नई दिल्ली : भारतीय रेलवे अब पाकिस्तान सीमा के बेहद करीब पहुंचने की तैयारी में है, जिससे न केवल सीमावर्ती इलाकों की कनेक्टिविटी सुधरेगी बल्कि पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से घेरने में भी मदद मिलेगी। केंद्र सरकार ने कश्मीर घाटी में बारामूला से उरी तक नई रेल लाइन बिछाने की योजना को हरी झंडी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह विस्तार लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास भारतीय सेना की पहुंच को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नए द्वार खोलेगा।
बारामूला से उरी तक नई रेल लाइन: सेना और नागरिकों के लिए संजीवनी
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में पुष्टि की है कि बारामूला से उरी तक के नए रेलवे खंड के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है। अब इसे अंतिम मंजूरी मिलने का इंतजार है। रणनीतिक रूप से संवेदनशील उरी क्षेत्र LoC के ठीक पास स्थित है।
इस रेल लिंक के शुरू होने के बाद भारतीय सेना सड़क मार्ग की तुलना में अधिक तेजी और सुरक्षा के साथ बॉर्डर तक पहुंच सकेगी। विशेष रूप से सर्दियों के मौसम में, जब भारी बर्फबारी के कारण सड़कें अक्सर बंद हो जाती हैं, यह रेलवे लाइन सेना के लिए एक 'लाइफ लाइन' का काम करेगी।
USBRL प्रोजेक्ट का विस्तार और बजट आवंटन
यह नया प्रोजेक्ट उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) का ही एक महत्वपूर्ण विस्तार है। 272 किलोमीटर लंबे इस चुनौतीपूर्ण रेल लिंक ने पहले ही कश्मीर को देश के मुख्य हिस्सों से जोड़ने में सफलता हासिल की है।
जम्मू-कश्मीर के विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का अंदाजा इस साल के रेल बजट से लगाया जा सकता है। वर्ष 2026-27 के रेल बजट में जम्मू-कश्मीर के लिए ₹1,086 करोड़ का आवंटन किया गया है, जो पिछले दशक की तुलना में काफी अधिक है। इसके अतिरिक्त, जम्मू-राजौरी रेल लाइन के लिए भी सर्वे का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है, जिससे पूरा कश्मीर रेल नेटवर्क के दायरे में आ जाएगा।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और सेब बागवानों की चिंताएं
रेलवे का यह विस्तार न केवल सैन्य रसद (logistics) को मजबूत करेगा, बल्कि उरी जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में पर्यटन और व्यापार को भी नई गति देगा। हालांकि, बारामूला-श्रीनगर सेक्शन पर अतिरिक्त लाइनों के प्रस्ताव को लेकर कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। स्थानीय किसानों और सांसदों ने सेब के बागानों को होने वाले संभावित नुकसान पर आपत्ति जताई है, जिस पर रेलवे विचार कर रहा है।
रेलवे का लक्ष्य 2030 तक कश्मीर के कोने- कोने को रेल नेटवर्क से पूरी तरह जोड़ना है। डीपीआर की मंजूरी के बाद निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है, जिसे अगले 4-5 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
TheTrendingPeople.com की राय
बारामूला से उरी तक रेल लाइन का विस्तार भारत की 'बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर' नीति में एक मील का पत्थर है। यह कदम पाकिस्तान के साथ लगती सीमा पर भारत की रक्षात्मक और आक्रामक क्षमता को दोगुना कर देगा। हालांकि, विकास की इस दौड़ में कश्मीरी सेब बागवानों के हितों की रक्षा करना भी सरकार के लिए अनिवार्य है। यदि रेलवे पर्यावरण और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन बनाकर इस प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करता है, तो यह न केवल सामरिक विजय होगी बल्कि घाटी में समृद्धि का एक नया युग भी लेकर आएगी
