India-US Trade Deal: टेक्सटाइल सेक्टर को मिल सकती है ज़ीरो टैरिफ राहत, पीयूष गोयल का बड़ा संकेत
नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से भारत को मिल रही रियायतों के बीच केंद्रीय वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal ने बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को भी वही लाभ मिल सकते हैं, जो अमेरिका ने बांग्लादेश को दिए हैं। अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद भारतीय कपड़ा निर्यातकों को शून्य अमेरिकी टैरिफ (Zero US Tariff) का फायदा मिलने की उम्मीद है।
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब Donald Trump प्रशासन द्वारा जारी फैक्टशीट में भारत के लिए कुछ शर्तों में ढील की खबर सामने आई है। भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में सक्रिय भूमिका निभा रहे गोयल ने संकेत दिया कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और टेक्सटाइल सेक्टर को प्रतिस्पर्धी बढ़त मिल सकती है।
टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए यह राहत अहम मानी जा रही है, क्योंकि अमेरिका-बांग्लादेश समझौते के बाद भारतीय निर्यातकों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा था। भारत का टेक्सटाइल और गारमेंट निर्यात अमेरिकी बाजार में बड़ा हिस्सा रखता है, ऐसे में टैरिफ छूट से लागत घटेगी और ऑर्डर बढ़ने की संभावना बनेगी।
राजनीतिक स्तर पर भी इस डील को लेकर बयानबाजी तेज है। कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi ने इसे अमेरिका के सामने “आत्मसमर्पण” करार दिया था। इस पर पलटवार करते हुए गोयल ने कहा कि संसद में यह कहना कि बांग्लादेश को भारत से ज्यादा फायदा मिला है, तथ्यात्मक रूप से गलत है।
सरकार का दावा है कि अंतिम समझौते में भारत के रणनीतिक हितों को प्राथमिकता दी जाएगी। टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिनिधियों ने भी उम्मीद जताई है कि यदि ज़ीरो टैरिफ लागू होता है तो निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
Our Final Thoughts
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता केवल टैरिफ में कटौती का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की स्थिति को मजबूत करने का अवसर भी है। टेक्सटाइल सेक्टर देश के सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं में से एक है, और अमेरिका इसका प्रमुख निर्यात बाजार रहा है। यदि ज़ीरो टैरिफ की सुविधा मिलती है, तो भारतीय निर्यातकों को लागत प्रतिस्पर्धा में स्पष्ट बढ़त मिल सकती है।
हालांकि, किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते का मूल्यांकन केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि उसके वास्तविक आर्थिक प्रभाव से होना चाहिए। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि समझौते की अंतिम शर्तें क्या होंगी और उनका जमीनी असर कितना व्यापक होगा।
सरकार के दावों और विपक्ष की आलोचनाओं के बीच, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या यह डील भारत के उद्योग, किसानों और कामगारों के हित में ठोस लाभ सुनिश्चित कर पाती है।
