साल 2026 का ग्रहण कैलेंडर: जानें कब लगेगा 'Ring of Fire' और कब होगा साल का पहला चंद्र ग्रहण; क्या पड़ेगा भारत पर असर?
नेशनल डेस्क | सनातन परंपरा और खगोल विज्ञान में ग्रहण का एक विशेष स्थान है। वर्ष 2026 धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है, क्योंकि इस साल कुल चार ग्रहण लगने वाले हैं—दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण। इनमें से पहला सूर्य ग्रहण फरवरी माह में ही लगने जा रहा है, जिसे लेकर विशेषज्ञों और आम लोगों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है।
2026 के प्रमुख ग्रहण: तिथियां और विवरण
1. पहला सूर्य ग्रहण – 17 फरवरी 2026 (मंगलवार)
यह एक वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण होगा, जो फाल्गुन अमावस्या के दिन लगेगा।
- खगोलीय घटना: इस दौरान चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को ढक लेता है, जिससे सूर्य के किनारों पर एक चमकदार अंगूठी जैसी आकृति बनती है। इसे विज्ञान की भाषा में “Ring of Fire” कहा जाता है।
- दृश्यता: यह ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों और अंटार्कटिका में दिखाई देगा।
- भारत पर असर: यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा, इसलिए यहाँ इसका धार्मिक प्रभाव और सूतक काल मान्य नहीं रहेगा।
2. पहला चंद्र ग्रहण – 3 मार्च 2026 (मंगलवार)
यह एक पूर्ण (Total) चंद्र ग्रहण होगा, जो फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लग रहा है। संयोगवश यह समय होलिका दहन के आसपास का है।
- दृश्यता: यह ग्रहण भारत के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में आंशिक या पूर्ण रूप से दिखाई दे सकता है।
- सूतक काल: भारत में दिखाई देने के कारण यहाँ सूतक काल लागू होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है।
3. साल का दूसरा सूर्य ग्रहण – 12 अगस्त 2026
अगस्त में लगने वाला यह सूर्य ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा। साल के अंत तक एक और चंद्र ग्रहण की स्थिति बनेगी, जिसका विवरण स्थानीय पंचांगों के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकता है।
एक महीने में दो ग्रहण: ज्योतिषीय विश्लेषण
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब एक ही महीने के अंतराल में दो ग्रहण (सूर्य और चंद्र) पड़ते हैं, तो वह समय काफी संवेदनशील माना जाता है।
- वैश्विक प्रभाव: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ऐसी अवधि में आर्थिक बाजारों में अस्थिरता, राजनीतिक हलचल और सामाजिक असंतोष की स्थितियां बन सकती हैं।
- प्राकृतिक घटनाएँ: कई विद्वान इस अवधि में प्राकृतिक आपदाओं की आशंका पर भी चर्चा करते हैं, हालांकि वैज्ञानिक इसे शुद्ध रूप से एक खगोलीय घटना मानते हैं।
ग्रहण काल: क्या करें और क्या न करें?
सनातन परंपरा के अनुसार, ग्रहण के दौरान शरीर और मन की शुद्धि के लिए कुछ नियमों का पालन किया जाता है:
- क्या करें: मंत्र जाप, ध्यान, दान-पुण्य और ग्रहण समाप्ति के बाद पवित्र स्नान को शुभ माना जाता है। सात्विक जीवनशैली अपनाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
- क्या न करें: ग्रहण के दौरान भोजन पकाने, शुभ कार्यों की शुरुआत करने या यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
- विशेष सावधानी: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गर्भवती महिलाओं को ग्रहण की छाया से बचने की सलाह दी जाती है, हालांकि यह पूर्णतः व्यक्तिगत श्रद्धा और परंपरा पर आधारित है।
संपादकीय विश्लेषण
वर्ष 2026 की शुरुआत ही खगोलीय घटनाओं के लिहाज से काफी हलचल भरी है। फरवरी और मार्च के बीच सूर्य और चंद्र ग्रहण का यह क्रम न केवल खगोल प्रेमियों के लिए शोध का विषय है, बल्कि धार्मिक हलकों में भी चर्चा का केंद्र है। भारत में चंद्र ग्रहण की दृश्यता इसे आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। ऐसे समय में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन बनाए रखना ही श्रेयस्कर है।
