Winter Hydration: सर्दियों में कम प्यास लगना हो सकता है खतरनाक, जानिए कितना पानी जरूरी और कैसे रखें शरीर हाइड्रे
सर्दियों के मौसम में अक्सर लोगों को प्यास कम लगती है, जिसकी वजह से वे गर्मियों की तुलना में काफी कम पानी पीते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है। एम्स दिल्ली के सीनियर रेजिडेंट डॉ. हिमांशु भदानी का कहना है कि सर्दियों में भी शरीर को उतनी ही हाइड्रेशन की जरूरत होती है जितनी गर्मियों में। प्यास कम लगना इस बात का संकेत नहीं है कि शरीर को पानी की आवश्यकता कम हो गई है।
डॉ. भदानी बताते हैं कि ठंड के मौसम में शरीर से पसीना कम निकलता है, इसलिए लोगों को लगता है कि पानी की जरूरत भी कम है। जबकि सच्चाई यह है कि सर्दियों में भी शरीर लगातार सांस, पेशाब और त्वचा के जरिए पानी खोता रहता है। यदि समय पर इस कमी को पूरा न किया जाए, तो इसका असर किडनी, पाचन तंत्र, त्वचा और यहां तक कि इम्यून सिस्टम पर भी पड़ सकता है।
सर्दियों में पानी पीना क्यों है जरूरी
विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्दियों में डिहाइड्रेशन धीरे-धीरे होता है और इसके लक्षण तुरंत नजर नहीं आते। सिरदर्द, थकान, चक्कर आना, कब्ज, ड्राई स्किन और पेशाब का रंग गाढ़ा होना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। लंबे समय तक पर्याप्त पानी न पीने से किडनी स्टोन, यूरिन इंफेक्शन और ब्लड प्रेशर की समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
डॉ. भदानी के अनुसार, सर्दियों में लोग गर्म पेय जैसे चाय या कॉफी पर ज्यादा निर्भर हो जाते हैं, जो शरीर को अस्थायी गर्माहट तो देते हैं, लेकिन पर्याप्त हाइड्रेशन नहीं कर पाते। इसलिए सिर्फ प्यास लगने का इंतजार करने के बजाय दिनभर नियमित अंतराल पर पानी पीना जरूरी है।
सर्दियों में रोज कितना पानी पिएं
एम्स डॉक्टर की सलाह के अनुसार, सर्दियों में पानी की मात्रा इस प्रकार होनी चाहिए:
सामान्य पुरुषों को रोजाना लगभग 8 से 10 गिलास पानी पीना चाहिए।
महिलाओं के लिए 6 से 8 गिलास पानी पर्याप्त माना जाता है।
इसका मतलब यह हुआ कि रोज कम से कम 2 लीटर पानी का सेवन जरूरी है। हालांकि, यह मात्रा व्यक्ति की दिनचर्या, उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार बदल सकती है।
अगर आप रोजाना व्यायाम करते हैं या शारीरिक रूप से ज्यादा सक्रिय रहते हैं, तो पानी की जरूरत और बढ़ जाती है।
एक्टिव पुरुषों को 10 से 14 गिलास तक पानी पीने की जरूरत हो सकती है।
एक्टिव महिलाओं के लिए 8 से 10 गिलास पानी जरूरी माना जाता है।
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी विशेष ध्यान देना चाहिए। इस दौरान शरीर को अतिरिक्त तरल की जरूरत होती है, इसलिए उन्हें 7 से 10 गिलास या उससे अधिक पानी पीना चाहिए।
डॉ. भदानी यह भी स्पष्ट करते हैं कि यह मात्रा सिर्फ सादा पानी से पूरी करना जरूरी नहीं है। अन्य तरल पदार्थ और हाइड्रेटिंग फूड्स भी शरीर को पानी प्रदान करते हैं।
पानी के अलावा किन चीजों से रखें शरीर हाइड्रेट
अगर सर्दियों में आपको ज्यादा पानी पीना मुश्किल लगता है, तो कुछ आसान विकल्प अपनाए जा सकते हैं।
हर्बल चाय, ग्रीन टी और सूप सर्दियों में हाइड्रेशन के अच्छे स्रोत हो सकते हैं।
सब्जियों का सूप न सिर्फ शरीर को गर्म रखता है, बल्कि तरल और पोषक तत्व भी देता है।
फल जैसे संतरा, सेब, अमरूद और सब्जियां जैसे खीरा, टमाटर और गाजर भी शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखने में मदद करते हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कैफीन वाले पेय पदार्थों का सेवन सीमित रखें, क्योंकि ये शरीर से पानी बाहर निकाल सकते हैं।
पानी पीने की आदत कैसे बनाएं
सर्दियों में प्यास कम लगने के कारण सबसे बड़ी समस्या यही होती है कि लोग पानी पीना भूल जाते हैं। इसके लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं।
हर भोजन के साथ एक गिलास पानी जरूर पिएं।
बाथरूम जाने के बाद पानी पीने की आदत डालें।
कंप्यूटर या मोबाइल से ब्रेक लेते समय पानी पीना याद रखें।
सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुना पानी पीना फायदेमंद होता है।
डॉ. भदानी का कहना है कि ठंड के मौसम में गुनगुना या सामान्य तापमान का पानी पीना ज्यादा आरामदायक होता है, जिससे लोग पानी पीने से कतराते नहीं हैं।
हमारी राय
सर्दियों में पानी की कमी को अक्सर लोग हल्के में ले लेते हैं, लेकिन यह आदत धीरे-धीरे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है। प्यास कम लगना शरीर की जरूरत कम होने का संकेत नहीं है, बल्कि यह मौसम का प्रभाव है। किडनी, पाचन और त्वचा की सेहत बनाए रखने के लिए सर्दियों में भी नियमित हाइड्रेशन उतना ही जरूरी है जितना गर्मियों में।
हमारी राय में, पानी पीने को केवल प्यास से जोड़ने के बजाय इसे दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। सूप, फल और हर्बल ड्रिंक्स के जरिए भी शरीर को तरल मिल सकता है, लेकिन सादा पानी सबसे जरूरी है। अगर लोग सर्दियों में भी हाइड्रेशन को प्राथमिकता दें, तो कई छोटी-बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है। सही आदतें अपनाकर ठंड के मौसम में भी शरीर को स्वस्थ और सक्रिय रखा जा सकता है।
