असम कांग्रेस में भूचाल: भूपेन कुमार बोरा का इस्तीफा और 'हिंदू नेता' बयान पर छिड़ा संग्राम
विशेष संवाददाता, गुवाहाटी | असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने पार्टी नेतृत्व द्वारा अनदेखी और अपमान का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया है। 32 वर्षों तक पार्टी की सेवा करने वाले बोरा के इस कदम ने चुनाव से ऐन पहले कांग्रेस की सांगठनिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीएम सरमा का तंज: "कांग्रेस ने खोया आखिरी हिंदू नेता"
बोरा के इस्तीफे पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखा प्रहार करते हुए उन्हें 'असम कांग्रेस का आखिरी हिंदू नेता' बताया। सरमा ने दावा किया कि अब पार्टी में केवल एक विशेष समुदाय का प्रभाव बढ़ गया है और अगले दो हफ्तों में पांच और विधायक पाला बदल सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गौरव गोगोई के नेतृत्व में पार्टी की विचारधारा बदल रही है, जिससे जमीनी हिंदू नेता असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
आंतरिक मतभेद और अपमान की कहानी
भूपेन बोरा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह फैसला पार्टी के भविष्य की चिंता में लिया है। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी के करीबी गौरव गोगोई को कमान मिलने के बाद से बोरा को लगातार दरकिनार किया जा रहा था। बोरा का मानना है कि जिस संगठन को उन्होंने मुश्किल समय में संभाला, वहां अब उनके अनुभव की कद्र नहीं है। उन्होंने कहा कि उचित समय पर वे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सारी जानकारी साझा करेंगे।
नेतृत्व परिवर्तन से बढ़ा असंतोष
असम कांग्रेस में विवाद की शुरुआत करीब एक साल पहले गौरव गोगोई की नियुक्ति से हुई थी। हाईकमान ने हिमंत बिस्वा सरमा को चुनौती देने के लिए गोगोई को चुना, जिससे पुराने कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा हो गया। संगठन को दोबारा खड़ा करने वाले बोरा को निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, जिससे आंतरिक गुटबाजी चरम पर पहुंच गई।
मनाने की कोशिशें जारी
बोरा के इस्तीफे से मची खलबली के बीच गौरव गोगोई और भंवर जितेंद्र सिंह जैसे वरिष्ठ नेता उन्हें मनाने उनके आवास पहुंचे हैं। विपक्षी नेता अखिल गोगोई ने भी उनसे संपर्क किया है। जहां कांग्रेस डैमेज कंट्रोल में जुटी है, वहीं सत्ता पक्ष का दावा है कि असम कांग्रेस बिखरने की कगार पर है।
संपादकीय विश्लेषण
बोरा का इस्तीफा असम कांग्रेस की सांगठनिक विफलता का प्रतीक है। सीएम सरमा द्वारा इसे सांप्रदायिक रंग देना एक सोची-समझी चुनावी रणनीति है। यदि गौरव गोगोई अनुभवी नेताओं को साथ लाने में विफल रहते हैं, तो आगामी चुनाव पार्टी के लिए बड़ी चुनौती होंगे। यह इस्तीफा कांग्रेस के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
