रिटायरमेंट के बाद तनावमुक्त जीवन का फॉर्मूला: कम उम्र में शुरू करें ये तीन आदतें, भविष्य रहेगा सुरक्षित
रांची: नौकरीपेशा लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल अक्सर यही होता है कि रिटायरमेंट के बाद जिंदगी कैसे चलेगी। जब हर महीने सैलरी आनी बंद हो जाएगी, तब खर्च, इलाज और परिवार की जिम्मेदारियां कैसे पूरी होंगी। यह चिंता नई नहीं है, लेकिन बदलती जीवनशैली, बढ़ती महंगाई और स्वास्थ्य खर्चों ने इसे और गंभीर बना दिया है। ऐसे समय में रांची के जाने-माने फाइनेंशियल एडवाइजर और स्टॉक ब्रोकर एके सिंह का मानना है कि अगर युवा उम्र में ही कुछ बुनियादी कदम उठा लिए जाएं, तो रिटायरमेंट के बाद किसी तरह की आर्थिक असुरक्षा का डर नहीं रहता।
लोकल 18 से बातचीत में एके सिंह ने बताया कि अगर किसी की उम्र 25 से 30 साल के बीच है, तो उसके पास 30–35 साल का लंबा समय होता है। यही समय भविष्य की नींव रखने के लिए सबसे अहम है। उनका कहना है कि तीन आदतें ऐसी हैं, जिन्हें आज से अपनाने पर रिटायरमेंट के बाद भी नियमित आय बनी रह सकती है और व्यक्ति को दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
सबसे पहली आदत है सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP। एके सिंह बताते हैं कि सैलरी चाहे 20 हजार हो या 60 हजार, फर्क नहीं पड़ता। जरूरी यह है कि आप अपनी आमदनी का कम से कम 10 प्रतिशत निवेश के लिए अलग रखें। उदाहरण के तौर पर अगर आपकी सैलरी 40 हजार रुपये है, तो 4 हजार रुपये SIP में डालना शुरू करें। यह रकम शुरुआत में छोटी लग सकती है, लेकिन कंपाउंडिंग का असर लंबी अवधि में चमत्कारी होता है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) और कई वित्तीय शोध यह बताते हैं कि लंबी अवधि में इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड महंगाई को मात देने की क्षमता रखते हैं। एके सिंह के मुताबिक, जैसे-जैसे सैलरी बढ़ती है, निवेश का प्रतिशत 12 या 15 तक ले जाया जा सकता है। 30–35 साल बाद यही छोटी-सी रकम लाखों में बदल जाती है और रिटायरमेंट के समय मजबूत सहारा बनती है।
दूसरा जरूरी कदम है हेल्थ इंश्योरेंस। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में मेडिकल खर्च हर साल औसतन 10 से 12 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। आज मामूली चोट या अचानक सर्जरी भी लाखों रुपये का बिल बना सकती है। एके सिंह कहते हैं कि हेल्थ इंश्योरेंस सिर्फ बीमारी के लिए नहीं, बल्कि दुर्घटना, ऑपरेशन और इमरजेंसी के लिए भी सुरक्षा कवच है। कैशलेस हॉस्पिटल नेटवर्क की वजह से इलाज के वक्त जेब से पैसा नहीं देना पड़ता। डॉक्टरों का भी मानना है कि उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं, ऐसे में पहले से लिया गया हेल्थ इंश्योरेंस न सिर्फ आर्थिक बोझ कम करता है, बल्कि मानसिक तनाव भी घटाता है।
तीसरी और उतनी ही जरूरी चीज है लाइफ इंश्योरेंस। खासकर उन परिवारों के लिए, जहां एक ही व्यक्ति कमाने वाला होता है। भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) के अनुसार, भारत में अभी भी बड़ी आबादी पर्याप्त लाइफ कवर से वंचित है। एके सिंह का कहना है कि लाइफ इंश्योरेंस सिर्फ मौत के बाद का फायदा नहीं है, बल्कि यह परिवार के भविष्य की सुरक्षा है। अगर अचानक कोई हादसा हो जाए, तो पत्नी और बच्चों को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। यह एक तरह से परिवार के लिए जिम्मेदारी निभाने का तरीका है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इस बात पर जोर देते हैं कि वित्तीय सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य आपस में जुड़े हुए हैं। जब व्यक्ति को भविष्य की चिंता कम होती है, तो तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी कम होती हैं। इसलिए रिटायरमेंट प्लानिंग को सिर्फ पैसे से नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य से जोड़कर देखना चाहिए।
निष्कर्ष यही है कि SIP से भविष्य की आय तैयार होती है, हेल्थ इंश्योरेंस मौजूदा और भविष्य के इलाज का खर्च संभालता है और लाइफ इंश्योरेंस परिवार को सुरक्षा देता है। ये तीनों मिलकर एक मजबूत सुरक्षा चक्र बनाते हैं, जिससे नौकरी के बाद का जीवन भी आत्मनिर्भर और सम्मानजनक बन सकता है।
Final Thoughts
आज के दौर में रिटायरमेंट सिर्फ नौकरी खत्म होने का नाम नहीं है, बल्कि एक नए जीवन चरण की शुरुआत है। अगर इस दौर में आर्थिक असुरक्षा हो, तो पूरी जिंदगी की मेहनत बोझ बन सकती है। एके सिंह की सलाह इस लिहाज से अहम है कि वह किसी जटिल या जोखिम भरी योजना की नहीं, बल्कि अनुशासित आदतों की बात करते हैं। SIP जैसी छोटी शुरुआत लंबी अवधि में बड़ा परिणाम देती है, हेल्थ इंश्योरेंस अचानक आने वाले खर्चों से बचाता है और लाइफ इंश्योरेंस परिवार को सुरक्षा देता है।
स्वास्थ्य और वित्त विशेषज्ञों की राय भी यही है कि जितनी जल्दी प्लानिंग शुरू की जाए, उतना ही बेहतर परिणाम मिलता है। 25 या 30 की उम्र में लिया गया फैसला 60 के बाद की जिंदगी की दिशा तय कर सकता है। इसलिए रिटायरमेंट को दूर की चिंता मानकर टालने के बजाय आज से ही तैयारी करना समझदारी है। यह न सिर्फ आर्थिक स्वतंत्रता देता है, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है।

