ट्रंप के 'यू-टर्न' से कमोडिटी बाजार में कोहराम—सोना-चांदी औंधे मुंह गिरे, ETF में 21% की ऐतिहासिक गिरावट, निवेशकों के उड़ गए होश
नई दिल्ली/दावोस, दिनांक: 22 जनवरी 2026 — शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट में कब क्या हो जाए, इसका अंदाजा लगाना मौसम की भविष्यवाणी से भी ज्यादा मुश्किल है। कुछ दिन पहले तक जो सोना और चांदी निवेशकों के लिए 'सुरक्षित बंदरगाह' (Safe Haven) बने हुए थे और रिकॉर्ड ऊंचाई छू रहे थे, 22 जनवरी की सुबह होते-होते उनकी चमक फीकी पड़ गई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के एक बयान ने बाजार की दिशा को 180 डिग्री घुमा दिया है। देखते ही देखते गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (Exchange Traded Funds) में भारी बिकवाली (Sell-off) शुरू हो गई और निवेशकों की करोड़ों की संपत्ति स्वाहा हो गई।
इस भारी गिरावट का कारण विशुद्ध रूप से भू-राजनीतिक (Geopolitical) है। ट्रंप द्वारा टैरिफ और ग्रीनलैंड को लेकर अपनाए गए नरम रुख ने बाजार में छाए 'युद्ध के डर' को कम कर दिया, जिससे निवेशकों ने सुरक्षित निवेश से पैसा निकालकर मुनाफावसूली शुरू कर दी।
दावोस में बदली तस्वीर: क्या कहा ट्रंप ने?
स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रही वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई जिसने बाजार का मूड बदल दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने नाटो (NATO) महासचिव मार्क रुट्टे (Mark Rutte) से मुलाकात की।
- टैरिफ पर यू-टर्न: मुलाकात के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर लिखा कि एक आपसी समझ के आधार पर वह उन टैरिफ्स (आयात शुल्क) को लागू नहीं करेंगे, जो 1 फरवरी से प्रभावी होने वाले थे। हालांकि उन्होंने समझौते का पूरा ब्योरा नहीं दिया, लेकिन यह बयान व्यापार युद्ध (Trade War) के टलने का संकेत था।
- ग्रीनलैंड पर सफाई: इसके साथ ही, ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर सैन्य कार्रवाई की अटकलों को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा, "मैं ऐसा नहीं करूंगा। लोग सोच रहे थे कि मैं ताकत का इस्तेमाल करूंगा, लेकिन मुझे इसकी जरूरत नहीं है और मैं ऐसा नहीं करना चाहता।"
इन बयानों ने बाजार में छाई अनिश्चितता के बादलों को छांट दिया।
ईटीएफ में 'ब्लडबाथ': 21% तक टूटे सिल्वर फंड
जैसे ही तनाव कम होने के संकेत मिले, जोखिम (Risk) का डर खत्म हुआ और मुनाफावसूली की आंधी आ गई। इसका सबसे बुरा असर ईटीएफ पर पड़ा।
सिल्वर ईटीएफ का हाल:
- टाटा सिल्वर ETF: सबसे बड़ी गिरावट यहां दर्ज की गई। यह फंड करीब 21% टूटकर लगभग 26.41 रुपये के स्तर पर आ गया।
- अन्य फंड्स: ग्रो (Groww), 360 ONE और एक्सिस सिल्वर ईटीएफ में करीब 16% की गिरावट रही। कोटक, मिराए एसेट और आदित्य बिड़ला सन लाइफ सिल्वर ईटीएफ भी 15% तक फिसले। निप्पॉन और एचडीएफसी के फंड्स भी 14% तक लुढ़के।
गोल्ड ईटीएफ भी नहीं बचे: गिरावट की मार सोने पर भी पड़ी।
- आदित्य बिड़ला सन लाइफ गोल्ड ईटीएफ करीब 12% गिरकर 130.42 रुपये पर आ गया।
- एक्सिस, टाटा और बंधन गोल्ड ईटीएफ में 11% तक की गिरावट दर्ज की गई। जो फंड एक दिन पहले रिकॉर्ड हाई पर थे, वे धड़ाम से नीचे आ गिरे।
शेयर बाजार पर असर: हिंदुस्तान जिंक टूटा
इस हलचल की लहरें शेयर बाजार तक भी पहुंचीं। चांदी की सबसे बड़ी भारतीय उत्पादक कंपनी हिंदुस्तान जिंक (Hindustan Zinc) के शेयर 6% से ज्यादा टूटकर 653.10 रुपये पर आ गए। धातु की कीमतों में गिरावट का सीधा असर माइनिंग कंपनियों के मार्जिन पर पड़ता है, जिसे बाजार ने तुरंत भांप लिया।
आगे क्या? एक्सपर्ट्स बोले- "पिक्चर अभी बाकी है"
इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद, बाजार के दिग्गज अभी भी सोने-चांदी को लेकर बहुत ज्यादा नकारात्मक (Bearish) नहीं हैं।
- एएनजेड (ANZ) की राय: कमोडिटी स्ट्रैटेजिस्ट सोनी कुमारी ने कहा कि यह गिरावट केवल तनाव कम होने का तात्कालिक रिएक्शन है। सोना अब भी मजबूत स्थिति में है क्योंकि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी जारी है और वैश्विक तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।
- गोल्डमैन सैक्स का भरोसा: ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने सोने को लेकर अपना दीर्घकालिक नजरिया और मजबूत (Bullish) किया है। उन्होंने दिसंबर 2026 के लिए सोने का लक्ष्य बढ़ाकर 5,400 डॉलर प्रति औंस कर दिया है (पहले 4,900 डॉलर)। उनका मानना है कि 2026 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 50 बेसिस पॉइंट की कटौती से सोने में निवेश फिर बढ़ेगा।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
22 जनवरी की घटना ने साबित कर दिया है कि कमोडिटी बाजार अब केवल मांग और आपूर्ति पर नहीं, बल्कि नेताओं के बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट्स पर चलता है। 21% की गिरावट एक दिन में होना यह बताता है कि बाजार में कितनी ज्यादा सट्टेबाजी (Speculation) चल रही थी।
The Trending People का विश्लेषण है कि यह गिरावट उन निवेशकों के लिए एक शानदार अवसर है जो 'फोमो' (FOMO) के कारण ऊंचे दामों पर खरीदारी नहीं कर पाए थे। ट्रंप के बयान बदलते रहते हैं, और भू-राजनीतिक जोखिम अभी पूरी तरह टले नहीं हैं। लंबी अवधि के निवेशकों को पैनिक सेलिंग (घबराहट में बिक्री) करने के बजाय अपने पोर्टफोलियो को होल्ड करना चाहिए। सोने-चांदी की चमक फीकी जरूर हुई है, लेकिन काली नहीं पड़ी है।

