राजनीति, तकनीक और मनोरंजन: यूपी बजट सत्र, पीएम मोदी की एआई पर सलाह और 'अनुपमा' का नया मोड़
आज का दिन राजनीतिक गहमागहमी, तकनीकी विमर्श और मनोरंजन जगत की हलचलों से भरा हुआ है। जहाँ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र में राज्य के विकास का नया रोडमैप पेश किया है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'परीक्षा पे चर्चा' के माध्यम से छात्रों को भविष्य की तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ तालमेल बिठाने का मंत्र दिया है। बिहार में केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय के तीखे राजनीतिक प्रहारों और टेलीविजन जगत के लोकप्रिय धारावाहिक 'अनुपमा' में माही के षड्यंत्रों ने आज के घटनाक्रम को और अधिक विस्तृत बना दिया है। तकनीक से लेकर शासन और पारिवारिक रिश्तों की जटिलता तक, आज के समाचार हर पहलू को छू रहे हैं।
परीक्षा पे चर्चा: पीएम मोदी की एआई पर महत्वपूर्ण सलाह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम के 9वें संस्करण के दूसरे एपिसोड में छात्रों के साथ सीधा संवाद करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा की। कोयंबटूर के छात्र आदि विक्रम द्वारा एआई से डरने और भविष्य के करियर को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि तकनीक से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि उसका सही इस्तेमाल सीखना अनिवार्य है। उन्होंने छात्रों को आगाह किया कि वे टेक्नोलॉजी के गुलाम न बनें, बल्कि तकनीक को खुद के विस्तार का जरिया बनाएं। पीएम ने जोर देकर कहा कि हर युग में नई तकनीक चर्चा का विषय रही है, जैसे कभी कंप्यूटर को लेकर आशंकाएं थीं, लेकिन निर्णायक हमेशा इंसान को ही रहना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने वर्तमान दौर में मोबाइल और टीवी की गुलामी पर चिंता जताते हुए कहा कि बहुत से बच्चों के लिए गैजेट्स उनके मालिक बन चुके हैं, जिसके बिना वे खाना तक नहीं खा सकते। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि एआई का उपयोग मार्गदर्शन लेने या वैल्यू एडिशन के लिए करें, न कि सीखने की प्रक्रिया को छोड़ने के लिए। पीएम मोदी के अनुसार, जॉब्स का स्वरूप हमेशा बदलता रहता है, इसलिए हमें टेक्नोलॉजी की ताकत को अपने कौशल के साथ जोड़ना होगा। अगर हम तकनीक को समझने और खुद का विस्तार करने में सफल होते हैं, तो कोई भी उत्तम तकनीक हमें नुकसान नहीं पहुँचा सकती, बल्कि वह हमारे लिए लाभप्रद ही सिद्ध होगी।
उत्तर प्रदेश बजट सत्र 2026: विकास का रोडमैप और खर्च की चुनौतियां
उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र का आगाज़ सोमवार को राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के अभिभाषण के साथ हुआ। सरकार इस सत्र के दौरान 11 महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन के पटल पर रखने वाली है और 11 फरवरी को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना राज्य का नया बजट पेश करेंगे। हालांकि, वित्त विभाग के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आवंटित कुल 8,65,079.46 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट का मात्र 49.53 प्रतिशत ही अब तक खर्च हो सका है। नमामि गंगे और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभागों में बजट आवंटन की सुस्त रफ्तार विकास कार्यों की गति पर सवाल खड़े कर रही है, जिसे सरकार नए बजट के माध्यम से गति देने की कोशिश करेगी।
विपक्ष के तीखे तेवर और बिहार में सियासी घमासान
विधानसभा सत्र के पहले ही दिन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने कानून-व्यवस्था और ट्रेड डील जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति साफ कर दी है। दूसरी ओर, बिहार की राजनीति में भी कड़वाहट बढ़ती दिख रही है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार को लेकर तीखा प्रहार किया है। राय ने चारा घोटाला और भूमि घोटाला जैसे पुराने मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि जो भी कानून के खिलाफ काम करेगा, उसे परिणाम भुगतना ही होगा। उन्होंने सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी को भी पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया और इसमें सरकार के हस्तक्षेप के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
अनुपमा सीरियल अपडेट: कोठारी मेंशन में साजिश और संदेह
टेलीविजन जगत की बात करें तो टीवी सीरियल 'अनुपमा' के सोमवार के एपिसोड की शुरुआत कोठारी मेंशन में चल रही भारी उथल-पुथल के साथ होगी। कीर्ति के जाने के बाद अनुपमा घर के भीतर कदम रखेगी और कपिल की मदद करने का प्रस्ताव देगी। वह कपिल को यह समझाने की कोशिश करेगी कि कैसे छोटी-छोटी गलतफहमियां बड़े झगड़ों का कारण बन जाती हैं। हालांकि, बातचीत के दौरान कपिल जिस शालीनता और सीधेपन से बात करेगा, वह अनुपमा को गहरे संदेह में डाल देगा। वह यह सोचने पर मजबूर हो जाएगी कि इतने सीधे स्वभाव वाला व्यक्ति कीर्ति के साथ इतना बुरा व्यवहार कैसे कर सकता है।
कहानी में नया मोड़ तब आता है जब माही अपनी सास वसुंधरा कोठारी के मन में अनुपमा और राही के प्रति जहर घोलने का काम शुरू करती है। किचन में चल रही बातों के दौरान माही राही की चोट पर सवाल उठाती है और प्रेरणा व प्रेम की नजदीकियों को लेकर वसुंधरा को डराती है। माही यहाँ तक कह देती है कि प्रेरणा के भीतर उसकी माँ रजनी का ही खून है और खून देर-सबेर अपना असर जरूर दिखाता है। अनुपमा अपनी बेटी माही की इन नकारात्मक बातों को रोकने की भरपूर कोशिश करती है, लेकिन माही अपनी चाल में कामयाब होती दिखती है और वसुंधरा कोठारी अब प्रेरणा के प्रति संशय में नजर आने लगती हैं।
आज के विविध समाचारों का विश्लेषण करें तो एक बात स्पष्ट होती है कि चाहे वह तकनीक का क्षेत्र हो, शासन का या फिर रिश्तों का, 'नियंत्रण' और 'विवेक' ही सबसे महत्वपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री मोदी की एआई पर सलाह न केवल छात्रों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक दिशा-निर्देश है कि हमें मशीनों का मालिक बने रहना है, न कि उनका दास। वहीं उत्तर प्रदेश का बजट सत्र और बिहार की राजनीति यह याद दिलाते हैं कि प्रशासनिक जवाबदेही और कानून का शासन किसी भी लोकतंत्र की नींव हैं। 'अनुपमा' की कहानी हमें सिखाती है कि बाहरी चुनौतियों से लड़ना आसान है, लेकिन घर के भीतर छिपे षड्यंत्रों को पहचानना और उनका मुकाबला करना सबसे कठिन परीक्षा है। तकनीक का सही उपयोग, बेहतर शासन और रिश्तों में पारदर्शिता ही भविष्य के भारत का निर्माण करेगी।