महाराष्ट्र राज्यसभा चुनाव: 6 सीटों पर महासंग्राम; महायुति के खाते में 5 सीटें तय, जानें BJP, शिवसेना और NCP से कौन है रेस में
पॉलिटिकल डेस्क, मुंबई | महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों राजधानी दिल्ली तक हलचल तेज हो गई है। राज्य की छह राज्यसभा सीटों के लिए होने वाली चुनावी जंग अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। महाराष्ट्र विधानसभा के मौजूदा संख्याबल और गणित को देखते हुए सत्ताधारी 'महायुति' गठबंधन के पाले में 6 में से 5 सीटें आसानी से जाती दिख रही हैं, जबकि विपक्षी 'महाविकास आघाड़ी' (MVA) के खाते में केवल एक सीट लगभग पक्की है।
सीटों के इस स्पष्ट गणित के बावजूद असली रोमांच उम्मीदवारों के चयन और पर्दे के पीछे चल रही सियासी घेराबंदी को लेकर बना हुआ है।
BJP की रणनीति: ये 4 बड़े चेहरे हैं रेस में
भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बार अपने कोटे से चार सीटों पर उम्मीदवार उतारने की पूरी तैयारी में है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आवास पर होने वाली अहम बैठक में इन नामों पर अंतिम मुहर लगनी है।
- विनोद तावड़े: चर्चाओं के बाजार में सबसे बड़ा नाम विनोद तावड़े का है। अगर पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजती है, तो इसे उनकी मुख्यधारा की सक्रिय राजनीति में एक 'धमाकेदार वापसी' के तौर पर देखा जाएगा।
- अन्य दावेदार: तावड़े के साथ ही विजया रहाटकर और धैर्यशील पाटील जैसे प्रमुख चेहरों पर भी दांव लगाया जा सकता है।
- रामदास अठावले: केंद्रीय मंत्री और सहयोगी दल के नेता रामदास अठावले की सीट लगभग सुरक्षित मानी जा रही है।
NCP और शिवसेना (शिंदे गुट) में खींचतान
गठबंधन के अन्य साथियों की बात करें तो वहां भी टिकट को लेकर भारी रस्साकशी देखने को मिल रही है:
- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट): दिवंगत अजित पवार की पार्टी से पार्थ पवार का नाम सबसे आगे चल रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे के हालिया संकेतों से यह साफ है कि पार्टी के भीतर पार्थ को दिल्ली भेजने की पुरजोर इच्छा है।
- शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट): मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में भी खींचतान कम नहीं है। पूर्व सांसद राहुल शेवाले रेस में सबसे आगे चल रहे हैं, हालांकि पार्टी के अनुभवी नेता गजानन कीर्तिकर की मजबूत दावेदारी ने इस मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
MVA की एक सीट: शरद पवार के स्वास्थ्य और फैसले पर सस्पेंस
दूसरी तरफ, विपक्ष यानी महाविकास आघाड़ी के खेमे में अपनी इकलौती सुरक्षित सीट को लेकर भी रस्साकशी जारी है। कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट दोनों इस सीट पर अपना दावा ठोक रहे हैं। हालांकि, सबकी निगाहें फिलहाल अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे 85 वर्षीय दिग्गज नेता शरद पवार पर टिकी हैं। उनकी 60 सालों की लंबी संसदीय पारी क्या आगे भी जारी रहेगी, इसका अंतिम फैसला उनके स्वास्थ्य और स्वयं उनकी इच्छा पर निर्भर करेगा। उनके पोते रोहित पवार ने स्पष्ट किया है कि पूरा कुनबा उन्हें दोबारा सदन में देखना चाहता है।
अगले 48 घंटे बेहद अहम
अजित पवार के असामयिक निधन के बाद बदले हुए राजनीतिक हालातों में यह राज्यसभा चुनाव महायुति और एमवीए दोनों के लिए और भी महत्वपूर्ण हो गया है। वोटों के गणित को देखें तो विपक्ष के पास अपनी एक जीत के लिए जरूरी आंकड़ों से ज्यादा विधायक मौजूद हैं, लेकिन सत्ता पक्ष की पैनी नजर किसी भी संभावित 'क्रॉस वोटिंग' या सेंधमारी पर टिकी है। अगले दो दिनों में जब नामांकन की तस्वीर पूरी तरह साफ होगी, तब ही पता चलेगा कि महाराष्ट्र से दिल्ली की उड़ान कौन-कौन भरेगा।
संपादकीय विश्लेषण
महाराष्ट्र के ये राज्यसभा चुनाव महज़ दिल्ली जाने की लड़ाई नहीं हैं, बल्कि यह राज्य के भीतर पार्टियों के आंतरिक शक्ति प्रदर्शन का भी मंच है। विनोद तावड़े का संभावित 'कमबैक' भाजपा के भीतर नए समीकरणों को जन्म दे सकता है। वहीं, अजित पवार के निधन के बाद पार्थ पवार को आगे करना एनसीपी (अजित गुट) के लिए अपनी राजनीतिक विरासत और कार्यकर्ताओं के मनोबल को बनाए रखने की एक अनिवार्य कोशिश है। शरद पवार का राजनीतिक भविष्य भी इस चुनाव के जरिए एक नई दिशा तय करेगा।
