साधु' पर तंज, सियासत में भूचाल—सीएम मान के ट्वीट पर भड़की BJP और अकाली दल, डेरा ब्यास प्रमुख से मजीठिया की मुलाकात बनी मुद्दा
जालंधर/चंडीगढ़, [दिनांक: 3 फरवरी 2026 — पंजाब की राजनीति में धर्म और सियासत का संगम अक्सर तूफानी होता है। ताजा मामला राधा स्वामी सत्संग ब्यास (डेरा ब्यास) के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) से जुड़ा है, जिसने राज्य के सियासी पारे को गरमा दिया है। मुख्यमंत्री मान द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए एक शायराना ट्वीट को डेरा प्रमुख पर 'परोक्ष हमला' माना जा रहा है, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने धार्मिक दोहों का सहारा लेते हुए मुख्यमंत्री को संतों का सम्मान करने की नसीहत दी है।
विवाद की शुरुआत मुख्यमंत्री भगवंत मान के उस ट्वीट से हुई, जिसमें उन्होंने लिखा, "चाहे कल बन जाएं, चाहे आज बन जाएं, अदालतों का भगवान ही रखवाला है, जहां मुलाकात करने वाले ही जज बनते हैं... रब्ब राखा।" राजनीतिक हलकों में इसे सीधे तौर पर नाभा जेल में बंद अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और डेरा प्रमुख की हालिया मुलाकात से जोड़कर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले सोमवार को बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने जेल में मजीठिया से मुलाकात की थी और उन्हें अपना दोस्त व रिश्तेदार बताया था। संयोग देखिए कि इस मुलाकात के महज 20-25 मिनट बाद ही सुप्रीम कोर्ट से मजीठिया को जमानत मिल गई थी। मुख्यमंत्री का तंज इसी 'संयोग' पर था।
इस पर पलटवार करते हुए पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सोशल मीडिया पर लिखा— "साधु बोले सहज स्वभाव, साधु का कहा बेकार न जाए।" इन पंक्तियों के जरिए जाखड़ ने संदेश दिया कि संतों की वाणी और प्रभाव को कमतर नहीं आंकना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान को पद की गरिमा के खिलाफ बताया। इससे पहले अकाली दल ने भी सीएम मान को घेरते हुए कहा था कि एक सम्मानित धार्मिक प्रमुख पर इस तरह का कटाक्ष करना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह विवाद अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ गया है, जो पंजाब में एक संवेदनशील मुद्दा है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
भगवंत मान का यह ट्वीट उनकी बेबाक शैली का हिस्सा है, लेकिन डेरा ब्यास जैसे विशाल अनुयायी वर्ग वाले संस्थान के प्रमुख पर तंज कसना राजनीतिक जोखिम से भरा है। पंजाब में डेरों का प्रभाव चुनाव और समाज दोनों पर गहरा है।
The Trending People का विश्लेषण है कि मजीठिया की जमानत एक न्यायिक प्रक्रिया थी, लेकिन जिस टाइमिंग पर डेरा प्रमुख से उनकी मुलाकात हुई, उसने अटकलों को हवा दी। विपक्ष इसे धार्मिक अपमान का रंग देकर भुनाना चाहता है, जबकि सीएम मान यह संदेश देना चाहते हैं कि रसूखदारों के लिए सिस्टम अलग कैसे काम करता है। यह विवाद 2026 के सियासी समीकरणों में डेरा ब्यास की भूमिका को और महत्वपूर्ण बना सकता है।
