आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का 590 करोड़ का फ्रॉड: अब बिना 'डिजिटल मंजूरी' के नहीं होंगे बड़े ट्रांजैक्शन; बैंक ने उठाए सख्त कदम
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली | आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) ने हाल ही में सामने आए 590 करोड़ रुपए के भारी-भरकम फ्रॉड मामले के बाद अपने सुरक्षा तंत्र में बड़े बदलाव किए हैं। बैंक के खातों से अनधिकृत निकासी (Unauthorized withdrawal) को रोकने के लिए बैंक प्रबंधन ने सख्त कदम उठाते हुए नए नियमों की घोषणा की है। अब ग्राहकों के खातों से होने वाले किसी भी बड़े (हाई-वैल्यू) ट्रांजैक्शन के लिए केवल फोन कॉल के आधार पर मंजूरी नहीं दी जाएगी, बल्कि इसके लिए ग्राहक की अनिवार्य 'डिजिटल स्वीकृति' ली जाएगी।
कैसे काम करेगा नया सुरक्षा सिस्टम?
बैंक के सीईओ (CEO) वी. वैद्यनाथन ने एनालिस्ट्स के साथ एक कॉन्फ्रेंस कॉल में इस नई सुरक्षा प्रणाली का खुलासा किया।
- डिजिटल कन्फर्मेशन अनिवार्य: अब तय सीमा से अधिक के हर बड़े ट्रांजैक्शन के लिए ग्राहक को बैंक के आधिकारिक मोबाइल ऐप में लॉग-इन करके स्पष्ट रूप से डिजिटल कन्फर्मेशन (स्वीकृति) देना होगा।
- समय सीमा: यह पुष्टि एक सत्यापित (Verified) डिजिटल चैनल के जरिए निर्धारित समय सीमा के भीतर दर्ज करनी होगी।
- बैंक का मानना है कि सुरक्षा की यह अतिरिक्त परत (Extra layer of security) अनधिकृत डेबिट और वित्तीय धोखाधड़ी के जोखिम को काफी हद तक कम कर देगी।
AI और मानव जांच (Manual Review) का दोहरा पहरा
सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए बैंक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की भी घोषणा की है।
- यह AI सिस्टम सिग्नेचर वेरिफिकेशन (हस्ताक्षर सत्यापन) और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत पहचान करेगा।
- AI द्वारा की गई प्राथमिक जांच के बाद, मामलों की मानवीय स्तर (Manual level) पर भी गहन समीक्षा की जाएगी। वैद्यनाथन ने स्पष्ट किया कि हालिया घटना से सबक लेते हुए बैंक अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं (Internal processes) को और अधिक सुदृढ़ कर रहा है।
क्या था 590 करोड़ रुपए का फ्रॉड मामला?
वीकेंड में बैंक ने इस बात का खुलासा किया था कि चंडीगढ़ शाखा से जुड़े हरियाणा सरकार के खातों में करीब 590 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया है।
- कार्रवाई और असर: इस बड़े घटनाक्रम के बाद हरियाणा सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बैंक को अपने पैनल से हटा दिया है। इसके परिणामस्वरूप बैंक से लगभग 200 करोड़ रुपए का फंड आउटफ्लो (Fund outflow) भी हुआ है।
- जांच शुरू: इस गंभीर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती कार्रवाई के तौर पर चार अधिकारियों को निलंबित (Suspend) कर दिया गया है।
- इसके अलावा, पूरे केस को बैंक के बोर्ड की विशेष समिति के समक्ष रखा गया है और मामले की स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट (Independent Forensic Audit) के लिए जानी-मानी फर्म KPMG को नियुक्त किया गया है।
संपादकीय विश्लेषण (Final Thoughts)
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हुआ 590 करोड़ रुपये का यह घोटाला भारतीय बैंकिंग प्रणाली की आंतरिक कमजोरियों को उजागर करता है। हालांकि, बैंक द्वारा त्वरित रूप से AI और 'अनिवार्य डिजिटल स्वीकृति' (Mandatory Digital Approval) जैसे कदम उठाना एक सकारात्मक प्रतिक्रिया है। केवल फोन कॉल आधारित सत्यापन को बंद करना आज के डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। KPMG द्वारा फोरेंसिक ऑडिट से इस फ्रॉड की असल परतें खुलेंगी, लेकिन फिलहाल बैंक की सबसे बड़ी चुनौती ग्राहकों और सरकारी संस्थाओं (जैसे हरियाणा सरकार) का खोया हुआ भरोसा वापस जीतना है।