राजनीति और मनोरंजन: यूपी में विकास का नया रोडमैप, बिहार में भ्रष्टाचार पर वार और 'अनुपमा' में नया मोड़
भारतीय राजनीति और मनोरंजन के पटल पर आज कई बड़ी हलचलें देखने को मिल रही हैं। जहाँ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार विधानसभा के बजट सत्र में राज्य के विकास का नया खाका पेश करने की तैयारी में है, वहीं बिहार में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने भ्रष्टाचार के मुद्दों पर विपक्षी नेताओं को घेरा है। इन गंभीर राजनीतिक विमर्शों के बीच, टेलीविजन की दुनिया में लोकप्रिय धारावाहिक 'अनुपमा' में भी भावनाओं और षड्यंत्रों का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। कोठारी मेंशन में चल रही उथल-पुथल और माही की नई चालों ने कहानी को एक रोमांचक मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहाँ रिश्तों की जटिलता और कड़वाहट एक बार फिर सामने आ रही है।
उत्तर प्रदेश बजट सत्र 2026: विकास का रोडमैप और खर्च की चुनौतियां
उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र का आगाज़ सोमवार को राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के अभिभाषण के साथ हुआ। सरकार इस सत्र के दौरान 11 महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन के पटल पर रखने वाली है और 11 फरवरी को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना राज्य का नया बजट पेश करेंगे। हालांकि, वित्त विभाग के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आवंटित कुल 8,65,079.46 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट का मात्र 49.53 प्रतिशत ही अब तक खर्च हो सका है। नमामि गंगे और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभागों में बजट आवंटन की सुस्त रफ्तार विकास कार्यों की गति पर सवाल खड़े कर रही है।
विपक्ष के तीखे तेवर और बिहार में सियासी घमासान
विधानसभा सत्र के पहले ही दिन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने कानून-व्यवस्था और ट्रेड डील जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति साफ कर दी है। दूसरी ओर, बिहार की राजनीति में भी कड़वाहट बढ़ती दिख रही है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार को लेकर तीखा प्रहार किया है। राय ने चारा घोटाला और भूमि घोटाला जैसे पुराने मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि जो भी कानून के खिलाफ काम करेगा, उसे परिणाम भुगतना ही होगा। उन्होंने सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी को भी पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया और इसमें सरकार के हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज कर दिया।
अनुपमा सीरियल अपडेट: कोठारी मेंशन में साजिश और संदेह
टेलीविजन जगत की बात करें तो टीवी सीरियल 'अनुपमा' के सोमवार के एपिसोड की शुरुआत कोठारी मेंशन में चल रही भारी उथल-पुथल के साथ होगी। कीर्ति के जाने के बाद अनुपमा घर के भीतर कदम रखेगी और कपिल की मदद करने का प्रस्ताव देगी। वह कपिल को यह समझाने की कोशिश करेगी कि कैसे छोटी-छोटी गलतफहमियां बड़े झगड़ों का कारण बन जाती हैं। हालांकि, बातचीत के दौरान कपिल जिस शालीनता और सीधेपन से बात करेगा, वह अनुपमा को गहरे संदेह में डाल देगा। वह यह सोचने पर मजबूर हो जाएगी कि इतने सीधे स्वभाव वाला व्यक्ति कीर्ति के साथ इतना बुरा व्यवहार कैसे कर सकता है। अनुपमा के मन में यह बात खटकेगी कि कहीं सच वह नहीं है जो सामने दिख रहा है।
कहानी में नया मोड़ तब आता है जब अनुपमा किचन में पहुँचती है और वहाँ वसुंधरा कोठारी को अपनी भांजी कीर्ति के लिए पकवान बनाते हुए देखती है। वहाँ मौजूद माही और ख्याति के बीच बातों का सिलसिला चलता है, जहाँ वसुंधरा अपना दुख व्यक्त करती है कि कीर्ति ने खुद अपना जीवनसाथी चुनकर गलत फैसला किया और अब उसे निजी जिंदगी में बहुत कुछ झेलना पड़ रहा है। अनुपमा जब राही के पैर की मालिश के लिए तेल माँगने आती है, तो माही को आग में घी डालने का मौका मिल जाता है। माही जानबूझकर राही की चोट पर सवाल उठाती है और वसुंधरा को भड़काने की कोशिश करती है कि कैसे राही अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी मार रही है।
माही की चाल और अनुपमा की विफलता
माही की साजिशें यहीं नहीं रुकतीं। वह वसुंधरा कोठारी के मन में यह जहर घोलने की कोशिश करती है कि प्रेरणा और प्रेम का इस घर में एक साथ रहना सुरक्षित नहीं है। माही यहाँ तक कह देती है कि प्रेरणा के भीतर उसकी माँ रजनी का ही खून है और खून देर-सबेर अपना असर जरूर दिखाता है। अनुपमा अपनी बेटी माही को चुप कराने और वसुंधरा की नकारात्मक सोच को रोकने की भरपूर कोशिश करती है, लेकिन इस बार माही अपनी कोशिश में कामयाब होती दिखती है। वसुंधरा कोठारी अब प्रेरणा के प्रति संशय में नजर आने लगती हैं, जो आने वाले समय में अनुपमा के लिए एक बड़ी चुनौती बनने वाला है।
चाहे राजनीति हो या टेलीविजन की दुनिया, षड्यंत्र और आरोप-प्रत्यारोप की कहानी हर जगह समानांतर चल रही है। उत्तर प्रदेश में जहाँ सरकार बजट के आंकड़ों और विपक्ष के तीखे हमलों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं बिहार में भ्रष्टाचार के पुराने जख्मों को फिर से कुरेदा जा रहा है। इसी प्रकार 'अनुपमा' की कहानी में माही की चालों ने यह साबित कर दिया है कि कभी-कभी अपनों की ही नफरत सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाती है। अनुपमा के सामने अब न केवल घर के बाहर की राजनीतिक चुनौतियों (समाज के रूप में) से लड़ने की जिम्मेदारी है, बल्कि उसे घर के भीतर अपनी ही बेटी द्वारा फैलाए जा रहे जहर को भी रोकना होगा। 11 फरवरी का बजट और अनुपमा का अगला कदम, दोनों ही आने वाले समय की दिशा तय करेंगे।