महाराष्ट्र विधानसभा में भावुक हुए सीएम फडणवीस; अजित पवार को याद कर बोले- 'राज्य को मिल सकता था सबसे अच्छा मुख्यमंत्री'
पॉलिटिकल डेस्क, मुंबई | महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र का पहला दिन बेहद भावुक और गमगीन माहौल वाला रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के दिवंगत उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के कद्दावर नेता अजित पवार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पिछले महीने (28 जनवरी 2026) पुणे के बारामती में हुए एक दर्दनाक विमान हादसे में अजित पवार और चार अन्य लोगों की असामयिक मृत्यु हो गई थी।
सदन को संबोधित करते हुए सीएम फडणवीस ने अजित पवार के साथ अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंधों को याद किया और कहा कि उनके निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसे कभी नहीं भरा जा सकेगा।
"किस्मत कभी न कभी उनकी इच्छा पूरी कर देती"
मुख्यमंत्री फडणवीस ने अजित पवार की प्रशासनिक क्षमता की जमकर तारीफ की। उन्होंने भरे मन से कहा:
"महाराष्ट्र को अजितदादा के रूप में सबसे अच्छा मुख्यमंत्री मिल सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। कई फैसलों के पीछे राजनीतिक गणित होता है, लेकिन किस्मत कभी न कभी उनकी यह इच्छा जरूर पूरी कर देती।"
विमान दुर्घटना का मार्मिक जिक्र करते हुए फडणवीस ने कहा, "अजितदादा हमेशा समय के बेहद पाबंद (Punctual) थे, लेकिन इस बार नियति का खेल देखिए, उनकी 'टाइमिंग' गलत हो गई।"
2019 की उस 'दो दिन की सरकार' का सच
श्रद्धांजलि भाषण के दौरान फडणवीस ने 2019 के उस बहुचर्चित राजनीतिक घटनाक्रम को भी याद किया जब महा विकास अघाड़ी (MVA) के सत्ता में आने से पहले दोनों ने मिलकर दो दिन की सरकार बनाई थी।
- फडणवीस ने बताया, "अजितदादा अपने वचन के पक्के थे। 2019 में जब हमने साथ सरकार बनाने का फैसला किया था, तब उनकी पार्टी का वरिष्ठ नेतृत्व पीछे हट गया था, लेकिन अजित दादा अपने वादे पर कायम रहे और हमने एक साथ शपथ ली।"
- उन्होंने आगे कहा कि जब अदालत का फैसला हमारे खिलाफ आया, तो उन्होंने मुझसे साफ चर्चा की और उसके बाद ही अपनी मूल पार्टी में लौटे। वह जो कहते थे, वही करते थे।
'हम तीनों एक समबाहु त्रिकोण (Equilateral Triangle) थे'
सदन में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी दिवंगत नेता को याद किया। शिंदे ने अजित पवार को अपना "बड़ा भाई" बताते हुए महायुति गठबंधन में उनके महत्व को रेखांकित किया। शिंदे ने कहा, "मैं (शिंदे), मुख्यमंत्री फडणवीस और अजितदादा एक 'समबाहु त्रिकोण' (Equilateral Triangle) की तरह थे। हम तीनों के बीच बेहद करीबी और मजबूत रिश्ता था, जिसने सरकार को स्थिरता दी।"
सबसे अच्छे वित्त मंत्री और कर्मठ नेता
फडणवीस ने एक दिलचस्प संयोग साझा करते हुए बताया कि उनका और अजित पवार का जन्मदिन एक ही दिन आता है, लेकिन अजित दादा उम्र में उनसे 11 साल बड़े थे। "वह सही मायने में मेरे 'दादा' (बड़े भाई) थे।"
रिकॉर्ड छह बार राज्य के उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार को याद करते हुए सीएम ने कहा कि वह किसी भी मुख्यमंत्री के लिए सबसे अच्छे वित्त मंत्री थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में महायुति गठबंधन को हुए नुकसान के बाद, यह अजित पवार ही थे जिन्होंने अपनी कर्मठता दिखाते हुए पूरे राज्य का दौरा किया और जनता से दोबारा संपर्क साधकर गठबंधन को मजबूती दी।
संपादकीय विश्लेषण
अजित पवार का जाना महाराष्ट्र की राजनीति के एक युग का अंत है। देवेंद्र फडणवीस का यह बयान कि 'राज्य को सबसे अच्छा मुख्यमंत्री मिल सकता था', अजित पवार की उस राजनीतिक महात्वाकांक्षा की ओर इशारा है जो उनके जीवनकाल में अधूरी रह गई। 2019 के शपथ ग्रहण के रहस्य से पर्दा उठाकर फडणवीस ने यह भी साफ कर दिया कि राजनीतिक मंच पर भले ही जो भी दिखा हो, व्यक्तिगत स्तर पर अजित पवार एक भरोसेमंद साथी थे। महायुति सरकार के लिए अब उनके बिना आगे का रास्ता और चुनावी समीकरण साधना एक बड़ी चुनौती होगी।