ग्वालियर: प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट का मीडिया पर फूटा गुस्सा; बदहाल सड़कों और 'महाराज' से जुड़े सवाल पर बोले- 'यह अधिकार मैं किसी को नहीं देता'
पॉलिटिकल डेस्क, ग्वालियर | मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और ग्वालियर जिले के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट एक बार फिर अपने सख्त तेवरों के कारण चर्चा में हैं। गुरुवार को ग्वालियर दौरे पर पहुंचे मंत्री जी उस समय मीडिया कर्मियों पर बिफर गए, जब उनसे शहर की बदहाल व्यवस्था और उनकी (मंत्री की) अनुपस्थिति को लेकर सवाल पूछे गए। मंत्री ने स्पष्ट लहजे में कह दिया कि उनसे इस तरह के सवाल पूछने का अधिकार वह किसी को नहीं देते हैं।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट गुरुवार को ग्वालियर में अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक लेने पहुंचे थे। बैठक के बाद जब वे मीडिया से रूबरू हुए, तो पत्रकारों ने शहर की ज्वलंत समस्याओं, विशेषकर टूटी हुई सड़कों और प्रशासनिक सुस्ती को लेकर सवाल दाग दिए।
विवाद तब बढ़ा जब एक मीडिया कर्मी ने सवाल पूछा: "आप इन बुनियादी मुद्दों पर कोई बात नहीं करते, लेकिन जब 'महाराज' (ज्योतिरादित्य सिंधिया) का ग्वालियर दौरा होता है, आप तभी यहाँ क्यों दिखाई देते हैं?"
मंत्री का जवाब: "अपना चार्ट सुधारें"
यह सवाल सुनते ही मंत्री तुलसी सिलावट का पारा चढ़ गया। उन्होंने मीडिया कर्मी को बीच में टोकते हुए कहा:
"एक बात सुनो, अपने संज्ञान के लिए साल भर का चार्ट निकाल लेना और फिर बात करना। प्रभारी मंत्री कितनी बार आता है, यह रिकॉर्ड में है। आप प्रभारी मंत्री को निर्देश नहीं दे सकते। मैं आपसे सहमत हूँ कि आप मुझे समस्याओं से अवगत कराएं, आप एक जागरूक पत्रकार हैं, लेकिन आपकी यह भाषा सही नहीं है।"
उन्होंने आगे कड़े शब्दों में कहा:
"यह अधिकार मैं किसी को नहीं देता हूँ। मेरा लेखा-जोखा मेरी पार्टी रखती है, मेरी सरकार रखती है। मैं आपको फिर बता दूँ कि समस्याओं के समाधान के लिए सरकार सजग थी, सजग है और सजग रहेगी।"
ग्वालियर की बदहाल सड़कें: विवाद की जड़
गौरतलब है कि ग्वालियर में पिछले काफी समय से सड़कों की हालत अत्यंत दयनीय बनी हुई है। शहर की मुख्य सड़कों पर गड्ढों और धूल के कारण आम जनता में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि केवल विशेष आयोजनों या बड़े नेताओं के आगमन पर ही सक्रिय नजर आते हैं।
प्रभारी मंत्री के इस बयान के बाद विपक्ष ने भी उन पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि जनता के सवालों का जवाब देने के बजाय सत्ता पक्ष के मंत्री अहंकार भरी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं।
संपादकीय विश्लेषण
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि और मीडिया के बीच संवाद एक आवश्यक कड़ी है। प्रभारी मंत्री का यह कहना कि 'लेखा-जोखा केवल सरकार या पार्टी रखेगी', संवैधानिक रूप से जनता के प्रति जवाबदेही को कमतर आंकने जैसा प्रतीत होता है। ग्वालियर जैसी ऐतिहासिक नगरी की बदहाल सड़कों पर सवाल पूछना मीडिया का धर्म है, और उन सवालों पर संयम खोना सत्ता के गलियारों में बढ़ती बेचैनी को दर्शाता है।
सोशल मीडिया (Tweet)
🔥 ग्वालियर में गरमाया माहौल! प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट का मीडिया पर फूटा गुस्सा। जब पूछा गया खराब सड़कों और 'महाराज' के दौरों पर सवाल, तो बोले- "मुझसे यह पूछने का अधिकार किसी को नहीं।" ⚖️🚩 #Gwalior #TulsiSilawat #MPNews #Scindia #Politics #BreakingNews
