उत्तराखंड में 'कबाड़' से होगी 'कमाई'—पुरानी गाड़ी स्क्रैप कराएं और नई पर पाएं 50% तक टैक्स छूट, सरकार का आदेश तत्काल प्रभाव से लागू
देहरादून, दिनांक: 2 जनवरी 2026— देवभूमि उत्तराखंड (Uttarakhand) में वाहन मालिकों के लिए नए साल की शुरुआत एक बड़ी खुशखबरी के साथ हुई है। पुष्कर सिंह धामी सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए पुरानी गाड़ियों को सड़क से हटाने के लिए एक आकर्षक प्रोत्साहन योजना (Incentive Scheme) लागू कर दी है। राज्य सरकार द्वारा जारी नए आदेश के मुताबिक, अब अगर कोई व्यक्ति अपनी पुरानी गाड़ी को स्क्रैप (नष्ट) कराकर उसी श्रेणी का नया वाहन खरीदता है, तो उसे मोटर व्हीकल टैक्स (Motor Vehicle Tax) में 15% से लेकर 50% तक की भारी छूट दी जाएगी।
राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद परिवहन विभाग ने इसकी अधिसूचना (Notification) जारी कर दी है और यह नियम तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में लागू हो चुका है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से न केवल सड़कों से 'खटारा' गाड़ियां हटेंगी, बल्कि ऑटोमोबाइल सेक्टर को भी नई रफ्तार मिलेगी।
क्या है नई नीति? छूट का पूरा गणित
लंबे समय से इस प्रस्ताव पर मंथन चल रहा था, जिसे अब अमलीजामा पहना दिया गया है। इस नीति का मुख्य आकर्षण टैक्स में मिलने वाली सीधी राहत है।
- छूट का दायरा: नई नीति के तहत, निजी (Private) और कमर्शियल (Commercial) वाहनों के लिए अलग-अलग स्लैब तय किए गए हैं। छूट की सीमा 15 प्रतिशत से शुरू होकर अधिकतम 50 प्रतिशत तक जाएगी।
- किसे मिलेगा लाभ: यह लाभ उन वाहन मालिकों को मिलेगा जो अपनी 15 साल (पेट्रोल) या 10 साल (डीजल) पुरानी गाड़ी को रजिस्टर्ड स्क्रैप सेंटर पर कटवाकर नई गाड़ी खरीदेंगे।
- शर्त: नई गाड़ी उसी श्रेणी (Category) की होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, कार स्क्रैप कराने पर कार खरीदने पर ही छूट मिलेगी, टू-व्हीलर पर नहीं।
स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट: डिस्काउंट की 'चाबी'
सरकार ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कुछ शर्तें भी जोड़ी हैं। बिना प्रक्रिया का पालन किए छूट का दावा नहीं किया जा सकता।
- मान्यता प्राप्त सेंटर: वाहन मालिक को अपनी पुरानी गाड़ी किसी भी कबाड़ी को बेचने के बजाय सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त वाहन स्क्रैपिंग केंद्र (RVSF) पर ले जानी होगी।
- सर्टिफिकेट: गाड़ी नष्ट होने के बाद स्क्रैप सेंटर मालिक को एक 'डिपॉजिट सर्टिफिकेट' या आधिकारिक स्क्रैपिंग प्रमाण पत्र जारी करेगा।
- क्लेम: जब आप नई गाड़ी खरीदने शोरूम जाएंगे, तो रजिस्ट्रेशन के समय यह सर्टिफिकेट दिखाने पर आरटीओ (RTO) द्वारा टैक्स में निर्धारित छूट दी जाएगी।
पर्यावरण और प्रदूषण पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'
सरकार के इस कदम के पीछे सबसे बड़ा कारण उत्तराखंड की संवेदनशील पारिस्थितिकी (Ecology) को बचाना है। पहाड़ की वादियों में पुराने वाहनों का धुआं हवा को जहरीला बना रहा है।
- लक्ष्य: सरकार का उद्देश्य पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों (विशेषकर BS-1 और BS-2 मानक वाले) को चरणबद्ध तरीके से हटाना है।
- फायदे: नई गाड़ियां कम प्रदूषण करती हैं और उनकी ईंधन दक्षता (Mileage) भी बेहतर होती है। इससे राज्य की कार्बन फुटप्रिंट कम होगी।
कितनी होगी बचत? लाखों का फायदा
मौजूदा व्यवस्था में उत्तराखंड में वाहन रजिस्ट्रेशन के समय गाड़ी की कीमत (Ex-Showroom Price) के आधार पर 8% से 10% तक रोड टैक्स लगता है। महंगी गाड़ियों पर यह लाखों में होता है।
- निजी कार: अगर आप 10 लाख की कार खरीदते हैं और उस पर 1 लाख टैक्स बनता है, तो 25% छूट मिलने पर आपको सीधे 25,000 रुपये की बचत होगी।
- महंगी गाड़ियां: 20-30 लाख की एसयूवी पर यह बचत 50,000 से 1 लाख रुपये तक जा सकती है। कमर्शियल वाहनों (बस/ट्रक) के लिए यह छूट और भी मायने रखती है क्योंकि उनका टैक्स बहुत ज्यादा होता है।
अवधि: कब तक मिलेगा मौका?
टैक्स में दी जाने वाली यह छूट अनंत काल के लिए नहीं है।
- कमर्शियल वाहन: परिवहन से जुड़े वाहनों (टैक्सी, बस, ट्रक) के लिए यह सुविधा एक सीमित समय (संभवतः 2-3 साल) के लिए दी गई है ताकि वे जल्दी अपग्रेड हों।
- निजी वाहन: निजी कार और टू-व्हीलर मालिकों के लिए यह अवधि थोड़ी अधिक रखी गई है, ताकि ज्यादा से ज्यादा आम लोग इस योजना का लाभ उठा सकें।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
उत्तराखंड सरकार का यह फैसला 'आम के आम और गुठलियों के दाम' वाली कहावत को चरितार्थ करता है। एक तरफ पर्यावरण सुधरेगा, तो दूसरी तरफ वाहन मालिकों को आर्थिक राहत मिलेगी। पहाड़ों पर पुरानी गाड़ियों के ब्रेक फेल होने या खराब होने से अक्सर हादसे होते हैं; नई गाड़ियां सड़क सुरक्षा को भी बेहतर बनाएंगी।
The Trending People का विश्लेषण है कि इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य में 'स्क्रैपिंग सेंटर्स' की उपलब्धता कितनी सुगम है। अगर वाहन मालिक को गाड़ी कटवाने के लिए दूसरे जिले में जाना पड़े, तो वह कबाड़ी को बेचना पसंद करेगा। सरकार को हर जिले में कम से कम एक अधिकृत केंद्र खोलना सुनिश्चित करना चाहिए। यह नीति केंद्र सरकार की 'वॉलंटरी व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी' को धरातल पर उतारने में मील का पत्थर साबित होगी।
