लोकतंत्र के मंदिर में 'मर्यादा' तार-तार—8 विपक्षी सांसद पूरे सत्र के लिए सस्पेंड, आसन पर पर्चे फेंकने की मिली सजा, राहुल के 'चीन वाले खुलासे' पर नहीं थमा बवाल
नई दिल्ली, दिनांक: 3 फरवरी 2026 — संसद का बजट सत्र, जिसे देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला माना जाता है, अपने दूसरे दिन ही अभूतपूर्व हंगामे और कड़वाहट की भेंट चढ़ गया। मंगलवार को लोकसभा के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव ने उस समय एक बेहद गंभीर और अनुशासनहीन मोड़ ले लिया, जब आसन (Chair) की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप में कांग्रेस और विपक्ष के कुल 8 सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित (Suspend) कर दिया गया। यह कार्रवाई संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव के बाद की गई। इस निलंबन की पृष्ठभूमि में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का वह भाषण रहा, जिसमें उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे के संस्मरणों का हवाला देकर सरकार की चीन नीति को घेरने की कोशिश की थी।
सदन में मंगलवार को भी वही तल्खी देखने को मिली जो सोमवार को शुरू हुई थी। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने एक बार फिर जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' का जिक्र छेड़ दिया। उन्होंने चीन और पाकिस्तान के गठजोड़ को राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम मुद्दा बताते हुए सरकार से जवाब मांगा। जैसे ही उन्होंने किताब के अंश पढ़ना शुरू किया, सत्ता पक्ष ने नियमों का हवाला देकर जोरदार आपत्ति जताई। ट्रेजरी बेंच का कहना था कि अप्रकाशित और असत्यापित दस्तावेजों को सदन में नहीं रखा जा सकता। इस दौरान सदन में शोर-शराबा चरम पर पहुंच गया। विपक्ष का आरोप था कि राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया जा रहा है और उनका माइक बंद किया जा रहा है। इसी आक्रोश में कुछ विपक्षी सांसद वेल (Well) में आ गए और उन्होंने महासचिव तथा लोकसभा अधिकारियों की मेजों के पास जाकर आसन की तरफ कागज (Papers) उछाल दिए।
संसदीय लोकतंत्र में आसन पर कागज फेंकना घोर अनुशासनहीनता मानी जाती है। हंगामे को देखते हुए सदन की कार्यवाही पहले दोपहर तीन बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। लेकिन जब तीन बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो सरकार पूरी तैयारी के साथ आई थी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने एक प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि कुछ सदस्यों ने जानबूझकर सदन की अवमानना की है और आसन की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने आठों सांसदों का नाम लेते हुए प्रस्ताव रखा कि इन्हें नियम 374(2) के तहत संसद के वर्तमान सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किया जाए। इस प्रस्ताव को सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया।
निलंबित होने वाले सांसदों में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के प्रमुख चेहरे शामिल हैं। इनमें मणिक्कम टैगोर, किरण कुमार रेड्डी, प्रशांत पडोले, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, एस. वेंकटेशन, गुरजीत सिंह औजला और अमरेंद्र सिंह राजा वारिंग के नाम हैं। पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने इन नामों की घोषणा करते हुए कहा कि इन सदस्यों ने संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन किया है। निलंबन की घोषणा के साथ ही सदन की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। यह कार्रवाई विपक्ष के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि बजट सत्र में सरकार को घेरने के लिए उनके पास अब आठ आवाजें कम होंगी।
इस निलंबन के बाद संसद परिसर में सियासी पारा और चढ़ गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य निलंबित सांसदों ने संसद के मकर द्वार (Makar Dwar) पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या और विपक्ष की आवाज दबाने की साजिश करार दिया। कांग्रेस सांसदों ने भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट और चीन सीमा विवाद जैसे मुद्दों पर सरकार की चुप्पी के खिलाफ नारेबाजी की। राहुल गांधी का तर्क था कि उन्होंने जो लेख सदन के पटल पर रखा, वह सत्यापित था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा था, लेकिन सरकार सच सुनने से डर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब-जब चीन और पाकिस्तान की बात आती है, सरकार बचाव की मुद्रा में आ जाती है और नियमों की आड़ लेती है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
संसद में कागज फेंकना निश्चित रूप से निंदनीय है, लेकिन 8 सांसदों का एक साथ निलंबन यह दर्शाता है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद की गुंजाइश खत्म हो चुकी है। राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दे गंभीर हैं। अगर पूर्व सेना प्रमुख ने चीन की घुसपैठ पर कुछ लिखा है, तो देश को वह जानने का हक है।
The Trending People का विश्लेषण है कि सरकार ने निलंबन का ब्रह्मास्त्र चलाकर विपक्ष को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश की है, लेकिन इससे सड़क पर संघर्ष और तेज होगा। बजट सत्र में बहस के बजाय अब केवल शोर सुनाई देने की आशंका है। एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह जरूरी है कि आसन की गरिमा बनी रहे, लेकिन साथ ही विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका भी मिले। यह निलंबन समस्या का समाधान नहीं, बल्कि टकराव की नई शुरुआत है।
