रमजान से पहले अल-अक्सा के इमाम गिरफ्तार, यरूशलम में कड़ी पाबंदियां
यरूशलम। रमजान की शुरुआत से ठीक पहले यरूशलम में तनाव बढ़ गया है। इजरायली पुलिस ने अल-अक्सा मस्जिद के इमाम शेख मोहम्मद अल-अब्बासी को सोमवार शाम मस्जिद परिसर से हिरासत में लिया। फिलिस्तीनी आधिकारिक समाचार एजेंसी वफा (WAFA) के अनुसार, गिरफ्तारी बिना सार्वजनिक कारण बताए की गई और उन्हें मस्जिद में प्रवेश से प्रतिबंधित करने का आदेश भी दिया गया है।
घटना के बाद अल-अक्सा परिसर और पुराने शहर के आसपास सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
आधिकारिक प्रतिक्रिया और सुरक्षा आकलन
इजरायल की ओर से फिलिस्तीन के क्षेत्रों में सरकारी गतिविधियों के समन्वय (COGAT) करने वाली टीम ने कहा कि सुरक्षा आकलन के बाद राजनीतिक नेतृत्व ने रमजान के दौरान टेंपल माउंट/अल-अक्सा मस्जिद परिसर में फिलिस्तीनी नमाजियों की एंट्री के लिए रक्षा प्रतिष्ठान की सिफारिशों को मंजूरी दी है।
हालांकि इमाम की गिरफ्तारी को लेकर विस्तृत आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इजरायली सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है।
हमास की कड़ी निंदा
मंगलवार को हमास ने इस गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की। संगठन ने इसे अल-अक्सा के मामलों में खुला हस्तक्षेप और धार्मिक नेतृत्व पर हमला बताया। हमास ने आरोप लगाया कि इजरायल रमजान की तैयारियों में बाधा डाल रहा है।
इजरायली सरकार ने इन आरोपों पर सीधे तौर पर प्रतिक्रिया नहीं दी है।
रमजान के दौरान प्रवेश पर सख्त नियम
इस वर्ष रमजान के दौरान प्रवेश को लेकर सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, वेस्ट बैंक से आने वाले पुरुषों के लिए 55 वर्ष और महिलाओं के लिए 50 वर्ष की आयु सीमा तय की गई है। जुमे की नमाज के लिए केवल 10,000 श्रद्धालुओं को अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया है।
फिलिस्तीनी अधिकारियों का आरोप है कि मस्जिद परिसर में टेंट और मेडिकल क्लिनिक जैसी बुनियादी सुविधाओं की तैयारियों को भी रोका गया है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि पुराने शहर के प्रवेश मार्गों पर सुरक्षा जांच बढ़ा दी गई है और अतिरिक्त बैरिकेड लगाए गए हैं।
पृष्ठभूमि: संवेदनशील स्थल और पूर्व घटनाएं
अल-अक्सा मस्जिद इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल है और लंबे समय से इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष का केंद्र रहा है। पिछले वर्षों में भी रमजान के दौरान प्रवेश प्रतिबंधों और सुरक्षा कार्रवाइयों को लेकर तनाव बढ़ा है, जिससे कई बार झड़पें हुईं।
विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक अवसरों पर सुरक्षा उपायों और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण रहता है।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय असर
मुस्लिम देशों और संगठनों की ओर से इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। हमास ने अरब लीग और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) से हस्तक्षेप की अपील की है।
क्षेत्र में किसी भी प्रकार की हिंसक झड़प से व्यापक क्षेत्रीय असर पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब पहले से ही तनाव उच्च स्तर पर है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
हमरी राय
यरूशलम और अल-अक्सा परिसर की संवेदनशीलता को देखते हुए किसी भी कार्रवाई का व्यापक असर पड़ सकता है। सुरक्षा आवश्यकताओं और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत जरूरी है।
रमजान जैसे पवित्र अवसर पर संवाद और संयम की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को जिम्मेदारी और धैर्य के साथ आगे बढ़ना होगा।