शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 859 अंक टूटा, निवेशकों के 9 लाख करोड़ स्वाहा; जानें गिरावट के 4 बड़े कारण और आगे की राह
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली | भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला कुछ समय किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा है। ग्लोबल बाजारों में मची अफरा-तफरी और विशेष रूप से आईटी (IT) शेयरों में आई सुनामी ने दलाल स्ट्रीट पर हड़कंप मचा दिया है। महज दो कारोबारी सत्रों के भीतर निवेशकों की करीब
बाजार का मौजूदा हाल (ताजा आंकड़े)
खबर लिखे जाने तक बाजार की स्थिति कुछ इस प्रकार थी:
- सेंसेक्स (Sensex):
$82,815.14$ के स्तर पर (करीब$859$ अंक या$1.03\%$ की गिरावट) - निफ्टी (Nifty):
$25,542$ के स्तर पर ($265.20$ अंक की गिरावट) - मार्केट कैप: बुधवार को BSE का मार्केट कैप
$474$ लाख करोड़ रुपए था, जो अब घटकर लगभग$465$ लाख करोड़ रुपए रह गया है।
गिरावट के पीछे के 4 प्रमुख कारण
1. आईटी सेक्टर में 'ग्लोबल' बिकवाली
आईटी सेक्टर में वैश्विक स्तर पर कमजोरी का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा। अमेरिका के टेक और AI स्टॉक्स में बिकवाली की जो आशंका जताई जा रही थी, वह अब हकीकत बनती दिख रही है। Nasdaq Composite में
2. मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव
जियोपॉलिटिकल टेंशन ने अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को लेकर दी गई चेतावनी—कि यदि न्यूक्लियर डील पर सहमति नहीं बनती तो सख्त कदम उठाए जाएंगे—ने निवेशकों को सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख करने पर मजबूर कर दिया है।
3. डॉलर की मजबूती और रुपए की कमजोरी
डॉलर इंडेक्स (
4. प्रॉफिट बुकिंग का दबाव
बाजार पिछले कुछ समय से अपने ऑल-टाइम हाई के करीब था। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचे स्तरों पर 'प्रॉफिट बुकिंग' (मुनाफावसूली) स्वाभाविक थी। Geojit Investments के डॉ. वी.के. विजयकुमार के अनुसार, बाजार फिलहाल उथल-पुथल के दौर में है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की रणनीति
बाजार के जानकारों का मानना है कि गिरावट का यह दौर खरीदारी का अवसर भी हो सकता है, लेकिन केवल उन शेयरों में जिनका फंडामेंटल मजबूत है।
- निवेशकों के लिए सलाह: घबराहट में आकर पैनिक सेलिंग (Panic Selling) न करें।
- अगला सपोर्ट लेवल: निफ्टी के लिए
$25,300$ -$25,400$ का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट की तरह काम कर सकता है।
संपादकीय विश्लेषण
यह गिरावट केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक 'करेक्शन' का हिस्सा है। आईटी शेयरों पर अत्यधिक निर्भरता भारतीय बाजार के लिए इस समय जोखिम भरी साबित हो रही है। निवेशकों को सलाह है कि वे अपने पोर्टफोलियो में विविधता (Diversification) लाएं और केवल उन्हीं कंपनियों में निवेश करें जिनकी अर्निंग विजिबिलिटी स्पष्ट हो।
