जानिए क्यों चर्चा में है UCC: उत्तराखंड में अब तक 3.89 लाख विवाह पंजीकरण, लिव इन में रह रहे 68 जोड़े; दो कपल्स का हुआ ब्रेकअप से जुड़ी 5 अहम बातें
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की रफ्तार तेज हो गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक प्रदेश में 3.89 लाख से अधिक विवाह पंजीकरण हो चुके हैं। इसके साथ ही 68 जोड़ों ने लिव-इन रिलेशन के लिए भी पंजीकरण कराया है। खास बात यह है कि इनमें से दो जोड़े लिव-इन संबंध खत्म कर अलग हो चुके हैं।
प्रदेश सरकार ने जनवरी 2025 में समान नागरिक संहिता लागू की थी। इसके साथ ही उत्तराखंड आजादी के बाद देश का पहला राज्य बन गया, जहां यूसीसी को लागू किया गया। इस कानून का मुख्य उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून व्यवस्था लागू करना है। इसमें खास तौर पर महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
विवाह पंजीकरण अनिवार्य, अभी निशुल्क सुविधा
यूसीसी के तहत फरवरी 2010 के बाद हुए सभी विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार ने फिलहाल विवाह पंजीकरण को बढ़ावा देने के लिए इसे निशुल्क रखा है। यह सुविधा 26 जनवरी 2026 तक जारी रहेगी। इसके बाद विवाह पंजीकरण पर निर्धारित शुल्क लिया जाएगा। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग अभी पंजीकरण करा रहे हैं।
लिव-इन रिलेशन के लिए भी नियम
समान नागरिक संहिता में लिव-इन रिलेशन के पंजीकरण का भी प्रावधान किया गया है। इसका मकसद लिव-इन में रहने वाली महिलाओं को कानूनी सुरक्षा देना है। अब तक 68 जोड़े इस व्यवस्था के तहत पंजीकरण करा चुके हैं। वहीं, दो जोड़ों ने अपने लिव-इन संबंध खत्म करने की जानकारी भी दी है।
गोपनीयता का रखा गया है पूरा ध्यान
नियमों के अनुसार लिव-इन रिलेशन में रहने वाले किसी भी जोड़े की व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। सरकार का कहना है कि इससे लोगों की निजता बनी रहती है और किसी तरह का सामाजिक दबाव नहीं पड़ता।
हमारी की राय में
उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद बढ़ते विवाह और लिव-इन पंजीकरण यह दिखाते हैं कि लोग अब कानूनी प्रक्रिया को गंभीरता से ले रहे हैं। निशुल्क पंजीकरण की सुविधा और महिलाओं की सुरक्षा पर जोर इस कानून की बड़ी खासियत है। आने वाले समय में यह व्यवस्था अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकती है।
