तिर्यक ताड़ासन से दूर होगी कमर की जकड़न, बढ़ेगी ऊर्जा और एकाग्रता, जानिए सही तरीका और फायदे
गड़बड़ और अव्यवस्थित दिनचर्या आज के समय में कई शारीरिक और मानसिक परेशानियों की बड़ी वजह बन चुकी है। लगातार बैठकर काम करना, तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी शरीर को धीरे-धीरे कमजोर कर देती है। ऐसे में योग एक ऐसा माध्यम है, जो शरीर और मन दोनों को संतुलन में लाने में मदद करता है। तिर्यक ताड़ासन भी उन्हीं प्रभावी योगासनों में से एक है, जो नियमित अभ्यास से संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
योग के माध्यम से स्वस्थ जीवन जीने को लेकर मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा लगातार लोगों को जागरूक कर रहा है। संस्थान के अनुसार तिर्यक ताड़ासन, जिसे उर्ध्व हस्तोतानासन भी कहा जाता है, ताड़ासन का ही विस्तारित रूप है। यह एक सरल लेकिन प्रभावशाली खड़े होकर किया जाने वाला आसन है, जिसमें शरीर को दाईं और बाईं ओर झुकाकर स्ट्रेच दिया जाता है। इस आसन में सही मुद्रा और सजगता बेहद जरूरी मानी जाती है।
तिर्यक ताड़ासन के अभ्यास के लिए सबसे पहले ताड़ासन की स्थिति में खड़े होना चाहिए। पैर कंधों की चौड़ाई में रखें और शरीर को पूरी तरह सीधा रखें। इसके बाद गहरी सांस भरते हुए दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाकर हथेलियों को ऊपर की ओर रखते हुए सिर के ऊपर उठाएं। कोहनियां पूरी तरह सीधी रहें। अब सांस छोड़ते हुए कमर से धीरे-धीरे बाईं या दाईं ओर झुकें। इस अवस्था में 10 से 30 सेकंड तक रुककर सामान्य रूप से सांस लेते रहें। फिर वापस सीधी स्थिति में आएं और दूसरी ओर यही प्रक्रिया दोहराएं। इसे 3 से 5 बार तक किया जा सकता है।
नियमित अभ्यास से यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और कमर दर्द व साइड की जकड़न को कम करने में मदद करता है। पेट और आंतों पर हल्की मालिश होने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। कंधे, बगल, छाती और हाथों की मांसपेशियां अच्छी तरह स्ट्रेच होती हैं, जिससे उनमें मजबूती आती है। फेफड़ों की क्षमता बढ़ने से सांस लेना आसान होता है और शरीर में ऊर्जा का स्तर बेहतर होता है। मानसिक रूप से यह आसन एकाग्रता बढ़ाने और तनाव कम करने में सहायक माना जाता है। लगातार अभ्यास से कमर की अतिरिक्त चर्बी घटाने में भी मदद मिलती है।
हालांकि विशेषज्ञ कुछ सावधानियां बरतने की सलाह भी देते हैं। तिर्यक ताड़ासन का अभ्यास सुबह खाली पेट करना बेहतर माना जाता है। झुकते समय शरीर को आगे या पीछे न ले जाएं, केवल साइड की ओर स्ट्रेच बनाए रखें। गति धीमी रखें और सांस के साथ तालमेल बनाए रखें। जिन लोगों को गर्दन, कमर या कंधे में गंभीर दर्द, हर्निया, उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी समस्या है या हाल ही में सर्जरी हुई है, उन्हें यह आसन करने से पहले योग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
नियमित और सही तरीके से किया गया तिर्यक ताड़ासन शरीर को लचीला, मजबूत और मन को शांत रखने में अहम भूमिका निभा सकता है, जो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बेहद जरूरी है।
