आगे के लिए और भी बहुत कुछ: जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की भारत यात्रा
चांसलर मर्ज की यात्रा ईयू के साथ व्यापक जुड़ाव का संकेत देती है
वैश्विक राजनीति इस समय अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर दबाव और अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को जटिल बना दिया है। ऐसे समय में भारत और यूरोप के बीच बढ़ता संवाद सिर्फ आर्थिक जरूरत नहीं, बल्कि रणनीतिक विवशता भी बनता जा रहा है।
इसी संदर्भ में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की भारत यात्रा को देखा जाना चाहिए। यह यात्रा ऐसे वक्त पर हुई है जब इस महीने के अंत में होने वाले भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन की तैयारियां चल रही हैं और यूरोपीय आयोग व परिषद के अध्यक्ष गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने वाले हैं। इसके साथ ही फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की प्रस्तावित भारत यात्रा भी इस व्यापक यूरोपीय जुड़ाव की तस्वीर को और स्पष्ट करती है।
भारत–जर्मनी रिश्तों से आगे, भारत–ईयू का संदेश
अहमदाबाद में चांसलर मर्ज और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच हुई मुलाकात केवल द्विपक्षीय नहीं थी। जर्मनी, जो यूरोपीय संघ की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, भारत–ईयू संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लंबे समय से अटका भारत–ईयू मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दोनों पक्षों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी हो सकता है, लेकिन पर्यावरण मानकों, श्रम नियमों और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर मतभेद अब तक राह में रोड़ा बने हुए हैं।
मर्ज की यात्रा ने यह संकेत दिया कि जर्मनी भारत के साथ मिलकर इन अड़चनों को दूर करने के पक्ष में है। यह यूरोपीय संघ के भीतर भी एक सकारात्मक संदेश है कि भारत को केवल एक उभरते बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साझेदार के रूप में देखा जाए।
व्यापार और निवेश: ठोस आधार
आंकड़े इस रिश्ते की मजबूती को रेखांकित करते हैं। वर्ष 2024-25 में भारत–जर्मनी द्विपक्षीय व्यापार 50 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा, जिससे जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। जर्मन कंपनियां भारत के मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, ग्रीन एनर्जी और केमिकल सेक्टर में पहले से मौजूद हैं।
व्यापार परिषद की बैठक में दोनों नेताओं ने निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। भारत के लिए यह इसलिए भी अहम है क्योंकि वह चीन पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक आपूर्ति शृंखलाओं को आकर्षित करना चाहता है, जबकि जर्मनी और यूरोप को एशिया में एक भरोसेमंद, लोकतांत्रिक और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की जरूरत है।
रक्षा और तकनीक: रणनीतिक आयाम
इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप रहा। रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग और तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा देने वाली संयुक्त घोषणाएं इस ओर इशारा करती हैं कि भारत और जर्मनी अब संबंधों को केवल व्यापार तक सीमित नहीं रखना चाहते।
भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए विविध स्रोत चाहता है, जबकि जर्मनी उन्नत तकनीक और रक्षा उत्पादन में साझेदारी के नए अवसर तलाश रहा है। हालांकि, अभी यह सहयोग समझौता ज्ञापनों और संयुक्त घोषणाओं तक सीमित है। असली परीक्षा तब होगी जब इन समझौतों को ठोस रक्षा खरीद और संयुक्त उत्पादन में बदला जाएगा।
भू-राजनीतिक संदर्भ
चर्चा के दौरान वैश्विक भू-राजनीतिक हालात, खासकर अमेरिका की नीतियों और उनके प्रभावों पर भी विचार हुआ। यूरोप इस समय रणनीतिक स्वायत्तता की बात कर रहा है और भारत को वह इस दिशा में एक अहम साझेदार के रूप में देखता है। भारत भी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थक रहा है। ऐसे में भारत–ईयू सहयोग वैश्विक संतुलन में एक नई धुरी बन सकता है।
निष्कर्ष
चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की भारत यात्रा कई स्तरों पर महत्वपूर्ण रही। इसने भारत–जर्मनी रिश्तों को नई ऊर्जा दी और साथ ही भारत–ईयू साझेदारी के लिए एक मजबूत संकेत भेजा। हालांकि, घोषणाओं और समझौता ज्ञापनों से आगे बढ़कर ठोस नतीजों तक पहुंचना अब दोनों पक्षों की जिम्मेदारी है।
व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना, रक्षा और तकनीकी सहयोग को जमीन पर उतारना और रणनीतिक संवाद को संस्थागत रूप देना इस रिश्ते की अगली परीक्षा होगी। यदि ऐसा होता है, तो यह यात्रा भविष्य में एक निर्णायक मोड़ के रूप में याद की जा सकती है।
हमारी राय
भारत और यूरोप दोनों ही एक ऐसे दौर में खड़े हैं जहां सहयोग विकल्प नहीं, आवश्यकता बन चुका है। जर्मन चांसलर की यात्रा ने सही दिशा दिखाई है, लेकिन असली सफलता तब मानी जाएगी जब कागजों पर बनी सहमतियां उद्योग, रोजगार और रणनीतिक स्थिरता में बदलेंगी। भारत के लिए यह मौका है कि वह यूरोप के साथ संतुलित, आत्मनिर्भर और दीर्घकालिक साझेदारी को आगे बढ़ाए।
डिस्क्लेमर: यह लेख लेखक के निजी विचारों पर आधारित है। TheTrendingPeople.com का उद्देश्य संतुलित और तथ्यपूर्ण विमर्श प्रस्तुत करना है। लेख में व्यक्त विचार अनिवार्य रूप से वेबसाइट के आधिकारिक दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
