अमेरिका जाने वालों को बड़ा झटका—अब वीज़ा इंटरव्यू के लिए नहीं जा सकेंगे 'तीसरे देश', भारत में ही करना होगा अपनी बारी का इंतजार
वाशिंगटन/नई दिल्ली, दिनांक: 6 जनवरी 2026 — अमेरिका जाने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों, पेशेवरों और पर्यटकों के लिए एक अहम और थोड़ी चिंताजनक खबर सामने आई है। संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के प्रशासन ने भारतीय नागरिकों के लिए वीज़ा आवेदन प्रक्रिया में एक बड़ा और सख्त बदलाव लागू कर दिया है। नए नियमों के तहत, अब भारतीय आवेदक वीज़ा इंटरव्यू के लिए 'तीसरे देशों' (Third Countries) का विकल्प नहीं चुन सकेंगे।
इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप लंबी वेटिंग लिस्ट से बचने के लिए दुबई, सिंगापुर, थाईलैंड या वियतनाम जाकर अमेरिकी वीज़ा इंटरव्यू देने की योजना बना रहे थे, तो अब उस पर पानी फिर गया है। अमेरिकी दूतावास ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय नागरिकों को स्टूडेंट (F-1), विज़िटर (B-1/B-2) और वर्क वीज़ा (H-1B सहित अन्य) के लिए इंटरव्यू केवल भारत में स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों में ही देना होगा।
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क्या था 'जुगाड़' और क्यों लगी रोक?
अब तक बड़ी संख्या में भारतीय आवेदक भारत में वीज़ा स्लॉट्स की भारी कमी और सालों लंबी वेटिंग पीरियड (Waiting Period) से बचने के लिए एक स्मार्ट रास्ता अपनाते थे। वे उन देशों (जैसे यूएई, थाईलैंड) में अपॉइंटमेंट बुक कर लेते थे जहां भीड़ कम होती थी। इसे तकनीकी भाषा में 'थर्ड कंट्री नेशनल' (TCN) प्रोसेसिंग कहा जाता था।
नया नियम: इस फैसले के बाद यह 'शॉर्टकट' पूरी तरह बंद हो गया है। अमेरिका का मानना है कि आवेदकों की सही और गहन जांच (Verification) केवल उनके गृह देश में ही संभव है।उद्देश्य: विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम वीज़ा प्रक्रिया को अधिक केंद्रीकृत और सख्त बनाने के लिए उठाया गया है। इसका मकसद नियमों के दुरुपयोग को रोकना और सुरक्षा मानकों को बनाए रखना है।
किन पर पड़ेगा सबसे बुरा असर?
इस फैसले की मार सबसे ज्यादा उन तीन वर्गों पर पड़ेगी जो अमेरिका जाने के लिए सबसे ज्यादा उत्सुक रहते हैं:
छात्र (Students): अमेरिकी विश्वविद्यालयों में एडमिशन का सीजन करीब है। जो छात्र F-1 वीज़ा के लिए अप्लाई कर रहे हैं, उनके लिए अब भारत में स्लॉट मिलना 'लोहे के चने चबाने' जैसा हो सकता है। देरी होने पर उनकी शैक्षणिक योजनाएं और सेमेस्टर शुरू होने की तारीखें प्रभावित हो सकती हैं।H-1B प्रोफेशनल्स: आईटी और टेक सेक्टर के पेशेवर, जो वर्क वीज़ा पर अमेरिका जाना चाहते हैं या अपने वीज़ा का नवीनीकरण (Renewal) कराना चाहते हैं, उनके लिए ज्वाइनिंग डेट (Joining Date) का संकट खड़ा हो सकता है।
पर्यटक और बिज़नेस ट्रेवलर्स: B-1/B-2 वीज़ा के लिए भारत में वेटिंग टाइम पहले से ही ऐतिहासिक रूप से ज्यादा रहा है। अब जब सभी आवेदक यहीं लौटेंगे, तो यह लाइन और लंबी हो सकती है।
भारत में बढ़ेगा दबाव, लंबी हो सकती है कतार
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस फैसले का सीधा असर भारत स्थित अमेरिकी दूतावास (नई दिल्ली) और वाणिज्य दूतावासों (मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता) पर पड़ेगा।
अपॉइंटमेंट का दबाव: पहले जो लोड अन्य देशों में बंट जाता था, अब वह पूरा ट्रैफिक भारतीय मिशनों पर आ जाएगा। इससे वीज़ा इंटरव्यू की प्रतीक्षा अवधि (Waiting Period) एक बार फिर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती है।कोई छूट नहीं: फिलहाल अमेरिकी विदेश विभाग ने किसी तरह की आधिकारिक छूट या अपवाद (Exception) की घोषणा नहीं की है। यानी इमरजेंसी स्लॉट्स को छोड़कर सामान्य आवेदकों को कतार में ही लगना होगा।
क्या करें आवेदक? 'प्लानिंग' ही बचाव है
वीज़ा सलाहकारों (Visa Consultants) ने अमेरिका जाने की योजना बना रहे भारतीयों को सलाह दी है कि वे अब 'अंतिम समय' (Last Minute) के भरोसे न रहें।
- अर्ली बुकिंग: यात्रा या पढ़ाई की तारीख से कम से कम 6-8 महीने पहले वीज़ा प्रक्रिया शुरू करें।
- दस्तावेज: अपने दस्तावेज़ पूरी तरह तैयार रखें, क्योंकि रिजेक्शन होने पर दोबारा स्लॉट मिलना बेहद मुश्किल होगा।
- धैर्य: मानसिक रूप से देरी के लिए तैयार रहें और अपनी फ्लाइट्स या कॉलेज की फीस जमा करने से पहले वीज़ा की स्थिति सुनिश्चित कर लें।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
अमेरिका का यह निर्णय अपनी आंतरिक सुरक्षा और प्रक्रिया को दुरुस्त करने के लिए हो सकता है, लेकिन भारतीय आवेदकों के लिए यह एक 'लॉजिस्टिकल नाइटमेयर' (Logistical Nightmare) है। 'थर्ड कंट्री' का विकल्प एक सेफ्टी वॉल्व की तरह था, जो अब बंद हो चुका है।
The Trending People का विश्लेषण है कि जब तक अमेरिका भारत में अपने वाणिज्य दूतावासों की क्षमता (Staff Strength) और स्लॉट्स की संख्या में भारी वृद्धि नहीं करता, यह नियम एक बाधा ही साबित होगा। यह फैसला उन छात्रों के सपनों पर भारी पड़ सकता है जिनका एडमिशन तो हो गया है, लेकिन वीज़ा इंटरव्यू की तारीख कॉलेज खुलने के बाद की मिल रही है। भारत सरकार को कूटनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को उठाकर वीज़ा प्रक्रिया को सुगम बनाने की मांग करनी चाहिए, क्योंकि भारतीय समुदाय अमेरिकी अर्थव्यवस्था और शिक्षा तंत्र में एक बड़ा योगदानकर्ता है।
