चीन-जापान व्यापार युद्ध: ताइवान पर PM के बयान से भड़का ड्रैगन, 40 जापानी कंपनियों पर की सख्त कार्रवाई; एशिया में नया तनाव
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली | अमेरिका से शुरू हुए टैरिफ और प्रतिबंधों के माहौल के बीच अब एशिया में एक नया व्यापारिक तनाव उभर आया है। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची (Sanae Takaichi) के ताइवान को लेकर दिए गए बयान के बाद चीन ने बेहद सख्त कदम उठाते हुए 40 बड़ी जापानी कंपनियों पर कार्रवाई की है।
चीन ने 20 जापानी कंपनियों को 'निर्यात नियंत्रण (कंट्रोल) सूची' में और 20 अन्य कंपनियों को 'निगरानी सूची' में डाल दिया है। चीन का यह अप्रत्याशित कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव और संभावित ट्रेड वॉर का एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
इस पूरे मामले की शुरुआत ताइवान के संवेदनशील मुद्दे से हुई। मामला तब गरमाया जब जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की ताइवान को लेकर की गई पुरानी टिप्पणियों पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई। गौरतलब है कि ताइवान एक स्व-शासित द्वीप है, जिस पर चीन अपना दावा करता है और उसे अपना अलग हुआ प्रांत मानता है। चीन ने आरोप लगाया कि ताइवान मुद्दे पर जापान की कोई भी टिप्पणी सीधे तौर पर उसके 'आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप' के समान है।
किन कंपनियों पर गिरी गाज? (निर्यात नियंत्रण सूची)
चीन के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, निर्यात नियंत्रण सूची में शामिल 20 कंपनियों को चीनी निर्यातक अब “डुअल-यूज” (Dual-use) वस्तुएं नहीं बेच सकेंगे। डुअल-यूज वस्तुएं वे होती हैं जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। इस सूची में शामिल प्रमुख कंपनियां हैं:
- Mitsubishi Heavy Industries (मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज) और इसकी अनुषंगी इकाइयां
- Kawasaki Heavy Industries (कावासाकी हेवी इंडस्ट्रीज)
- Fujitsu (फुजित्सु) के कुछ प्रभाग
इन कंपनियों का मुख्य रूप से संबंध जहाज निर्माण, विमान इंजन, समुद्री मशीनरी और उच्च-तकनीकी उपकरणों से है।
निगरानी सूची में कौन?
दूसरी 'निगरानी सूची' (Watchlist) में भी 20 कंपनियों को रखा गया है। इन कंपनियों को चीनी निर्यातकों से सामान लेने के लिए अब विशेष निर्यात लाइसेंस, जोखिम आकलन रिपोर्ट और यह लिखित आश्वासन देना होगा कि चीन से आयातित वस्तुओं का उपयोग 'जापान की सेना' द्वारा नहीं किया जाएगा। इस सूची में शामिल प्रमुख नाम हैं:
- Subaru Corporation (सुबारू कॉर्पोरेशन)
- Mitsubishi Materials Corporation (मित्सुबिशी मटेरियल्स कॉर्पोरेशन)
- Institute of Science Tokyo (इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस टोक्यो)
चीन का क्या कहना है?
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अपनी इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि ये कदम जापान के “पुनः सैन्यीकरण” (Remilitarization) और उसकी संभावित परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाए गए हैं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के तहत पूरी तरह वैध हैं। हालांकि, मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ये उपाय 'सीमित दायरे' में हैं और सामान्य चीन-जापान व्यापार पर इसका व्यापक असर नहीं पड़ेगा।
रिश्तों पर संभावित असर और कूटनीतिक मायने
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ताइवान को लेकर संवेदनशीलता पहले से ही क्षेत्रीय राजनीति का अहम मुद्दा रही है। ऐसे में यह कदम दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में और तनाव बढ़ा सकता है। चीन आवश्यकता पड़ने पर ताइवान को लेकर बल प्रयोग की बात भी कह चुका है। ताइवान की संप्रभुता के समर्थन में किसी भी विदेशी टिप्पणी (खासकर जापान और अमेरिका की) पर चीन आमतौर पर कड़ा रुख अपनाता है। इस कदम से एशिया की सप्लाई चेन (Supply Chain) भी प्रभावित हो सकती है।
संपादकीय विश्लेषण
चीन द्वारा जापानी कंपनियों पर की गई यह कार्रवाई विशुद्ध रूप से एक आर्थिक कदम नहीं है, बल्कि यह कूटनीतिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी भू-राजनीतिक (Geopolitical) रणनीति है। चीन यह संदेश देना चाहता है कि ताइवान के मुद्दे पर वह कोई भी 'लक्ष्मण रेखा' पार करने वाले देश को आर्थिक रूप से दंडित करने से पीछे नहीं हटेगा। जापान के लिए यह एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था के लिए चीन से आने वाला कच्चा माल और तकनीकी कलपुर्जे बेहद महत्वपूर्ण हैं।
