नाभा जेल से रिहा होने के बाद शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री Bikram Singh Majithia ने भाजपा के साथ संभावित गठबंधन को लेकर बड़ा और राजनीतिक रूप से अहम बयान दिया है। सोमवार को चंडीगढ़ से अमृतसर तक निकाली गई यात्रा के दौरान मजीठिया का पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जगह-जगह जोरदार स्वागत किया। इसी यात्रा के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने साफ किया कि अकाली दल पंजाब के हितों को सर्वोपरि रखते हुए हर विकल्प पर विचार करने के लिए तैयार है।
भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर मजीठिया ने कहा कि Shiromani Akali Dal ने अतीत में Bharatiya Janata Party के साथ मिलकर पंजाब के विकास और स्थिरता के लिए काम किया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में पंजाब बेहद गंभीर दौर से गुजर रहा है। राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति, युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, किसानों की परेशानियां और दिल्ली सरकार के कथित हस्तक्षेप जैसे मुद्दे अकाली दल के लिए गहरी चिंता का विषय हैं।
मजीठिया ने दो टूक कहा कि अकाली दल किसी भी फैसले में व्यक्तिगत या राजनीतिक अहंकार को आड़े नहीं आने देगा। उनका कहना था कि “तेरी-मेरी” से ऊपर उठकर पार्टी पंजाब की भलाई के लिए हर जरूरी फैसला लेने को तैयार है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अकाली दल और भाजपा पहले भी साथ मिलकर पंजाब में सरकार चला चुके हैं। वर्ष 1997, 2007 और 2012 में बने अकाली-भाजपा गठबंधन को उन्होंने राज्य के राजनीतिक इतिहास का अहम अध्याय बताया।
हालांकि, मजीठिया ने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा के साथ दोबारा गठबंधन होगा या नहीं, इसका अंतिम फैसला पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा आपसी विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में पंजाब की राजनीतिक दिशा तय करने में यह मुद्दा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Our Final Thoughts
बिक्रम सिंह मजीठिया का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंजाब की राजनीति गहरे असमंजस और बदलाव के दौर से गुजर रही है। एक ओर राज्य में कानून-व्यवस्था और आर्थिक चुनौतियां हैं, तो दूसरी ओर केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर लगातार बहस चल रही है। मजीठिया का “पंजाब की भलाई सर्वोपरि” वाला रुख यह संकेत देता है कि शिरोमणि अकाली दल अब पुराने राजनीतिक मतभेदों को पीछे छोड़कर व्यावहारिक राजनीति की ओर बढ़ सकता है। हालांकि, भाजपा के साथ गठबंधन का मुद्दा अकाली दल के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि 2020 के किसान आंदोलन के बाद दोनों दलों के रिश्तों में दूरी आई थी। ऐसे में यदि गठबंधन पर गंभीर चर्चा होती है, तो उसका असर न सिर्फ अकाली दल की राजनीति पर पड़ेगा, बल्कि पूरे पंजाब के सियासी समीकरण बदल सकते हैं। फिलहाल, मजीठिया का बयान एक दरवाजा खोलता दिख रहा है, लेकिन उस दरवाजे से पार्टी आगे बढ़ेगी या नहीं, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।
