ITC Share Crash: सिगरेट टैक्स बढ़ने से निवेशकों को बड़ा झटका, LIC को दो दिन में ₹11,460 करोड़ का नुकसान
बिज़नेस डेस्क | नई दिल्ली वित्त मंत्रालय के सिगरेट पर टैक्स बढ़ाने के हालिया फैसले ने शेयर बाजार में ITC के निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1000 स्टिक पर एक्साइज ड्यूटी 2,050 रुपये से बढ़ाकर 8,500 रुपये किए जाने की घोषणा के बाद ITC के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली है। इस गिरावट के चलते ITC के शेयरधारकों को कुल मिलाकर करीब 72,300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
इस नुकसान में देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC भी शामिल है। LIC के पास ITC में 1,98,58,07,233 शेयर हैं, जो कंपनी की कुल 15.86 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। शेयर की कीमत में आई तेज गिरावट के कारण LIC को महज दो दिनों में 11,460 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा है।
टैक्स बढ़ोतरी का बाजार पर असर
वित्त मंत्रालय ने हाल ही में सिगरेट पर नई एक्साइज ड्यूटी की घोषणा की है, जो 1 फरवरी से लागू होगी। इसके तहत सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1000 स्टिक पर टैक्स 2,050 रुपये से बढ़ाकर अधिकतम 8,500 रुपये कर दिया गया है। यह नया लेवी पहले से लागू 40 प्रतिशत GST के अतिरिक्त होगा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई कर संरचना के कारण सिगरेट कंपनियों को कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषकों का कहना है कि बढ़े हुए टैक्स का पूरा बोझ ग्राहकों पर डालने के लिए सिगरेट की कीमतें 40 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं, जिससे मांग और बिक्री दोनों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
6 साल में सबसे बड़ी गिरावट
गुरुवार को ITC के शेयर ने बीते छह साल में सबसे तेज गिरावट दर्ज की और एक ही दिन में करीब 10 प्रतिशत टूट गया। इसके बाद अगले कारोबारी दिन भी शेयर में 5 प्रतिशत की और गिरावट आई, जिससे यह NSE पर 345.25 रुपये पर पहुंच गया। यह स्तर ITC का मौजूदा 52 हफ्तों का निचला स्तर माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि टैक्स बढ़ोतरी और संभावित कीमतों में इजाफा ITC के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। आने वाले महीनों में कंपनी की बिक्री और मुनाफे पर दबाव देखने को मिल सकता है।
हमारी राय
ITC के शेयर में आई तेज गिरावट यह दिखाती है कि नीतिगत फैसलों का असर बाजार पर कितनी जल्दी और गहराई से पड़ता है। तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाने का उद्देश्य भले ही स्वास्थ्य और राजस्व से जुड़ा हो, लेकिन इसका सीधा असर निवेशकों और बड़ी संस्थागत हिस्सेदारियों पर भी पड़ता है। LIC जैसे दीर्घकालिक निवेशक के लिए यह नुकसान अल्पकालिक हो सकता है, लेकिन बाजार की धारणा पर इसका असर गंभीर है।
हमारी राय में, ITC की मजबूत FMCG और होटल कारोबार जैसी विविध गतिविधियां लंबे समय में कंपनी को सहारा दे सकती हैं, लेकिन तंबाकू बिजनेस पर निर्भरता फिलहाल जोखिम बनी हुई है। निवेशकों को भावनात्मक फैसलों से बचते हुए कंपनी के दीर्घकालिक फंडामेंटल्स और नीति जोखिम दोनों को ध्यान में रखकर रणनीति बनानी चाहिए।
