8वाँ वेतन आयोग: केंद्रीय कर्मचारियों की लगी लॉटरी; 1 जनवरी 2026 से लागू होगी नई सैलरी, जानें कितना मिलेगा बकाया एरियर
नेशनल डेस्क, नई दिल्ली | देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए खुशियों की दस्तक सुनाई देने लगी है। केंद्र सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद अब सबसे बड़ी चर्चा वेतन में होने वाली संभावित बढ़ोतरी और मिलने वाले 'एरियर' (Arrears) को लेकर है। यदि सरकार की योजना के अनुसार इसे 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाता है, तो साल 2027 में इसके क्रियान्वयन के साथ ही कर्मचारियों के खातों में भारी-भरकम राशि जमा हो सकती है।
8वें वेतन आयोग का औपचारिक आगाज
केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को एक आधिकारिक संकल्प के जरिए 8वें वेतन आयोग के गठन की अधिसूचना जारी की थी। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह आयोग अब पूरी तरह अस्तित्व में आ चुका है। 7वें वेतन आयोग के लागू होने के लगभग दस साल बाद यह नया आयोग केंद्रीय कर्मचारियों, रक्षा कर्मियों और पेंशनभोगियों के जीवन स्तर में सुधार लाने के उद्देश्य से बनाया गया है।
एरियर का गणित: कब और कितना मिलेगा पैसा?
आयोग की सिफारिशें तकनीकी रूप से 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है। हालांकि, रिपोर्ट तैयार करने और उसे कैबिनेट की मंजूरी मिलने में समय लगता है। जानकारों का मानना है कि इसे 2027 के मध्य तक जमीन पर उतारा जा सकता है।
- बकाया अवधि: यदि इसे जुलाई 2027 में लागू किया जाता है, तो कर्मचारियों को 18 महीने का एरियर मिलेगा।
- प्रभाव: इसका मतलब है कि 1 जनवरी 2026 से लेकर वास्तविक भुगतान की तारीख तक के पुराने और नए वेतन के बीच का पूरा अंतर सरकार एकमुश्त (Lump sum) देगी।
वेतन में वृद्धि और एरियर का संभावित हिसाब
विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को
संभावित एरियर (स्तर के अनुसार):
- लेवल-1 कर्मचारी: अनुमानित
$3.60$ लाख से$5.65$ लाख रुपये तक का एरियर। - लेवल-2 कर्मचारी: लगभग
$3.98$ लाख से$6.25$ लाख रुपये तक की बकाया राशि। - लेवल-4 कर्मचारी: लगभग
$5.10$ लाख से$8.01$ लाख रुपये तक का भारी-भरकम भुगतान।
नोट: ये आंकड़े संभावित गणनाओं पर आधारित हैं। अंतिम राशि आयोग की सिफारिशों और सरकार की अंतिम स्वीकृति पर निर्भर करेगी।
एरियर की गणना कैसे होती है?
एरियर निकालने की प्रक्रिया काफी पारदर्शी है:
- वेतन अंतर: सबसे पहले कर्मचारी की पुरानी बेसिक सैलरी और नई प्रस्तावित बेसिक सैलरी के बीच का अंतर निकाला जाता है।
- महीनों की संख्या: इस अंतर को उन महीनों की संख्या से गुणा किया जाता है जितने समय से वेतन वृद्धि लंबित है।
- महंगाई भत्ता (DA) का लाभ: चूंकि डीए बेसिक सैलरी के आधार पर तय होता है, इसलिए नई बेसिक बढ़ने से डीए का अंतर भी एरियर की कुल राशि में जुड़ जाता है।
महंगाई के दौर में बड़ी राहत
लगातार बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत को देखते हुए केंद्रीय कर्मचारी लंबे समय से वेतन संशोधन की मांग कर रहे थे। 8वें वेतन आयोग के गठन ने यह साफ कर दिया है कि सरकार इस दिशा में गंभीर है। इस कदम से न केवल कर्मचारियों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) बढ़ेगी, बल्कि अर्थव्यवस्था में भी नकदी का प्रवाह बढ़ेगा।
संपादकीय विश्लेषण
8वें वेतन आयोग का गठन समय की मांग थी। हालांकि, सरकार पर इसका वित्तीय बोझ (Fiscal burden) काफी अधिक होगा, लेकिन लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिरता के लिए यह आवश्यक है। एरियर की एकमुश्त राशि कर्मचारियों के लिए भविष्य की बचत या बड़े खर्चों (जैसे घर या शिक्षा) के लिए एक बड़ा आधार बनेगी। अब सबकी निगाहें आयोग की पहली अंतरिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।
