बिहार विधानसभा के बजट सत्र का बिगुल बजा—2 फरवरी से शुरुआत, विपक्ष की 'घेराबंदी' और सरकार का 'पलटवार', हंगामेदार होने के पूरे आसार
पटना, दिनांक: 27 जनवरी 2026 — बिहार की राजनीति का पारा एक बार फिर चढ़ने वाला है। राज्य विधानसभा का महत्वपूर्ण बजट सत्र आगामी 2 फरवरी से शुरू होने जा रहा है, लेकिन सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही सियासी बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। विपक्ष ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि वह इस बार सरकार को आसानी से नहीं बख्शेगा। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस ने राज्य में बढ़ते अपराध, भ्रष्टाचार और विकास की धीमी रफ्तार को मुद्दा बनाकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष की रणनीति सदन के भीतर और बाहर सरकार को घेरने की है, जिससे यह सत्र काफी हंगामेदार रहने की संभावना है।
आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि राज्य में कानून-व्यवस्था चरमरा गई है और भ्रष्टाचार चरम पर है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जनहित के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो सदन की कार्यवाही नहीं चलने दी जाएगी। कांग्रेस प्रवक्ता असीतनाथ तिवारी ने भी सुर में सुर मिलाते हुए सरकार को हर मोर्चे पर विफल बताया है। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष भी विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए तैयार है। जेडीयू और बीजेपी के प्रवक्ताओं का कहना है कि सरकार हर सवाल का जवाब देने को तैयार है, लेकिन विपक्ष चर्चा के बजाय केवल हंगामा करने की रणनीति बनाकर आता है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
सत्र का कार्यक्रम तय हो चुका है। 2 फरवरी को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के अभिभाषण और आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के साथ सत्र का आगाज होगा। इसके अगले दिन, यानी 3 फरवरी को वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। इसके बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और बजट पर चर्चा का दौर चलेगा। 27 फरवरी तक चलने वाले इस सत्र में अनुदान मांगों पर मतदान और कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य निपटाए जाएंगे।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
बजट सत्र किसी भी राज्य के लिए भविष्य की रूपरेखा तय करने का अवसर होता है, लेकिन बिहार में अक्सर यह सियासी शोर-शराबे की भेंट चढ़ जाता है। विपक्ष का काम सरकार की खामियों को उजागर करना है और सरकार का दायित्व जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
The Trending People का विश्लेषण है कि अगर सत्र केवल हंगामे में बीत गया, तो नुकसान अंततः बिहार की जनता का होगा। अपराध और भ्रष्टाचार गंभीर मुद्दे हैं जिन पर तार्किक बहस होनी चाहिए, न कि केवल नारेबाजी। उम्मीद है कि पक्ष और विपक्ष अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने से ऊपर उठकर राज्य के विकास के लिए एक रचनात्मक संवाद स्थापित करेंगे। 3 फरवरी को पेश होने वाला बजट यह तय करेगा कि सरकार 2026 में बिहार को किस दिशा में ले जाना चाहती है।