भारतीय सेना के जवानों को मिलने वाली सुविधाओं में Canteen Stores Department (CSD) एक अहम व्यवस्था है, जहां उन्हें बाजार से कम कीमत पर सामान उपलब्ध कराया जाता है। हाल ही में हैदराबाद में प्रीमियम शराब की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद यह सवाल फिर चर्चा में आ गया है कि आखिर कैंटीन में शराब इतनी सस्ती क्यों मिलती है।
मामले में आबकारी विभाग ने करीब 10 लाख रुपये की 361 प्रीमियम शराब की बोतलें जब्त कीं। जांच में सामने आया कि यह शराब बेंगलुरु और हरियाणा की डिफेंस कैंटीन से लाई गई थी और खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेची जा रही थी। इस अवैध कारोबार में एक रिटायर्ड आर्मी कर्मचारी का नाम भी सामने आया है, जो फिलहाल फरार बताया जा रहा है।
दरअसल, CSD कैंटीन में मिलने वाले उत्पादों पर टैक्स में भारी छूट दी जाती है। शराब पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी और GST को काफी हद तक कम या माफ कर दिया जाता है, क्योंकि यह व्यवस्था रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आती है। इसी वजह से बाजार में 1500 रुपये तक मिलने वाली शराब कैंटीन में करीब 500 से 800 रुपये के बीच उपलब्ध होती है।
हालांकि इस सुविधा का दुरुपयोग न हो, इसके लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। शराब खरीदने के लिए तय कोटा सिस्टम लागू होता है, जो सैनिक की रैंक के आधार पर निर्धारित किया जाता है। वरिष्ठ अधिकारियों को एक महीने में करीब 10 बोतल, जूनियर कमीशंड अधिकारियों को 6 से 7 बोतल और अन्य जवानों को 4 से 5 बोतल खरीदने की अनुमति होती है। यह नियम सेवारत और रिटायर्ड दोनों कर्मियों पर लागू होता है।
CSD से खरीदारी के लिए स्मार्ट कार्ड जरूरी होता है, जिसमें हर लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड दर्ज होता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी व्यक्ति अपने निर्धारित कोटे से अधिक शराब न खरीद सके। साथ ही, ग्राहकों को बीयर और हार्ड ड्रिंक के बीच विकल्प भी दिया जाता है।
2023 के बाद नियमों में कुछ बदलाव भी किए गए हैं। अब सैनिक अपने मासिक कोटे का 50 प्रतिशत हिस्सा महंगी शराब पर खर्च कर सकते हैं, जिसकी कीमत 2000 रुपये से अधिक हो सकती है।
हमारी राय में
CSD की यह व्यवस्था सैनिकों के कल्याण के लिए बनाई गई है, लेकिन हैदराबाद जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि सिस्टम में कहीं न कहीं खामियां मौजूद हैं। सस्ती शराब का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए निगरानी और सख्ती दोनों जरूरी हैं, ताकि यह सुविधा अपने सही उद्देश्य के साथ जारी रह सके।
