राजधानी में आर्थिक अपराध शाखा ने सोलर प्रोजेक्ट टेंडर से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। दिल्ली पुलिस आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान एक बड़ी कॉरपोरेट कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी का नाम भी सामने आया है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
जांच में पता चला है कि आरोपियों ने Solar Energy Corporation of India से टेंडर हासिल करने के लिए 136 करोड़ रुपये से अधिक की जाली बैंक गारंटी जमा की थी। इस पूरे नेटवर्क में Reliance Power Limited के मुख्य वित्तीय अधिकारी अशोक कुमार पाल की कथित भूमिका भी सामने आई है।
एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने जाली दस्तावेजों का ऐसा जाल तैयार किया, जिससे वे असली प्रतीत हों। इसके लिए नकली ईमेल संवाद बनाए गए और State Bank of India के नाम से फर्जी पुष्टि पत्र भी तैयार किए गए। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया गया।
पुलिस ने तीनों आरोपियों को 15 अप्रैल को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद अदालत ने उन्हें 23 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में और लोगों की संलिप्तता की आशंका है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि यह मामला केवल एक टेंडर तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इससे जुड़े वित्तीय लेनदेन और अन्य प्रोजेक्ट्स की भी जांच की जा रही है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस फर्जीवाड़े का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही है।
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे तकनीक और फर्जी दस्तावेजों के जरिए बड़े स्तर पर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा सकता है।
हमारी राय में
सोलर जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर में इस तरह की धोखाधड़ी गंभीर चिंता का विषय है। इससे न केवल सरकारी परियोजनाओं की पारदर्शिता प्रभावित होती है, बल्कि निवेशकों और आम जनता का भरोसा भी कमजोर होता है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और त्वरित जांच बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।