नेशनल डेस्क। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 17 और 18 फरवरी को आंध्र प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगी। इस दौरान वह 18 फरवरी को विशाखापत्तनम में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक कार्यक्रम ‘अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा’ (आईएफआर) का अवलोकन करेंगी।
पीआईबी द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रपति मंगलवार शाम विशाखापत्तनम पहुंचेंगी और निर्धारित कार्यक्रमों में भाग लेंगी। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के भी शामिल होने की संभावना है।
15 से 25 फरवरी तक नौसैनिक आयोजन
भारतीय नौसेना 15 से 25 फरवरी तक विशाखापत्तनम में आईएफआर की मेजबानी कर रही है। यह पहली बार है जब भारत इस कार्यक्रम की मेजबानी ‘मिलन अभ्यास’ और ‘आयन्स कॉन्क्लेव ऑफ चीफ्स’ के साथ कर रहा है।
आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य सामूहिक समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना और विभिन्न देशों के बीच नौसैनिक सहयोग को बढ़ावा देना है। यह आयोजन हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका और समुद्री रणनीति को भी रेखांकित करता है।
100 से अधिक देशों की भागीदारी
इस समुद्री सम्मेलन में 100 से अधिक देश अपने युद्धपोतों, पनडुब्बियों, विमानों और प्रतिनिधिमंडलों के साथ भाग ले रहे हैं। यह वैश्विक नौसैनिक शक्ति, सहयोग और भारत के विस्तारित समुद्री दृष्टिकोण का प्रदर्शन माना जा रहा है।
विशाखापत्तनम दूसरी बार आईएफआर की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले वर्ष 2016 में यहां यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था।
भारत की समुद्री रणनीति का प्रदर्शन
विश्लेषकों का मानना है कि आईएफआर जैसे आयोजन भारत की समुद्री कूटनीति को मजबूत करते हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सामरिक गतिविधियों के बीच यह कार्यक्रम भारत की नौसैनिक क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
राष्ट्रपति की उपस्थिति इस आयोजन को और अधिक महत्व देती है, क्योंकि यह भारत की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था की ओर से नौसेना और समुद्री सुरक्षा के प्रति समर्थन का प्रतीक है।
हमरी राय
अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि कूटनीतिक संदेश भी है। 100 से अधिक देशों की भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत समुद्री सहयोग और सामूहिक सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।
विशाखापत्तनम में इस आयोजन से न केवल नौसैनिक क्षमता प्रदर्शित होगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति भी मजबूत होगी। राष्ट्रपति की मौजूदगी इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय महत्व का आयाम देती है।
