रमजान 2026: 19 फरवरी से शुरू हो सकता है इबादत का मुकद्दस सफर; जानें क्या है सहरी, इफ्तार और ईद की संभावित तारीखें
लखनऊ डेस्क | फिजाओं में रूहानियत, मस्जिदों में गूंजती कुरान की तिलावत और शाम ढलते ही इफ्तार की सोंधी खुशबू... वह मुबारक महीना करीब आ रहा है जिसका पूरी दुनिया के करोड़ों मुसलमानों को बेसब्री से इंतजार रहता है। साल 2026 का रमजान शरीफ न केवल इबादत का वक्त है, बल्कि यह सब्र, शुक्र और आपसी भाईचारे का भी पैगाम लेकर आ रहा है।
लखनऊ की ऐतिहासिक टीले वाली मस्जिद के शाही इमाम, मौलाना सैय्यद फ़ज़लुल्ल मन्नान रहमानी ने इस पवित्र महीने से जुड़े विभिन्न पहलुओं और इसकी संभावित तारीखों पर विस्तार से रोशनी डाली है।
19 फरवरी से शुरू हो सकता है 'सब्र का सफर'
इस्लामिक हिजरी कैलेंडर के अनुसार, रमजान नौवां और सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस महीने की शुरुआत पूरी तरह से चांद के दीदार (Crescent sighting) पर निर्भर करती है।
मौलाना रहमानी के अनुसार, खगोलीय गणनाओं और कैलेंडर के आधार पर संभावना है कि 19 फरवरी 2026 को पहला रोजा रखा जाए। यदि 18 फरवरी की शाम को शाबान का चांद नजर आता है, तो उसी रात से मस्जिदों में 'तरावीह' की विशेष नमाज शुरू हो जाएगी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला चांद दिखने के बाद ही लिया जाएगा।
कब मनेगी 'मीठी ईद'? (Eid-ul-Fitr 2026)
रमजान का महीना या तो 29 दिन का होता है या 30 दिन का। पूरे महीने की कठिन इबादत के बाद शव्वाल महीने की पहली तारीख को ईद-उल-फित्र मनाई जाती है।
- संभावित तारीख: यदि रमजान 19 फरवरी से शुरू होता है, तो भारत में 20 या 21 मार्च 2026 को ईद का जश्न मनाया जा सकता है।
- महत्व: मौलाना के शब्दों में, "यह दिन न केवल खुशियों का है, बल्कि अल्लाह के शुक्राने और एक-दूसरे के गले मिलकर गिले-शिकवे दूर करने का त्योहार है।"
सहरी और इफ्तार: रूहानी ऊर्जा का आधार
रमजान में 'सहरी' (सूरज निकलने से पहले का भोजन) और 'इफ्तार' (सूरज ढलने के बाद रोजा खोलना) का विशेष महत्व है। मौलाना रहमानी बताते हैं कि ये केवल खान-पान के समय नहीं हैं, बल्कि ये अल्लाह से जुड़ने के पल हैं।
सहरी: इसे सुन्नत माना गया है और यह दिन भर रोजा रखने के लिए शारीरिक शक्ति प्रदान करती है।
इफ्तार: खजूर और पानी से रोजा खोलना रूहानी सुकून देता है। इस दौरान की जाने वाली दुआएं विशेष रूप से कुबूल होती हैं।मौलाना का संदेश: इबादत और इंसानियत
मौलाना सैय्यद फ़ज़लुल्ल मन्नान रहमानी ने जोर दिया कि रमजान का मकसद केवल भूखा-प्यासा रहना नहीं है। यह महीना हमें सिखाता है कि हम अपनी जुबान, आंखों और हाथों से किसी को दुख न पहुंचाएं। जकात (दान) के जरिए गरीबों की मदद करना इस महीने की रूह है।
संपादकीय विश्लेषण
रमजान 2026 का महीना फरवरी और मार्च की सुहानी ठंड के बीच आएगा, जिससे रोजेदारों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। लखनऊ जैसे शहरों में, जहां गंगा-जमुनी तहजीब की जड़ें गहरी हैं, टीले वाली मस्जिद जैसे ऐतिहासिक केंद्रों से निकलने वाला भाईचारे का संदेश पूरे समाज को जोड़ने का काम करता है। यह महीना आत्म-चिंतन और समाज के वंचित वर्गों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का एक सुनहरा अवसर है
