एयरटेल का वित्तीय क्षेत्र में बड़ा दांव: अपनी एनबीएफसी 'एयरटेल मनी' में 20,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी कंपनी
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली | दूरसंचार क्षेत्र की दिग्गज कंपनी भारती एयरटेल ने वित्तीय सेवाओं की दुनिया में अपना दबदबा बढ़ाने के लिए सोमवार को एक बहुत बड़ी घोषणा की है। कंपनी अपनी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) 'एयरटेल मनी लिमिटेड' के व्यापक विस्तार के लिए अगले कुछ वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये की विशाल पूंजी का निवेश करने जा रही है। एयरटेल के इस रणनीतिक कदम का मुख्य उद्देश्य भारत में ऋण की उपलब्धता को आसान बनाना और देश के 'क्रेडिट गैप' यानी ऋण अंतर को तेजी से कम करना है।
इस भारी-भरकम निवेश की संरचना को भी कंपनी ने पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। एयरटेल द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस 20,000 करोड़ रुपये की कुल पूंजी में 70 प्रतिशत का मुख्य योगदान सीधे तौर पर एयरटेल की तरफ से किया जाएगा। वहीं, बाकी बचे 30 प्रतिशत हिस्से का निवेश प्रवर्तक समूह 'भारती एंटरप्राइजेज' के माध्यम से किया जाएगा। यह अहम घोषणा ऐसे समय में की गई है जब एयरटेल मनी लिमिटेड को हाल ही में 13 फरवरी, 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से एनबीएफसी के रूप में विधिवत काम करने का आधिकारिक लाइसेंस प्राप्त हुआ है।
डिजिटल ऋण क्षेत्र में अपने शानदार प्रदर्शन पर प्रकाश डालते हुए एयरटेल ने बताया कि पिछले दो वर्षों के दौरान उसने अपने डिजिटल मंच के जरिये एक बेहद सशक्त 'उधारी सेवा प्रदाता' (एलएसपी) मॉडल सफलतापूर्वक विकसित कर लिया है। इस अत्याधुनिक डिजिटल मंच के माध्यम से कंपनी अब तक 9,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण बांट चुकी है। साख और जोखिम आकलन के मजबूत मॉडल, अनुशासित पोर्टफोलियो प्रबंधन और वास्तविक समय में जोखिम की सख्त निगरानी के कारण कंपनी कर्ज चूक (डिफॉल्ट) की दर को पूरी तरह नियंत्रित रखने में सफल रही है, जो बैंकिंग क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है।
इस विशाल विस्तार योजना पर बात करते हुए एयरटेल के कार्यकारी वाइस चेयरमैन गोपाल विट्टल ने कहा कि प्रौद्योगिकी, डेटा और ग्राहकों के अटूट भरोसे को एक साथ जोड़कर राष्ट्रीय स्तर पर गहरा प्रभाव पैदा करने की कंपनी की क्षमता इस डिजिटल मंच की भारी सफलता से साबित हो चुकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस एनबीएफसी विस्तार के जरिये कंपनी एक बेहद भरोसेमंद और नवोन्मेषी डिजिटल ऋण कारोबार खड़ा करने के अपने बड़े लक्ष्य को जल्द ही हासिल कर लेगी।
भारत में संगठित ऋण के विस्तार की अपार संभावनाओं को देखते हुए एयरटेल का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केयर एज रेटिंग्स के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत में संगठित ऋण का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात में स्तर अभी भी केवल 53 प्रतिशत ही है। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वित्तीय क्षेत्र में विकास और ऋण वितरण की अभी असीम गुंजाइश बाकी है।
अपने कामकाज की रूपरेखा को साफ करते हुए एयरटेल ने यह भी बताया है कि भविष्य में एनबीएफसी का वितरण तंत्र एलएसपी मंच के साथ पूरी तरह एकीकृत रहेगा ताकि ग्राहकों को सहज अनुभव मिल सके। हालांकि, परिचालन और कामकाज के स्तर पर दोनों संस्थाओं के बीच एक स्पष्ट और पारदर्शी अलगाव बनाए रखा जाएगा, जिससे नियामक मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो सके।