प्रकृति की गोद में बसे सोनो प्रखंड के प्रसिद्ध पंचपहाड़ी क्षेत्र में आज मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। झाझा–सोनो मुख्य मार्ग पर स्थित परमहंस ऋषि आश्रम, अमरावती धाम में इस अवसर पर खास तैयारियां की गई हैं। काली पहाड़ियों से घिरे इस खूबसूरत स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं और सैलानियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाएगा, जिससे पूरा इलाका भक्ति और उत्सव के माहौल में डूब जाएगा।
पंचपहाड़ी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांति के लिए पूरे जिले में जानी जाती है। मकर संक्रांति के दिन यह स्थान एक बड़े पिकनिक स्थल का रूप ले लेता है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के जिलों से भी लोग परिवार के साथ यहां पहुंचते हैं। लोग पूजा-पाठ के साथ प्रकृति का आनंद लेते हैं और पूरे दिन उत्सव जैसा माहौल बना रहता है।
दशकों पुरानी है खिचड़ी भोज की परंपरा
मकर संक्रांति के मौके पर अमरावती धाम में हर साल खिचड़ी भोज का आयोजन किया जाता है। आयोजन समिति के सक्रिय सदस्य राजेंद्र राय ने बताया कि यहां खिचड़ी भोज की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। इस वर्ष दो से तीन हजार श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। आयोजन को सफल बनाने के लिए स्थानीय स्वयंसेवक पूरी लगन से सेवा कार्य में जुटे हुए हैं।
बढ़ी तैयारी, ज्यादा श्रद्धालुओं की उम्मीद
पिछले वर्षों के अनुभव को देखते हुए इस बार इंतजाम और मजबूत किए गए हैं। पिछले साल करीब दो क्विंटल चावल से खिचड़ी का महाप्रसाद तैयार किया गया था। इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए राशन और अन्य जरूरी सामग्री की मात्रा भी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी को कोई परेशानी न हो।
भीड़ को संभालने और यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए स्थानीय स्तर पर स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। पूरे दिन चलने वाले इस आयोजन में सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे की झलक देखने को मिलेगी।
आस्था, प्रकृति और मेल-जोल का संगम
मकर संक्रांति के इस पर्व पर पंचपहाड़ी आने वाले लोग न केवल पूजा-अर्चना करेंगे, बल्कि प्रकृति के सानिध्य में समय बिताकर नए वर्ष के पहले बड़े पर्व का आनंद भी लेंगे। यह आयोजन आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का सुंदर उदाहरण बनता जा रहा है।
हमारी की राय में
पंचपहाड़ी में मकर संक्रांति का आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक मेल-जोल और प्रकृति से जुड़ने का अवसर भी देता है। ऐसी परंपराएं स्थानीय संस्कृति को मजबूत करती हैं और लोगों को एक-दूसरे के करीब लाती हैं।
