पूर्व सेना प्रमुख M. M. Naravane की कथित अप्रकाशित किताब फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी को लेकर संसद से लेकर सियासी गलियारों तक विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी का आरोप है कि सरकार चीन के साथ 2020 के सीमा विवाद से जुड़े तथ्यों को सामने आने से रोकने की कोशिश कर रही है और इसी वजह से नरवणे की किताब को लेकर भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है।
राहुल गांधी ने कहा कि एक तरफ प्रकाशक Penguin Random House की ओर से यह कहा जा रहा है कि किताब प्रकाशित ही नहीं हुई है, जबकि दूसरी ओर खुद जनरल नरवणे ने पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस किताब के उपलब्ध होने की जानकारी दी थी। राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान जनरल नरवणे का साल 2023 का एक पुराना ट्वीट दिखाया, जिसमें किताब से जुड़ा लिंक साझा किए जाने का दावा किया गया था। राहुल ने व्यंग्य करते हुए कहा कि या तो प्रकाशक की बात मानी जाए या फिर देश के पूर्व सेना प्रमुख की, और स्वाभाविक तौर पर वह एक जनरल पर भरोसा करना ज्यादा उचित समझते हैं।
नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि इस किताब में चीन के साथ 2020 में हुए सीमा विवाद, खासकर कैलाश रेंज से जुड़े घटनाक्रम को लेकर ऐसे तथ्य दर्ज हैं, जो मौजूदा सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi के लिए असहज हो सकते हैं। राहुल गांधी के मुताबिक, यही वजह है कि सरकार इस विषय पर खुली बहस से बच रही है और किताब के अस्तित्व को लेकर भ्रम पैदा किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सच्चाई को दबाने के लिए सरकार प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थानों का सहारा ले रही है।
राहुल गांधी ने इस पूरे मामले को सिर्फ एक किताब तक सीमित न बताते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मुद्दा करार दिया। उनका कहना था कि जब पूर्व सेना प्रमुख अपने अनुभव और घटनाओं को दर्ज करते हैं, तो उस पर सवाल उठाने या उसे दबाने की बजाय संसद में खुली चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बहस से भाग रही है और विपक्ष को बोलने से रोका जा रहा है।
वहीं, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सत्तापक्ष का रुख यह रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों पर सार्वजनिक बयानबाजी से बचना चाहिए। हालांकि, राहुल गांधी के ताजा आरोपों के बाद यह विवाद और गहराने के आसार हैं और संसद के आगामी सत्रों में इस पर तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।
Our Final Thoughts
पूर्व सेना प्रमुख की किताब को लेकर उठा यह विवाद भारतीय राजनीति में पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन की पुरानी बहस को फिर सामने ले आता है। एक ओर सरकार का तर्क है कि संवेदनशील सैन्य जानकारियों पर सार्वजनिक चर्चा से सावधानी बरतनी चाहिए, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही और सच्चाई के अधिकार से जोड़कर देख रहा है। राहुल गांधी द्वारा नरवणे के पुराने ट्वीट का हवाला देना इस मुद्दे को और जटिल बना देता है, क्योंकि इससे किताब के अस्तित्व और उसकी सामग्री पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार इस पर स्पष्ट स्थिति रखती है या यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाता है। जो भी हो, इस विवाद ने यह साफ कर दिया है कि 2020 के सीमा विवाद से जुड़े सवाल अब भी देश की राजनीति में गूंज रहे हैं।
