों का मुकाबला करने के लिए अब्राहम अकॉर्ड्स (Abraham Accords) के देशों, अफ्रीकी राष्ट्रों और ग्रीस-साइप्रस जैसे देशों के साथ मिलकर एक नया रणनीतिक 'एक्सिस' (Axis) यानी धुरी बनाने की कोशिश कर रहा है। इस नए रणनीतिक और सुरक्षा ढांचे में भारत की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।
क्या है 'आयरन डोम' और इसकी मुख्य विशेषताएं?
आयरन डोम एक मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे Rafael Advanced Defense Systems और Israel Aerospace Industries द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
- क्षमता: यह सिस्टम कम दूरी के रॉकेट, आर्टिलरी शेल, मिसाइल और ड्रोन्स को हवा में ही रोकने और नष्ट करने में सक्षम है।
- सफलता दर: इस सिस्टम की सफलता दर लगभग 90% मानी जाती है।
- काम कैसे करता है? इसका रडार खतरे की तुरंत पहचान करता है और “तमीर इंटरसेप्टर” (Tamir Interceptor) मिसाइल फायर करके हमले को आसमान में ही नष्ट कर देता है।
- स्मार्ट तकनीक: यह सिस्टम इतना स्मार्ट है कि यह तय कर लेता है कि कौन सा रॉकेट आबादी वाले क्षेत्र में गिरने वाला है। यदि रॉकेट किसी खाली मैदान में गिर रहा है (खतरा नहीं है), तो उसे इंटरसेप्ट नहीं किया जाता, जिससे इंटरसेप्टर मिसाइल की भारी लागत बचती है।
कितनी है आयरन डोम की कीमत?
आयरन डोम भले ही बेहद प्रभावी है, लेकिन यह आर्थिक रूप से काफी खर्चीला भी है:
- एक तमीर इंटरसेप्टर मिसाइल: 40,000 से 50,000 डॉलर (लगभग 33 से 41 लाख रुपये)
- एक आयरन डोम बैट्री: लगभग 10 करोड़ डॉलर (करीब 830 करोड़ रुपये)
- एक बैट्री में शामिल: रडार + कंट्रोल सेंटर + 20 इंटरसेप्टर मिसाइलें।
भारत के लिए कितना जरूरी है आयरन डोम?
चीन और पाकिस्तान के साथ सटी सीमाओं पर बढ़ते ड्रोन और मिसाइल खतरों के बीच, आयरन डोम जैसा सिस्टम भारत के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बन सकता है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी अधिक लागत को देखते हुए भारत को लेजर आधारित सस्ते विकल्पों जैसे 'आयरन बीम' (Iron Beam) पर भी ध्यान देना चाहिए, जिसे भविष्य की युद्ध तकनीक माना जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत सीधे तौर पर 'आयरन डोम' खरीदेगा? या फिर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर लेकर 'मेक इन इंडिया' के तहत इसका खुद निर्माण करेगा? इन सभी अटकलों पर पीएम मोदी के इजरायल दौरे के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
संपादकीय विश्लेषण
इजरायल द्वारा 'आयरन डोम' की तकनीक भारत को सौंपने का प्रस्ताव दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते रणनीतिक भरोसे का सबसे बड़ा प्रमाण है। यह केवल हथियारों की खरीद-फरोख्त नहीं, बल्कि भारत को 'ग्लोबल सुपरपावर' के रूप में स्वीकार करने की इजरायली कूटनीति का हिस्सा है। भारत के लिए इस तकनीक का 'मेक इन इंडिया' के तहत स्वदेशीकरण एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है, विशेषकर तब जब पाकिस्तान और चीन की ओर से टू-फ्रंट वॉर (Two-front war) और ड्रोन हमलों का खतरा लगातार बना रहता है।
