Voter List Revision: ‘C’ कैटेगरी के 40 हजार मतदाताओं को नोटिस, 15 दिन में देना होगा प्रमाण
जिला डेस्क | नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के शुद्धिकरण के लिए किए गए एसआईआर (SIR) सर्वे के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। सर्वे के दौरान ‘सी’ कैटेगरी में चिन्हित किए गए 40 हजार से अधिक मतदाताओं को अब नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इन मतदाताओं को अपनी नागरिकता और संबंधित क्षेत्र में निवास की प्रमाणिकता साबित करने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है।
निर्धारित अवधि के भीतर संतोषजनक दस्तावेज़ प्रस्तुत न करने की स्थिति में संबंधित मतदाताओं का नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। तीसरे चरण में दावा-आपत्ति दर्ज कराने वाले मतदाताओं की सहायता के लिए जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित की गई।
बैठक में निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जा रहा है। सभी राजनीतिक दलों को फार्म-6 (नाम जोड़ने), फार्म-7 (नाम हटाने) और फार्म-8 (संशोधन) उपलब्ध करा दिए गए हैं, ताकि पात्र मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
प्रशासन ने राजनीतिक प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्रों में मतदाताओं को जागरूक करें और आवश्यक दस्तावेज़ समय पर जमा कराने में सहयोग करें। नोटिस मिलने पर मतदाताओं को सुनवाई केंद्रों पर उपस्थित होकर यह साबित करना होगा कि उनका नाम पहले की मतदाता सूची में दर्ज था या वे लंबे समय से उस क्षेत्र में निवासरत हैं।
तीन श्रेणियों में किया गया सर्वे
मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने के लिए निर्वाचन विभाग ने वर्ष 2003 और 2025 की सूचियों का मिलान किया है। इस प्रक्रिया को तीन श्रेणियों में बांटा गया है।
ए श्रेणी: इसमें 65 हजार ऐसे मतदाता शामिल हैं जिनके नाम 2003 और 2025 दोनों सूचियों में पाए गए। इन्हें पूरी तरह सुरक्षित मतदाता माना गया है।
बी श्रेणी: लगभग 61 हजार मतदाता इस श्रेणी में हैं। इनके नाम 2003 की सूची में नहीं थे, लेकिन माता-पिता या करीबी रिश्तेदार का नाम रिकॉर्ड में मिलने के कारण इन्हें वैध माना गया है।
सी श्रेणी: इस श्रेणी में 40 हजार ऐसे मतदाता शामिल हैं जिनका नाम वर्तमान सूची में है, लेकिन न तो उनका और न ही किसी रिश्तेदार का नाम 2003 की सूची में मिला। साथ ही वे लोग भी इसमें शामिल हैं जो सर्वे के दौरान अपने पते पर नहीं मिले।
हमारी राय
मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक आवश्यक और संवेदनशील हिस्सा है। फर्जी या संदिग्ध प्रविष्टियों को हटाना जरूरी है, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और विश्वसनीय बनी रहे। हालांकि, इस तरह के अभियानों में यह भी उतना ही जरूरी है कि किसी भी वास्तविक और पात्र मतदाता का नाम गलती से न हटे।
‘सी’ कैटेगरी में शामिल मतदाताओं को दस्तावेज़ प्रस्तुत करने का अवसर देना प्रशासन की संतुलित सोच को दर्शाता है। लेकिन 15 दिनों की समय-सीमा और प्रक्रिया की जानकारी जमीनी स्तर तक स्पष्ट रूप से पहुंचनी चाहिए, ताकि लोग भ्रम या डर के कारण अपने मताधिकार से वंचित न हों।
हमारी राय में, प्रशासन और राजनीतिक दलों को मिलकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ किया गया मतदाता सूची शुद्धिकरण ही लोकतंत्र को मजबूत बना सकता है।
