अमित शाह की राहुल गांधी को खुली चुनौती: 'किसानों को गुमराह करना बंद करें
नेशनल डेस्क, नई दिल्ली | केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर किसानों के मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला है। एक सार्वजनिक मंच से शाह ने राहुल गांधी पर किसानों को गुमराह करने और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का गंभीर आरोप लगाया। गृह मंत्री ने आक्रामक रुख अपनाते हुए राहुल गांधी को खुली चुनौती दी कि अगर उन्हें अपने आंकड़ों पर इतना ही भरोसा है, तो वे भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के अध्यक्ष के साथ मंच साझा कर खुली बहस करें।
"किसानों के नाम पर राजनीति न करें"
अमित शाह ने कहा कि विपक्ष के पास मुद्दों का अभाव है, इसलिए वे किसानों की भावनाओं को भड़काकर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा:
"राहुल गांधी को किसानों की वास्तविकता का ज्ञान नहीं है। वे केवल भ्रम फैला रहे हैं। मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि वे हमारे युवा मोर्चा के अध्यक्ष के साथ किसी भी मंच पर आ जाएं और कृषि आंकड़ों पर बहस कर लें। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।"
मोदी सरकार की उपलब्धियों का बचाव
गृह मंत्री ने केंद्र सरकार की कृषि नीतियों का पुरजोर बचाव करते हुए कई अहम आंकड़े पेश किए:
- बजट में ऐतिहासिक वृद्धि: शाह ने बताया कि यूपीए सरकार की तुलना में मोदी सरकार ने कृषि बजट में कई गुना वृद्धि की है, जिससे बुनियादी ढांचे और सिंचाई परियोजनाओं को गति मिली है।
- कर्ज माफी और सम्मान निधि: उन्होंने पीएम किसान सम्मान निधि और विभिन्न कर्ज माफी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने किसानों की जेब में सीधे पैसा पहुंचाया है।
- कृषि व्यापार समझौते: शाह ने कृषि व्यापार समझौतों को किसानों के लिए नए बाजार खोलने वाला कदम बताया और कहा कि इससे उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है।
विपक्ष पर पलटवार
शाह ने कांग्रेस के कार्यकाल की याद दिलाते हुए पूछा कि जब वे सत्ता में थे, तब किसानों के लिए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को क्यों नहीं लागू किया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल चुनाव के समय ही किसानों की हितैषी बनने का ढोंग करती है।
संपादकीय विश्लेषण
अमित शाह का यह बयान आगामी चुनावों से पहले 'किसान वोट बैंक' को साधने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। राहुल गांधी को सीधे बहस की चुनौती देकर और वह भी युवा मोर्चा अध्यक्ष के स्तर पर, शाह ने एक तीर से दो शिकार किए हैं—पहला, राहुल के कद को कम आंकना और दूसरा, अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरना। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इस 'ओपन चैलेंज' का जवाब आंकड़ों से देती है या राजनीतिक बयानों से।
