IFR 2026: राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा—भारतीय नौसेना समुद्री हितों की रक्षा में पूरी तरह सतर्क
नेशनल डेस्क। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विशाखापत्तनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा (IFR) के दौरान कहा कि भारतीय नौसेना देश के समुद्री हितों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह सतर्क है और व्यापक समुद्री वाणिज्यिक गतिविधियों की स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
बंगाल की खाड़ी में भारतीय नौसेना के युद्धपोत पर सवार होकर IFR की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि नौसेना समुद्र में उत्पन्न होने वाली चुनौतियों और खतरों के खिलाफ रक्षा और प्रतिरोध का विश्वसनीय साधन है।
समुद्री सुरक्षा और वैश्विक सहयोग पर जोर
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारतीय नौसेना न केवल देश की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी विश्वास, भरोसे और दोस्ती का सेतु बनती है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर की नौसेनाओं के साथ सहयोग बढ़ाकर भारत सामूहिक समुद्री सुरक्षा को मजबूत कर रहा है।
उन्होंने कहा कि IFR समुद्री परंपराओं के प्रति राष्ट्रों के बीच एकता, विश्वास और सम्मान का प्रतीक है। विभिन्न देशों के जहाजों और नाविकों की मौजूदगी वैश्विक एकजुटता का संदेश देती है।
विशाखापत्तनम का नौसैनिक महत्व
राष्ट्रपति ने कहा कि विशाखापत्तनम का समुद्री इतिहास गौरवशाली रहा है और आज का आयोजन शहर के निरंतर नौसैनिक महत्व को रेखांकित करता है। भारतीय नौसेना की पूर्वी नौसेना कमान का मुख्यालय भी यहीं स्थित है, जो इसे रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है।
उन्होंने भारत और मित्र देशों की नौसेनाओं के प्रभावशाली बेड़े तथा नौसैनिकों के प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी।
समुद्र से भारत का ऐतिहासिक संबंध
राष्ट्रपति ने कहा कि समुद्रों के साथ भारत का संबंध सदियों पुराना और गहरा है। महासागर भारत के लिए वाणिज्य, संपर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का माध्यम रहे हैं।
उन्होंने कटक में ‘कार्तिक पूर्णिमा’ के अवसर पर मनाए जाने वाले ‘बाली यात्रा’ उत्सव का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्राचीन नाविकों की समुद्री परंपरा और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ ऐतिहासिक संबंधों की याद दिलाता है।
मुर्मू ने कहा कि इन समुद्री यात्राओं ने व्यापार, विचारों और मूल्यों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में साझा सांस्कृतिक चेतना विकसित हुई।
‘महासागर’ दृष्टिकोण की पुष्टि
राष्ट्रपति ने कहा कि यह बेड़ा समीक्षा भारत के ‘महासागर’ दृष्टिकोण को आगे बढ़ाती है, जिसका अर्थ क्षेत्र में सुरक्षा और विकास की पारस्परिक उन्नति है।
विश्लेषकों के अनुसार, IFR जैसे आयोजन भारत की समुद्री कूटनीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं।
हमरी राय
राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश स्पष्ट करता है कि समुद्री सुरक्षा अब केवल सैन्य विषय नहीं, बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिरता से भी जुड़ा है। IFR जैसे आयोजनों से भारत की नौसैनिक क्षमता के साथ-साथ कूटनीतिक ताकत भी सामने आती है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सामरिक गतिविधियों के बीच भारत का संतुलित और सहयोगात्मक दृष्टिकोण क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।