ट्रंप के 15% नए टैरिफ पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का संतुलित रुख: 'असर का आकलन करना अभी जल्दबाजी'; जानें भारत के लिए क्या हैं चुनौतियां
नेशनल डेस्क, नई दिल्ली | अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 15% के नए वैश्विक टैरिफ (Global Tariffs) की घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शेयर बाजारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। इस अप्रत्याशित कदम के बाद पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इसका उभरती अर्थव्यवस्थाओं, विशेषकर भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत सरकार की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का संतुलित रुख
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब वित्त मंत्री से अमेरिकी टैरिफ के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही सधा हुआ और कूटनीतिक जवाब दिया।
- जल्दबाजी होगी: उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित प्रभाव का अभी से आकलन करना जल्दबाजी होगी।
- वाणिज्य मंत्रालय की नजर: वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि वाणिज्य मंत्रालय (Commerce Ministry) वर्तमान में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौतों (Bilateral Trade Agreements) की गहन समीक्षा कर रहा है।
- आगे की रणनीति: अमेरिका के साथ आगे की बातचीत कब और कैसे होगी, इसका फैसला संबंधित मंत्रालय और प्रतिनिधिमंडल पूरी स्थिति का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद ही लेंगे।
क्या है पूरा विवाद? (सुप्रीम कोर्ट बनाम ट्रंप)
इस पूरे विवाद की जड़ें हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक ऐतिहासिक फैसले में छिपी हैं:
- कोर्ट का फैसला: 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के वैश्विक टैरिफ लगाने के पुराने आदेश को 'अवैध' करार देते हुए रद्द कर दिया था।
- ट्रंप की नाराजगी: ट्रंप ने अदालती फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे 'शर्मनाक' (Disgraceful) करार दिया।
- नया ऐलान: हार न मानते हुए, ट्रंप प्रशासन ने कुछ ही घंटों के भीतर सभी देशों पर 10 फीसदी के नए टैरिफ की घोषणा कर दी, जिसे बाद में और सख्त करते हुए 15 फीसदी तक बढ़ा दिया गया।
भारत के लिए क्या है चुनौती?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध काफी गहरे हैं, ऐसे में इस नए टैरिफ के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं:
वर्तमान टैरिफ दरें: भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा व्यापारिक सौदों में कई उत्पादों पर टैरिफ की दरें लगभग 18 फीसदी के स्तर पर हैं।ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति: ट्रंप का रुख व्यापार को लेकर हमेशा से सख्त रहा है। उनका स्पष्ट कहना है कि अन्य देशों को अमेरिकी बाजार में सामान बेचने के लिए टैरिफ चुकाना होगा, जबकि अमेरिका पर ऐसा कोई अतिरिक्त बोझ नहीं होना चाहिए।
भारत की तैयारी: भारत का वाणिज्य मंत्रालय अब इस बात की बारीकी से जांच कर रहा है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रंप प्रशासन के इन नए 'संरक्षणवादी' (Protectionist) कदमों से भारतीय निर्यातकों (विशेषकर आईटी, फार्मा, और कपड़ा उद्योग) पर क्या असर पड़ेगा।
संपादकीय विश्लेषण
डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का एक और आक्रामक विस्तार है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दरकिनार करते हुए नए टैरिफ थोपना वैश्विक व्यापार युद्ध (Trade War) को फिर से हवा दे सकता है। भारत के लिए वित्त मंत्री का 'वेट एंड वॉच' (इंतजार करो और देखो) का रुख फिलहाल सही रणनीति है। भारत को अमेरिका के साथ सीधे टकराव के बजाय कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से अपने निर्यातकों के हितों की रक्षा करनी होगी।