हिमाचल बजट सत्र में जल जीवन मिशन पर बड़ा खुलासा, 26 करोड़ रेस्ट हाउस पर खर्च का आरोप
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जल जीवन मिशन (JJM) को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। सदन में खुलासा हुआ कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में 12 रेस्ट हाउस बनाए गए, जिन पर लगभग 26 करोड़ रुपये खर्च किए गए। आरोप है कि यह राशि जल जीवन मिशन के तहत आई थी, जो मूल रूप से पेयजल योजनाओं के लिए स्वीकृत थी।
केंद्र सरकार ने इस खर्च पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि जल जीवन मिशन का धन पीने के पानी की योजनाओं के लिए है, न कि रेस्ट हाउस निर्माण के लिए। इसी कारण 1200 करोड़ रुपये की लंबित राशि रोके जाने की बात सामने आई है।
सदन में क्या बोले मंत्री?
धर्मपुर से कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर ने इस विषय पर प्रश्न उठाया, जिसके जवाब में जल शक्ति मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत हिमाचल के लिए 6395 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, जिनमें से 5167 करोड़ रुपये राज्य को प्राप्त हुए।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार ने मिशन पूर्ण किए बिना ही केंद्र को सूचित कर दिया कि हिमाचल में जल जीवन मिशन का कार्य पूरा हो चुका है। इसके चलते लगभग 1200 करोड़ रुपये की राशि लंबित हो गई। मंत्री ने कहा कि कई योजनाएं अभी अधूरी हैं और इस विषय में केंद्र सरकार से कई बार संवाद किया गया है।
पूर्व मंत्री का कार्यकाल और विवाद
धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व में सात बार विधायक रहे महेंद्र सिंह ठाकुर भाजपा सरकार में जल शक्ति और बागवानी मंत्री रहे हैं। आरोप है कि उनके कार्यकाल में जल जीवन मिशन की राशि से रेस्ट हाउस निर्माण किया गया। हालांकि इस पर पूर्व सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
आरडीजी बंद होने पर भी घमासान
सदन में आरडीजी (राजस्व घाटा अनुदान) बंद होने को लेकर भी तीखी बहस हुई। दून से कांग्रेस विधायक राम कुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा प्रदेश में वित्तीय संकट की स्थिति पैदा कर रही है।
पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि हिमाचल की भौगोलिक स्थिति और कठिनाइयां अभी भी वैसी ही हैं। आरडीजी बंद होना केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का प्रश्न है। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी दल मिलकर प्रधानमंत्री से मिलें और राज्य के हितों के लिए एकजुटता दिखाएं।
राजनीतिक असर और पृष्ठभूमि
जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना है। यदि इस योजना के धन के उपयोग को लेकर अनियमितता साबित होती है, तो यह राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र में उठे इस मुद्दे से सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ सकता है। वहीं केंद्र और राज्य के संबंधों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
हमरी राय
जल जीवन मिशन जैसी बुनियादी योजना से जुड़ा कोई भी विवाद गंभीर है, क्योंकि इसका सीधा संबंध आम लोगों की बुनियादी जरूरतों से है। यदि धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप नहीं हुआ, तो इसकी पारदर्शी जांच जरूरी है।
साथ ही, केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की कमी से विकास योजनाओं पर असर पड़ सकता है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से परे, प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि अधूरी योजनाएं जल्द पूरी हों और जनता को लाभ मिले।