Yashoda Jayanti 2026: फाल्गुन कृष्ण षष्ठी पर मनाया जाएगा यशोदा जन्मोत्सव, जानें शुभ मुहूर्त
धर्म डेस्क। हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान Krishna की माता Yashoda का जन्मोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन माता यशोदा और बाल कृष्ण की विधि-विधान से पूजा की जाती है और भक्त विशेष व्रत रखकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
यशोदा जन्मोत्सव को विशेष रूप से संतान सुख और पारिवारिक समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से संतान प्राप्ति, बच्चों की उन्नति और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
यशोदा जन्मोत्सव का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, माता यशोदा को वात्सल्य और ममता की प्रतिमूर्ति माना जाता है। उन्होंने भगवान कृष्ण का पालन-पोषण किया और उन्हें प्रेम व संस्कारों से सींचा। इसी कारण यह पर्व मातृत्व, त्याग और स्नेह का प्रतीक माना जाता है।
भक्तों का विश्वास है कि इस दिन माता यशोदा की पूजा करने से संतान से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कैसे होती है पूजा और आराधना
यशोदा जयंती के दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल को शुद्ध किया जाता है। इसके बाद माता यशोदा और बाल कृष्ण की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उनका पूजन किया जाता है।
पूजा में दूध, दही, मक्खन, मिश्री, फल और मिष्ठान्न अर्पित किए जाते हैं। भजन-कीर्तन और आरती के साथ पूजा संपन्न की जाती है। अंत में प्रसाद का वितरण किया जाता है, जिससे घर का वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
यशोदा जयंती 2026 की तिथि और पंचांग विवरण
धार्मिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 7 फरवरी की सुबह 2 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 8 फरवरी तक रहेगी। इस दिन चित्रा नक्षत्र रहेगा, जो 8 फरवरी की सुबह 2 बजकर 28 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
चंद्रमा कन्या राशि में संचरण करेगा। सूर्योदय सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 5 मिनट पर होगा।
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
इस दिन पूजा के लिए कई शुभ योग बन रहे हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग सुबह 2 बजकर 28 मिनट से 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगा, जो विशेष रूप से फलदायी माना गया है।
इसके अलावा अमृत काल शाम 7 बजकर 31 मिनट से रात 9 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 25 मिनट से 3 बजकर 9 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 3 मिनट से 6 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।
इन समयों में पूजा और धार्मिक कार्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
अशुभ समय में करें सावधानी
यशोदा जयंती के दिन कुछ अशुभ काल भी रहेगा, जिसमें पूजा या नया कार्य करने से बचना चाहिए। राहुकाल सुबह 9 बजकर 51 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। यमगंड दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 7 बजकर 6 मिनट से 8 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।
इन समयों में शुभ कार्य टालना बेहतर माना जाता है।
संतान सुख के लिए क्यों खास है यह पर्व
यशोदा जन्मोत्सव को संतान से जुड़े वरदान का पर्व भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से निसंतान दंपतियों को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है और बच्चों की सेहत व भविष्य उज्ज्वल होता है।
इसी वजह से यह पर्व विशेष रूप से माता-पिता और नवविवाहित दंपतियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
घर में कैसे बनाएं भक्तिमय माहौल
इस दिन घर में भजन, कृष्ण लीला से जुड़े भजन और कीर्तन करने से वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बनता है। बच्चों को भगवान कृष्ण और माता यशोदा की कथाएं सुनाने से उनमें संस्कार और भक्ति की भावना विकसित होती है।
साथ ही जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करना भी इस दिन विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
हमरी राय में
हमरी राय में, यशोदा जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मातृत्व, प्रेम और परिवारिक मूल्यों का उत्सव है। इस दिन माता यशोदा की तरह त्याग, स्नेह और धैर्य को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिलती है।
अगर श्रद्धा, नियम और शुभ मुहूर्त के साथ इस पर्व को मनाया जाए, तो यह न सिर्फ आध्यात्मिक शांति देता है, बल्कि परिवार में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ाता है।
