स्पैम कॉल्स का होगा 'द एंड'? TRAI ला रहा है AI वाला नया नियम; 10 दिन तक संदिग्ध पाए जाने पर नंबर होगा सीधा ब्लॉक
टेक डेस्क, नई दिल्ली | अनचाही कॉल्स और फर्जी संदेशों (Spam Calls & Messages) से परेशान मोबाइल यूजर्स के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) अब स्पैम नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दायरा बढ़ाने जा रहा है। TRAI के एक नए और सख्त प्रस्ताव के मुताबिक, अब स्पैमर्स के खिलाफ कार्रवाई के लिए किसी यूजर की शिकायत का इंतजार नहीं किया जाएगा। यदि एआई टूल्स को किसी नंबर का व्यवहार संदिग्ध लगता है, तो उस पर गाज गिरनी तय है।
क्या है नया '10 दिन' वाला नियम?
TRAI का यह प्रस्ताव मौजूदा व्यवस्था से काफी अलग और सख्त है:
- मौजूदा नियम: वर्तमान में किसी नंबर पर कार्रवाई तब होती है जब 10 दिनों के भीतर उसके खिलाफ कम से कम 5 अलग-अलग शिकायतें दर्ज हों।
- नया प्रस्ताव: नए नियम के तहत, अगर टेलीकॉम कंपनियों का एआई सिस्टम किसी नंबर को लगातार 10 दिनों तक 'स्पैम' के रूप में फ्लैग (Flag) करता है, तो उस नंबर की सर्विस तुरंत बंद (Disconnect) की जा सकती है। इसके लिए किसी मानवीय शिकायत की जरूरत नहीं होगी।
टेलीकॉम कंपनियों (Jio, Airtel, Vi) की चिंता
रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों ने इस प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति और चिंताएं दर्ज कराई हैं। उनका तर्क व्यावहारिक समस्याओं पर आधारित है:
- एआई की सटीकता: कंपनियों का कहना है कि एआई हमेशा 100% सटीक नहीं होता। इसमें 'फॉल्स पॉजिटिव' (False Positive) का खतरा रहता है।
- असली यूजर्स पर असर: कई बार डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर या सेल्स एजेंट अपने काम के सिलसिले में अनजान नंबरों पर लगातार कॉल करते हैं। एआई उन्हें भी स्पैमर मान सकता है।
- दोबारा चालू करने की प्रक्रिया: अगर किसी असली यूजर का नंबर गलती से बंद हो गया, तो उसे दोबारा शुरू कराने के लिए री-केवाईसी (Re-KYC) और लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा, जो ग्राहकों के लिए बेहद कष्टदायक होगा।
TRAI का रुख: संतुलन बनाने की कोशिश
इन चिंताओं के बीच TRAI के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा है कि यह कदम अभी केवल एक 'प्रस्ताव' है। रेगुलेटर फिलहाल सभी स्टेकहोल्डर्स (कंपनियों और उपभोक्ता संगठनों) के साथ चर्चा कर रहा है।
"हमारा उद्देश्य एक ऐसा 'बैलेंस' बनाना है जिससे स्पैम भी रुके और आम जनता या जरूरी काम करने वाले लोगों को कोई असुविधा भी न हो।"
संपादकीय विश्लेषण
TRAI का यह कदम डिजिटल इंडिया की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि साइबर ठगी की शुरुआत अक्सर इन्हीं स्पैम कॉल्स से होती है। एआई का उपयोग निश्चित रूप से प्रक्रिया को तेज करेगा, लेकिन टेलीकॉम कंपनियों की चिंताएं भी जायज हैं। एक डिलीवरी एजेंट का नंबर ब्लॉक होना उसकी आजीविका को प्रभावित कर सकता है। अतः एआई सिस्टम में 'व्हाइटलिस्टिंग' (Whitelisting) का प्रावधान होना चाहिए ताकि जरूरी सेवाओं से जुड़े नंबर सुरक्षित रहें। तकनीक का उपयोग सुविधा के लिए होना चाहिए, न कि नई मुसीबत खड़ी करने के लिए।
