महाशिवरात्रि 2026: मकर राशि में त्रिग्रहीय और महालक्ष्मी योग का महासंयोग, जानें शुभ मुहूर्त और चार पहर की पूजा विधि
महाशिवरात्रि 2026: ग्रह-नक्षत्रों का दुर्लभ और शक्तिशाली संयोग
भगवान शिव की आराधना का महापर्व महाशिवरात्रि वर्ष 2026 में 15 फरवरी को मनाया जाएगा। इस विशेष दिन सूर्योदय से लेकर देर रात तक ग्रह-नक्षत्रों का एक ऐसा अद्भुत संयोग बन रहा है, जो इस पर्व की आध्यात्मिक महत्ता को कई गुना बढ़ा देगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र शाम 7:26 बजे तक व्याप्त रहेगा, जिसके बाद श्रवण नक्षत्र का प्रारंभ होगा। इसके साथ ही व्यतिपात योग रात 2:45 बजे तक रहेगा और अमृत नामक औदायिक योग भी निर्मित हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन शक्तिशाली योगों में किया गया पूजन और शिव साधना अक्षय पुण्य की प्राप्ति कराने वाली होती है।
मकर राशि में त्रिग्रहीय और महालक्ष्मी योग का निर्माण
इस वर्ष महाशिवरात्रि के दिन ग्रहों की स्थिति अत्यंत विशिष्ट होने वाली है। संपूर्ण दिन और रात चंद्रमा और मंगल शनि की पहली राशि मकर में गोचर करेंगे, जिससे मकर राशि में त्रिग्रहीय योग और महालक्ष्मी योग का निर्माण होगा। ग्रहों की इस विशेष स्थिति में कुम्भ राशि में सूर्य, बुध, राहु और शुक्र का मिलन हो रहा है, जो एक अत्यंत शक्तिशाली ऊर्जा का संचार करेगा। वहीं देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्चाभिलाषी स्थिति में मिथुन राशि में विराजमान रहेंगे और शनि देव स्वयं बृहस्पति की राशि मीन में गोचर करेंगे। ज्योतिषियों का मानना है कि शिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र का होना, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं और देवता शिव के प्रिय चंद्रमा हैं, हरि और हर (विष्णु और शिव) के मिलन का प्रतीक है।
15 फरवरी को ही क्यों मनाई जाएगी महाशिवरात्रि?
धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महाशिवरात्रि का निर्धारण चतुर्दशी तिथि के रात्रि व्यापिनी होने के आधार पर किया जाता है। वर्ष 2026 में चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की शाम से शुरू होकर 16 फरवरी तक रहेगी। चूंकि महाशिवरात्रि की मुख्य पूजा निशीथ काल यानी मध्यरात्रि में की जाती है, इसलिए 15 फरवरी की रात को ही महाशिवरात्रि मनाना शास्त्रसम्मत और उचित माना गया है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी सुबह 7:45 बजे से शाम 7:00 बजे तक व्याप्त रहेगा, जो किसी भी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान और संकल्प के लिए अत्यंत शुभ फलदायी है। इस पावन अवसर पर भगवान शिव का रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और माता पार्वती का पूजन भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और आरोग्य लेकर आता है।
चार पहर की पूजा का सटीक समय और निशीथ काल
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की चार पहर की पूजा का विशेष विधान है, जिससे साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रथम पहर की पूजा शाम 6:39 बजे से रात 9:45 बजे तक की जाएगी, जबकि द्वितीय पहर का समय रात 9:45 बजे से मध्यरात्रि 12:52 बजे तक रहेगा। महाशिवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण 'निशीथ काल' पूजा का समय रात 12:28 बजे से 1:17 बजे तक रहेगा, जिसे तंत्र और मंत्र साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसके पश्चात तृतीय पहर की पूजा रात 12:52 बजे से तड़के 3:59 बजे तक और चतुर्थ पहर की पूजा 3:59 बजे से सुबह 7:06 बजे तक संपन्न की जाएगी।
महाशिवरात्रि 2026 का पर्व आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दोनों ही दृष्टिकोणों से एक मील का पत्थर साबित होने वाला है। मकर और कुम्भ राशि में ग्रहों का यह दुर्लभ जमावड़ा और श्रवण नक्षत्र का संयोग भक्तों के लिए शिव-शक्ति की ऊर्जा को आत्मसात करने का स्वर्णिम अवसर है। भगवान शिव और श्री हरि विष्णु के मिलन का यह प्रतीक पर्व हमें यह सिखाता है कि सृष्टि का संतुलन तभी संभव है जब संहार और पालन की शक्तियां एकाकार हों। श्रद्धापूर्वक चार पहर की पूजा और मंत्रों का जाप न केवल ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को कम करता है, बल्कि व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करता है। इस पावन तिथि पर किया गया दान और तप जीवन की बाधाओं को दूर कर सुखमय भविष्य का आधार बनता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या विद्वान ज्योतिषी की सलाह जरूर लें।
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