आतंकवाद और पानी साथ नहीं बह सकते"—जयशंकर का 'बुरे पड़ोसियों' को अल्टीमेटम, कहा- अपनी रक्षा का हमें पूरा अधिकार
चेन्नई/नई दिल्ली, दिनांक: 2 जनवरी 2026 — भारत की विदेश नीति में आए आक्रामक और स्पष्ट बदलाव की गूंज एक बार फिर सुनाई दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने शुक्रवार को चेन्नई में बिना नाम लिए पाकिस्तान (Pakistan) को एक ऐसा कड़ा संदेश दिया है, जो इस्लामाबाद की नींद उड़ाने के लिए काफी है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के छात्रों के साथ संवाद करते हुए जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि जब बात "बुरे पड़ोसियों" की आती है, तो भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है और वह इसके लिए हर संभव कदम उठाएगा।
उनका यह बयान सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) और सीमा पार आतंकवाद के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर कोई पड़ोसी देश भारत में आतंकवाद की फैक्ट्री चलाता रहेगा, तो वह नई दिल्ली से संसाधनों, विशेषकर पानी के बंटवारे की उम्मीद नहीं कर सकता।
"एक हाथ में बम, दूसरे में कटोरा नहीं चलेगा"
छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कूटनीतिक शिष्टाचार को दरकिनार करते हुए सीधी बात की। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति पूरे क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक लहर (Positive Wave) है और अधिकांश पड़ोसी इसे मानते भी हैं। लेकिन कुछ अपवाद हैं।
जयशंकर ने कहा:
"जब आतंकवाद फैलाने वाले 'बुरे पड़ोसियों' की बात आती है, तो नियम बदल जाते हैं। भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षा का पूरा अधिकार है। आप हमारे देश में आतंकवाद फैलाना जारी रखते हुए हमसे पानी साझा करने का अनुरोध नहीं कर सकते। आतंक और बातचीत (या सहयोग) साथ-साथ नहीं चल सकते।"
यह बयान भारत के उस पुराने रुख की पुष्टि करता है कि 'रक्त और जल' एक साथ नहीं बह सकते।
अच्छे पड़ोसियों के लिए 'संकटमोचक' है भारत
जयशंकर ने अपनी बात को संतुलित करते हुए भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' (Neighborhood First) नीति का दूसरा पहलू भी रखा। उन्होंने कहा कि भारत "अच्छे पड़ोसियों" के लिए हमेशा खड़ा रहता है।
- श्रीलंका का संकट: उन्होंने याद दिलाया कि जब श्रीलंका अपने सबसे बुरे वित्तीय संकट से गुजर रहा था, तब भारत ने उसे 4 अरब अमेरिकी डॉलर की ऐतिहासिक मदद दी थी।
- वैश्विक मदद: चाहे कोविड-19 महामारी के दौरान 'वैक्सीन मैत्री' के तहत दुनिया को टीके पहुंचाना हो, या यूक्रेन संघर्ष के दौरान जरूरतमंद देशों को ईंधन और खाद्य सहायता देनी हो, भारत कभी पीछे नहीं हटा।
- व्यावहारिक ज्ञान: जयशंकर ने कहा, "पड़ोसियों के प्रति हमारा रुख व्यावहारिक ज्ञान पर आधारित है। जो साथ देगा, उसका हाथ हम थामेंगे; जो खंजर भोंकेगा, उसे जवाब मिलेगा।"
ढाका दौरा: उन्होंने अपने हालिया बांग्लादेश दौरे का भी जिक्र किया। वे दो दिन पहले ही बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने ढाका गए थे, जो भारत की पड़ोसी देशों के साथ भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है।
"अपनी संस्कृति पर गर्व करने में शर्म कैसी?"
आईआईटी के छात्रों से संवाद के दौरान जयशंकर ने भारतीय विरासत और लोकतंत्र पर भी विचार रखे। उन्होंने पश्चिमी देशों के उस नैरेटिव को खारिज किया जो लोकतंत्र को केवल उनकी देन मानता है।
- विरासत: उन्होंने कहा, "दुनिया भर में लोग अपनी संस्कृति और परंपरा पर गर्व करते हैं। मुझे कोई कारण नजर नहीं आता कि हमें ऐसा क्यों नहीं करना चाहिए। भारत उन बहुत कम प्राचीन सभ्यताओं में से है जो एक आधुनिक राष्ट्र के रूप में उभरा है।"
- लोकतंत्र का वैश्वीकरण: जयशंकर ने तर्क दिया कि भारत द्वारा लोकतांत्रिक मॉडल अपनाने के फैसले ने ही लोकतंत्र को एक 'सार्वभौमिक राजनीतिक अवधारणा' बनाया। "अगर हमने यह रास्ता नहीं अपनाया होता, तो लोकतंत्र शायद एक क्षेत्रीय और संकीर्ण (पश्चिमी) विचार बनकर रह जाता," उन्होंने कहा।
'आईआईटीएम ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन' की शुरुआत
इस मौके पर विदेश मंत्री ने ‘आईआईटीएम ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन’ (IITM Global Research Foundation) का भी शुभारंभ किया। यह आईआईटी मद्रास की एक ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय पहल है।
- उद्देश्य: इसका मकसद संस्थान को शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के लिए एक वैश्विक नेटवर्क वाले केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
- वसुधैव कुटुंबकम: जयशंकर ने कहा कि भारत दुनिया को कभी शत्रुतापूर्ण स्थान नहीं मानता। "हमारे संसाधन सीमित हैं, लेकिन हमारा प्रभाव अधिकतम होना चाहिए। आज भारतीय कूटनीति इसी समस्या का समाधान तलाश रही है," उन्होंने जोड़ा।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
एस. जयशंकर का यह बयान भारत की 'गांधीवादी' छवि से 'चाणक्य नीति' की ओर बदलाव का प्रतीक है। पानी के मुद्दे को आतंकवाद से जोड़ना पाकिस्तान के लिए एक रणनीतिक चेतावनी है। भारत अब 'सॉफ्ट पावर' के साथ-साथ 'स्मार्ट पावर' का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकता।
The Trending People का विश्लेषण है कि 'बुरे पड़ोसी' और 'अच्छे पड़ोसी' का भेद करना भारत की कूटनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है। श्रीलंका और बांग्लादेश को मदद देकर भारत ने चीन के प्रभाव को कम करने की कोशिश की है, जबकि पाकिस्तान को अलग-थलग करने की नीति जारी है। जयशंकर का यह संदेश साफ है—भारत दोस्ती निभाना जानता है, लेकिन अगर सुरक्षा पर आंच आई, तो वह कड़े फैसले लेने में एक पल भी नहीं लगाएगा।
