नेशनल डेस्क। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी की गई कुख्यात फाइनेंसर Jeffrey Epstein से जुड़ी फाइलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। इन लाखों पन्नों के दस्तावेजों में रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin का नाम कम से कम 1005 बार सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से अधिकांश उल्लेख मीडिया रिपोर्ट्स और न्यूज क्लिपिंग्स से जुड़े हैं, जो एपस्टीन को भेजी जाती थीं, लेकिन कुछ ईमेल्स में पुतिन से संपर्क या मुलाकात कराने की कोशिशों का जिक्र भी मिला है।
हालांकि, दस्तावेजों में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि एपस्टीन और पुतिन के बीच कभी वास्तविक मुलाकात हुई थी। इसके बावजूद, इन खुलासों ने हनीट्रैप और अंतरराष्ट्रीय जासूसी से जुड़ी अटकलों को तेज कर दिया है। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि एपस्टीन रूसी अधिकारियों, पूर्व राजदूतों और रूस की खुफिया एजेंसी एफएसबी से जुड़े लोगों से संपर्क बनाने की कोशिश करता रहा था।
जारी फाइलों के अनुसार, एपस्टीन न्यूयॉर्क में रूस के पूर्व राजदूत Vitaly Churkin से नियमित रूप से मुलाकात करता था। इतना ही नहीं, उसने चर्किन के बेटे मैक्सिम को न्यूयॉर्क की एक प्रमुख वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी में नौकरी दिलाने का प्रस्ताव भी दिया था। वर्ष 2017 में चर्किन की अचानक मौत के बाद एपस्टीन ने रूस के साथ अपने संपर्क बनाए रखने के लिए नए रास्ते तलाशने शुरू कर दिए।
रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2018 में एपस्टीन ने नॉर्वे के वरिष्ठ नेता Thorbjørn Jagland को एक ईमेल भेजा था, जो उस समय काउंसिल ऑफ यूरोप के सेक्रेटरी जनरल थे। इस ईमेल में एपस्टीन ने सुझाव दिया था कि जगलैंड, पुतिन से कहें कि रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov उससे संपर्क करें। एपस्टीन ने यह भी लिखा था कि विटाली चर्किन ने उसकी बातों को समझा था और अमेरिकी राजनीति से जुड़े संकेतों को भी ग्रहण किया था। जवाब में जगलैंड ने कहा था कि वह लावरोव के सहायक तक यह बात पहुंचा देंगे।
दस्तावेजों में यह भी सामने आया है कि एपस्टीन के संबंध सर्गेई बेल्याकोव जैसे अधिकारियों से थे, जिनके कथित लिंक एफएसबी से बताए जाते हैं। वह सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में भी शामिल हुआ था और वहां रूसी अधिकारियों को पश्चिमी निवेश आकर्षित करने को लेकर सुझाव देता रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, एपस्टीन ने 2019 तक रूस का वीजा हासिल करने की कोशिशें भी की थीं, लेकिन फिर भी पुतिन से मुलाकात का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।
इन खुलासों के बाद पोलैंड के प्रधानमंत्री Donald Tusk ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पोलैंड, एपस्टीन और रूसी खुफिया एजेंसियों के संभावित संबंधों की औपचारिक जांच शुरू करेगा। टस्क ने दावा किया कि वैश्विक मीडिया में सामने आ रहे सुराग यह संकेत देते हैं कि बाल यौन शोषण से जुड़ा यह घोटाला रूसी खुफिया सेवाओं द्वारा सह-आयोजित हो सकता है।
दूसरी ओर, रूस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता Dmitry Peskov ने इन दावों को बकवास करार देते हुए कहा कि एपस्टीन और रूसी जासूसी से जुड़ी थ्योरी को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे सिद्धांतों पर मजाक किया जा सकता है, लेकिन इन्हें तथ्य के तौर पर देखना समय की बर्बादी है।
फिलहाल, अमेरिकी दस्तावेजों में सामने आए इन खुलासों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। जहां एक ओर पोलैंड जांच की बात कर रहा है, वहीं रूस पूरी तरह इन आरोपों को खारिज कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इन फाइलों के आधार पर किसी ठोस अंतरराष्ट्रीय जांच की दिशा बनती है या यह मामला सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रहता है।
हमरी राय में, एपस्टीन फाइल्स के ये खुलासे कई सवाल जरूर खड़े करते हैं, लेकिन जब तक ठोस सबूत सामने नहीं आते, तब तक इन्हें संदेह और अटकलों के दायरे में ही देखना चाहिए। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच की मांग यह जरूर दिखाती है कि यह मामला अब केवल अतीत का अपराध नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बन चुका है।
